मंगलवार, 12 मई 2009

ग्वालियर के पत्रकारों ने पंजाब केसरी के सम्पादक स्व. रमेश चन्द्र जी की 25 वीं पुण्य तिथि पर श्रृध्दासुमन अर्पित किये

ग्वालियर के पत्रकारों ने पंजाब केसरी के सम्पादक स्व. रमेश चन्द्र जी की 25 वीं पुण्य तिथि पर श्रृध्दासुमन अर्पित किये

रमेशचन्द्र जी की शहादत जैसा दूसरा उदाहरण नहीं - राकेश पाठक

ग्वालियर 12 मई 09। आज यहां पड़ाव स्थित सूचना केन्द्र में ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकारों ने कलम के सिपाही पंजाब केसरी के मुख्य सम्पादक स्व. रमेशचन्द्र जी को उनकी 25 वीं पुण्य तिथि पर ऋध्दासुमन अर्पित कर मौन श्रृध्दांजली दी। श्रृध्दांजली सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ. केशव पांडे ने कहा कि आज स्व. रमेश चन्द्र की 25 वीं पुण्य तिथि है मैं अपेक्षा करता हूँ कि उनकी याद को चिरस्थाई बनाने हेतु प्रतिवर्ष विशाल स्तर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जाये जिसमें उनके परिवार के सदस्य की उपस्थिति भी आश्वस्त की जाये।

       नई दुनियां के सम्पादक राकेश पाठक ने कहा कि आज तक किसी भी भाषाई समाचार पत्र के पत्रकार पिता और पुत्र ने एक के बाद एक शहादत दी हो इसका कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी के बाद भारतीय पत्रकारिता के इतिहास की यह ऐसी बड़ी शहादत है। जो सदैव याद की जाती रहेगी। उनकी कुर्वानी हमें सच्चे रास्ते पर चलने की हमेशा प्रेरणा देती रहेगी।

      वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में स्व. रमेश चन्द्र जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। श्री अचल ने एक कार्यक्रम में स्व. रमेश चन्द्र जी से हुई भेंट का भी संस्मरण सुनाया।

 जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक श्री सुभाष चन्द्र अरोरा ने कहा कि पंजाब और देश की पत्रकारिता में पंजाब केसरी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लाला जगत नारायण जी एवं उनके पुत्र स्व. रमेश चन्द्र जी की शहादत देश की पत्रकारिता के लिये एक उदाहरण है। उन्होंने आतंकवाद से पीड़ित परिवारों का दर्द महसूस किया और अपने समाचार के माध्यम से शहीद फंड की स्थापना कर प्रभावित परिवारों की मदद की। उन्होंने आतंकवाद के आगे कभी अपनी कलम को झुकने नहीं दिया और पूरी निर्भीकता के साथ आजीवन आतंकवाद के विरूध्द लिखा।

 कार्यक्रम के शुभारंभ में पंजाब केसरी के ग्वालियर व्यूरोचीफ सुरेश डंडौतिया ने स्व. रमेश चन्द्र जी की निर्भीकता का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने आतंकवादियों की धमकियों की परवाह किये बिना अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने पत्रकारिता को एक मिशन के रूप में जिया और सच्चाई के आगे किसी भी बात की परवाह नहीं की। बारह मई 1984 को आतंकवाद के विरोध की कीमत उन्होंने अपनी जान की शहादत देकर चुकाई। पंजाब केसरी की निर्भीकता का यह क्रम आज तीसरी पीढ़ी में भी अनवरत जारी है।

      कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार हिन्दुस्तान एक्सप्रेस के सम्पादक सुरेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र श्रीवास्तव, सुरेन्द्र माथुर, विनय अग्रवाल, हरेन्द्र सारस्वत, देवश्रीमाली, राजेश शर्मा, अरूण तोमर, राजेश समाधिया, देवेन्द्र मोहन शर्मा, अजय मिश्रा, राम किशन कटारे, सुमन सिंह सिकरवार, सतेन्द्र सिंह सिकरवार, उप संचालक जनसंपर्क जी एस. मौर्य, सूचना सहायक हितेन्द्र भदौरिया, आर सी. इंदौरिया, महेश झा, विक्रम प्रजापति सहित अनेकों पत्रकारगण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सुरेश डंडौतिया ने तथा आभार प्रदर्शन देवश्रीमाली ने किया।

 

1 टिप्पणी:

विजय तिवारी " किसलय " ने कहा…

कलम के सिपाही पंजाब केसरी के मुख्य सम्पादक स्व. रमेशचन्द्र जी को उनकी 25 वीं पुण्य तिथि पर मेरी भी विनम्र श्रद्धांजलि .
- विजय