मत्स्य कृषक विकास अभिकरण योजना अंतर्गत 5.35 लाख का ऋण स्वीकृत
ग्वालियर 14 सितम्बर 09। मत्स्य पालकों को उन्नत तकनीक के आधार पर मत्स्य पालन करने के लिये मत्स्य कृषक विकास अभिकरण योजना से लाभान्वित किया जाता है। इसमें तालाब निर्माण व सुधार, जाली लगाने, मत्स्य बीज आहार, उर्वरक, खाद व दवाइयों आदि के लिये अनुदान व प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है।
ग्वालियर संभाग के संयुक्त संचालक श्री के एन. दीक्षित ने बताया कि मत्स्य कृषक विकास अभिकरण योजना के अंतर्गत 5 लाख 35 हजार रूपये की ऋण स्वीकृत कर वितरित किये जा चुके हैं। संभाग के शिवपुरी जिले में इस वित्तीय वर्ष में 4 लाख 50 हजार रूपये के ऋण स्वीकृत कर वितरित किये गये हैं। इसी प्रकार ग्वालियर जिले में 85 हजार रूपये के ऋण स्वीकृत कर वितरित किये गये।
मत्स्य कृषक विकास अभिकरण योजना में मत्स्य पालन से संबंध्द कोई भी व्यक्ति पात्र हितग्राही है। इस योजना में ग्रामीण तालाबों को पट्टे पर लेकर अभिकरण के अंतर्गत मत्स्य पालन करने वाले गरीबी रेखा से नीचे के सभी वर्ग के मछुआरे हितग्राही बनाये जाते हैं। इस योजना में स्वयं की भूमि में तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन करने वाले व्यक्ति भी हितग्राही हो सकते हैं।
योजना के अंतर्गत तालाब मरम्मत, जाली लगाने, मत्स्य बीज, आहार, उर्वरक आदि के लिये सामान्य वर्ग के मत्स्य पालकों को 20 प्रतिशत तक तथा अनुसूचित जाति, जनजाति के मत्स्य पालकों को 25 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।
प्रगतिशील मत्स्य पालकों को नवीन विकसित तकनीक के प्रशिक्षण के लिये राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर जाने की व्यवस्था है। इसके साथ ही तालाब पट्टा धारकों को 15 दिवसीय विभागीय प्रशिक्षण का प्रावधान भी है। प्रति प्रशिक्षणार्थी को दो किलो नायलोन का धागा और 50 रू. प्रतिदिन आवागमन भत्ता दिया जाता है। इसके लिये 1250 रूपये तक का व्यय स्वीकृत है। योजना सभी वर्गों के लिये लागू है। आवेदन के लिये मत्स्योद्योग अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।
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