शुक्रवार, 8 मई 2009

नगर के चार नर्सिंग होम्स बंद करने के आदेश , पी सी पी एन डी टी ऐक्ट के उल्लंघन पर जिला दण्डाधिकारी ने की कार्रवाई

नगर के चार नर्सिंग होम्स बंद करने के आदेश , पी सी पी एन डी टी ऐक्ट के उल्लंघन पर जिला दण्डाधिकारी ने की कार्रवाई

बेटी बचाओ संस्था ने सी डी. के साक्ष्य के साथ की थी शिकायत

ग्वालियर 7 मई 09। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री आकाश त्रिपाठी ने ग्वालियर नगर में संचालित चार नर्सिंग होम्स के खिलाफ पी सी. पी एन डी टी. एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम के सक्षम अधिकारी की हैसियत से उक्त चारों नर्सिंग होम्स को बंद करने के आदेश दिये हैं। साथ जिनके एम टी पी.पंजीयन थे उन्हें निलंबित कर दिया है। जिला दण्डाधिकारी ने इन सभी को सूचना पत्र जारी कर सात दिवस में जबाव प्रस्तुत करने के आदेश दिये हैं।

       गौरतलब है कि नई दिल्ली की बेटी बचाओ समिति के श्री सुधीर कुमार शर्मा ने साक्ष्यों के साथ जिला दण्डाधिकारी को शिकायती आवेदन प्रस्तुत कर इन नर्सिंग होम्स द्वारा पी सी पी एन डी टी. ऐक्ट के उल्लंघन का व्यौरा दिया गया था। बेटी बचाओ समिति द्वारा साक्ष्य के रूप में एक सीडी. प्रस्तुत की थी जिसमें संध्या नर्सिंग होम दर्पण कॉलोनी की डॉ. संध्या तिवारी, सुरेश मेमोरियल क्लीनिक हुरावली रोड बारादरी मुरार के चिकित्सक डॉ एस के. श्रीवास्तव, माँ तपेश्वरी कॉम्प्लेक्स सेन्ट्रल बैंक के पास फोर्ट रोर्ड ग्वालियर की चिकित्सक डॉ. श्रीमती प्रदीप सक्सेना व त्रिवेदी नर्सिंग होम नई सड़क ग्वालियर की डॉ श्रीमती सुषमा त्रिवेदी, को गर्भपात संबंधी चर्चा एवं परामर्श करते हुए चित्राकिंत किया गया था। जिला दण्डाधिकारी एवं गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम के सक्षम अधिकारी  श्री त्रिपाठी ने पाँच सदस्यीय समिति से इस शिकायती आवेदन के तथ्यों का पता लगवाया। उक्त तथ्य प्रथम दृष्टया सही पाये जाने पर जिला दण्डाधिकारी ने उक्त चारों नर्सिंग होम्स को बंद करने के आदेश जारी किये हैं। साथ ही पी सी पी एन डी टी. एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।

       मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अर्चना शिंगवेकर ने बताया कि डॉ. श्रीमती प्रदीप सक्सेना ने न केवल भ्रूणलिंग परीक्षण के आधार पर गर्भपात करवाने की सलाह दी वल्कि वे सिविल हॉस्पिटल डबरा में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में पदस्थ होने के बावजूद अवैध रूप से मुख्यालय से बाहर निजी प्रैक्टिस में संलग्न पाईं गई हैं। इसी तरह डॉ एस के. श्रीवास्तव पी एन डी टी एक्ट के उल्लंघन के अलावा चिकित्सकीय योग्यता के विपरीत अर्थात होम्योपैथिक चिकित्सक होते हुए एलौपैथी पध्दति से इलाज करते पाये गये है।

       उल्लेखनीय है कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के मकसद से लागू किये गये पी सी पी एन डी टी एक्ट में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इन नर्सिंग होम्स ने गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीकी अधिनियम 1994 (पी सी पी एन डी टी. एक्ट) में निहित प्रावधानों के साथ साथ गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम 1971 की धारा 3(2) का उल्लंघन भी किया है।

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ग्वालियर टाइम्स आपकी टिप्पणी का स्वागत करती है, टिप्पणी संयत एवं भद्र होना चाहिये अन्यथा आपकी टिप्पणी प्रकाशन से अवरूद्ध कर दी जायेगी व आपकी आई.डी ब्लाक कर दी जायेगी