हरसी नहर से 75 हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र की रिकार्ड सिंचाई
नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से किसान प्रसन्न
ग्वालियर जिले की हरसी नहर प्रणाली से इस वर्ष खरीफ और रबी फसलों के 75 हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिला है। यह क्षेत्र आम तौर पर होने वाली सिंचाई से लगभग दुगना है। यही नहीं इस वर्ष नहर के अंतिम छोर पर बसे किसानों को पहले पानी दिया गया, उसके पश्चात शीर्ष सिरे के किसानों को लाभ मिला। इस वितरण व्यवस्था से किसान बहुत प्रसन्न हैं। किसानों ने अपनी प्रसन्नता मध्यप्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना की कन्सल्टेन्सी स्मेक के द्वारा 8 और 9 जनवरी को डबरा और शेरपुर में आयोजित किसान सम्मेलनों में व्यक्त की। उन्होंने सामूहिक रुप से जल संसाधन विभाग को धन्यवाद दिया। सम्मेलनों में उन्होंने अपनी समस्याएं भी बताई।
ग्वालियर जिले के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री एन.पी.कोरी ने जानकारी दी कि हरसी नहर प्रणाली का विश्व बैंक की परियोजना वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग प्रोजेक्ट के तहत सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। 85 किलोमीटर लंबी इस नहर प्रणाली से लगभग 160 गांवों को सिंचाई का लाभ मिलता है। सुदृढ़ीकरण के कारण नहर में बेरोकटोक अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से इस वर्ष खरीफ में लगभग 30 हजार हैेक्टेयर क्षेत्र, जिसमें ज्यादातर चांवल का क्षेत्र है, को और रबी में लगभग 45 हजार हैक्टेयर क्षेत्र, जो ज्यादातर गेंहू का क्षेत्र है, को सिंचाई का लाभ दिया गया है। सिंचाई व्यवस्था की विशेषता यह है कि अंतिम छोर के किसान को पहले पानी दिया गया है। सिंचाई क्षेत्र के रकबे में वृध्दि से ज्यादा पैदावार और भरपूर पानी मिलने से प्रति हैक्टेसर उत्पादन भी बढ़ेगा। सिंचाई का यह क्षेत्र सामान्य से लगभग दुगना है।
मध्यप्रदेश वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना की कन्सल्टेन्सी स्मेक द्वारा डबरा और शेरपुरा में जल उपभोक्ता संथाओं के अध्यक्षों और किसानों के सम्मेलनों में किसानों ने नहर के अंतिम छोर के किसानों को पहले पानी देने पर जल संसाधन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। इन सम्मेलनों में अध्यक्षों ने अपनी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि नहरों की रखरखाव के लिए मिलने वाले मानदेय में वृध्दि की जाए, संथा, अध्यक्षों के अधिकारों में वृध्दि की जाए। वितरिका और अन्य समितियों के चुनाव शीघ्र कराया जाए। किसानों ने खाद, बीज और विपणन संबंधी समस्याओं की भी बात बताई। वाटर सेक्टर परियोजना के विशेषज्ञों और कन्सन्टेन्सी के अधिकारियों ने समस्याओं को सुना और उनका निराकरण किया।
किसान सम्मेलनों को स्मेक के डिप्टी टीम लीडर श्री जी.पी. दुबे, स्वारा संचालक श्री आर.के. चाचोंदिया, स्मेक के विशेषज्ञ श्री नीतिन कौशल, वाटर सेक्टर परियोजना के पी.आई. एम. विशेषज्ञ श्री अमिताभ मिश्र, सामाजिक विकास विशेषज्ञ श्री आलोक मित्रा, पर्यावरण विशेष श्री ज्ञानेश शुक्ला, बेसिन मैनेजर श्री के.जी. सिंह, कुमारी देवयानी बिल्लौरे और सुश्री मेघा चौरे ने भी संबोधित किया।
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