मंगलवार, 15 सितंबर 2009

जननी सुरक्षा योजना : ú ग्वालियर जिले की 83 हजार से अधिक महिलायें लाभान्वित, प्रोत्साहन स्वरूप 11.93 करोड़ रूपये से अधिक राशि वितरित

जननी सुरक्षा योजना : ú ग्वालियर जिले की 83 हजार से अधिक महिलायें लाभान्वित, प्रोत्साहन स्वरूप 11.93 करोड़ रूपये से अधिक राशि वितरित 

ग्वालियर 14 सितंबर 09। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्वालियर जिले में गत अगस्त माह तक 83 हजार 261 महिलाओं को लाभान्वित कराया जा चुका है। लाभान्वित महिलाओं में शासकीय अस्पताल में प्रसव के लिये आईं गर्भवती माताओं सहित इन्हें सुरक्षित प्रसव के लिये प्रेरित करने वाली आशा व अन्य समतुल्य कार्यकर्ता शामिल हैं। योजना के तहत इन्हें 11 करोड़ 93 लाख रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी गई है।

      गौरतलब है कि प्रदेश सरकार द्वारा 15 अगस्त 2005 को जननी सुरक्षा योजना शुरू की गई थी। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के लिये इस योजना के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है।

      मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक जननी सुरक्षा योजना के आरंभ वर्ष अर्थात वर्ष 2005-06 में 379 महिला हितग्राहियों को लगभग 3 लाख 49 हजार रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप मुहैया कराई गई। इसी तरह वर्ष 2006-07 में लगभग 10 हजार हितग्राहियों को करीबन एक करोड़ 2 लाख 86 हजार, वर्ष 2007-08 में 30 हजार 589 हितग्राहियों को 4 करोड़ 61 लाख 6 हजार से अधिक व वर्ष 2008-09 में 30 हजार 242 महिलाओं को लगभग 4 करोड़ 58 लाख रूपये की राशि मुहैया कराई गई है। मौजूदा वर्ष के अगस्त माह के अन्त तक 12 हजार 112 महिलाओं को करीबन एक करोड़ 68 लाख रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप उपलब्ध कराई गई है।

      उललेखनीय कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, लोगों का स्वास्थ्य तथा भोजन- पानी की सुलभता मानव विकास के मुख्य पैमाने हैं। प्रदेश सरकार ने इन सभी क्षेत्रों में योजनाएँ बनाई  और शिद्दत के  साथ उन्हें भी लागू किया है। इसी क्रम में उद्देश्य से संस्थागत प्रसवों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा दिये गये प्रोत्साहन के फलस्वरूप ग्वालियर जिले में संस्थागत प्रसवों की संख्या लगातार बढ़ रही है । दूरदराज तथा पर्वतीय व वंनाचल क्षेत्र में बसे गांवों की गर्भवती महिलायें भी अब घर पर ही प्रसव के बजाय अस्पताल में प्रसव के लिये आने लगी हैं।

       गौरतलब है कि घर में ही असुरक्षित प्रसव, शिशु और उसकी मां के असमय काल के गाल में समा जाने का बहुत बड़ा कारण रहा है । प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से समझा है और ऐसे कदम उठाये , जिससे हर वर्ग के गरीब परिवारों की गर्भवती महिलाओं के भी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव हों , वो भी सरकारी खर्चे पर। सरकार ने इसके लिये जननी सुरक्षा योजना शुरू की है। जिसके तहत गर्भवती महिलाओं के प्रसव का समस्त खर्चा तो सरकार उठाती ही है, साथ ही ग्रामीण अंचल की गर्भवती माता को संस्थागत प्रसव कराने पर 1400 रूपये की राशि व शहरी अंचल की महिला को एक हजार रूपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान करती है। इसके अलावा गर्भवती माता को अस्पताल तक लेकर आने वाले ग्रामीण क्षेत्र के प्रेरक को 350 रूपये व शहरी क्षेत्र के प्रेरक को 200 रूपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। जिले में  सीमॉक व बीमांक संस्थायें भी सुरक्षित प्रसव के लिये विकसित की गई हैं। उल्लेखनीय है कि सीमॉक संस्थाओं में सामान्य प्रसव सहित सीजर ऑपरेशन और बीमॉक संस्थाओं में 24 घंटे संस्थागत प्रसव की सुविधा रहती है।

 

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