जल यात्रायें निकलीं, पीढ़ी संवाद भी हुआ जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हुईं ग्राम सभायें
शेष ग्रामों में आज लगेंगी ग्राम सभायें
ग्वालियर 14 अप्रैल 10। जिले के विभिन्न ग्रामों में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर विशेष ग्राम सभायें आयोजित हुईं। इन ग्राम सभाओं में प्रदेश सरकार द्वारा चलाये जा रहे जलाभिषेक अभियान के तहत पीढी संवाद कराया गया। साथ ही विभिन्न ग्रामों में जल के संरक्षण व संवर्धन के प्रति जन जागरूकता लाने के लिये जल यात्रायें भी निकाली गईं। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। जिले के शेष बचे गाँवों में 15 अप्रैल को ग्राम सभायें आयोजित होंगी।
ग्राम सभाओं में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ जिला व खण्ड स्तर से तैनात किये गये अधिकारियों ने भी शिरकत की और ग्रामीणों को खासकर पानी के महत्व व शिक्षा के अधिकार अधिनियम के बारे में बताया। जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी डॉ. विजय दुबे ने ग्राम मोहना की ग्राम सभा और जनपद पंचायत भितरवार के अन्तर्गत ग्राम सिकरौदा व नौनकी सराय की ग्राम सभा में वहाँ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री राजीव मिश्रा शामिल हुए। इसी तरह जिले की अन्य जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी भी विभिन्न ग्रामों में आयोजित हुईं ग्राम सभाओं में शामिल हुए।
इन ग्राम सभाओं में शिक्षा का अधिकार अधिनियम तथा गांवों के विकास से संबंधित सरकार की अन्य योजनाओं पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही गामीण रोजगार गारण्टी योजना के तहत कराये गये कार्यों और व्यय का सामाजिक अंकेक्षण तथा सेल्फ ऑफ प्रोजेक्ट और लेवर बजट का अनुमोदन, नामांतरण एवं बंटवारा के प्रकरणों का निराकरण, पेंशन हेतु प्राप्त आवेदनों की समीक्षा, समग्र स्वच्छता अभियान, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश अभियान पर भी चर्चा हुई।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा पानी की बूँद-बूँद सहेजने के लिये चलाये जा रहे जल अभिषेक अभियान में सामाजिक जुड़ाव पर विशेष जोर दिया गया है। इस बार के जलाभिषेक अभियान में पीढ़ी संवाद और भागीरथ किसानों का चयन सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। पीढ़ी संवाद के तहत गांव-गांव में जल सहेजने के बारे में पारंपरिक अनुभव रखने वाली पुरानी पीढ़ी के साथ गांव की नई पीढ़ी अर्थात युवा वर्ग से संवाद कराया जा रहा है। पीढ़ी संवाद के तहत गांव के बुजुर्ग, युवा पीढ़ी को यह बता रहे हैं कि किस प्रकार से पहले हमारे गांव के ताल-तलैया व अन्य जल स्त्रोत पानी से लबालव भरे रहते थे और आज हम कैसे उन्हें पुनर्जीवित कर सकते हैं। इस संवाद का प्रमुख मकसद युवा पीढ़ी को पानी की बूँद-बूँद सहेजने का महत्व समझाना है, जिससे जल के संरक्षण व संवर्धन के लिये चलाया जा रहा यह अभियान एक जन अभियान बन सके।
जल अभिषेक अभियान के तहत गांव-गांव में भागीरथ किसान भी चिन्हित किये जा रहे हैं। भागीरथ किसान ऐसे सामर्थ्यवान किसान हैं, जो स्वयं के वित्तीय संसाधनों से जल संरक्षण व संवर्धन में महती भूमिका निभा सकते हैं। इन किसानों को स्वयं के खेतों पर जल सहेजने वाली संरचनायें बनाने के लिये प्रेरित किया जायेगा। साथ ही उनकी पुरानी जल संरचनाओं मसलन पुराने कुँए-बावड़ी एवं ताल तलैयों आदि को पुनर्जीवित करने के लिये तकनीकी मदद सरकार की ओर से मुहैया कराई जायेगी।
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