7000 करोड़ की गंगा सफाई की योजना, कल होंगे समझौते पर हस्ताक्षर गंगा को स्वच्छ बनाने के एक समझौते पर भारत सरकार और विश्व बैंक मंगलवार को दस्तखत करेंगे। अनुमान है कि इस परियोजना की लागत करीब 7,000 करोड़ रुपए होगी। इसमें भारत सरकार की हिस्सेदारी करीब 5,100 करोड़ रुपए की तो देश के पांच राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की सरकारों की 1,900 करोड़ रुपए की होगी। विश्व बैंक, भारत सरकार को तकनीकी सहायता और वित्त मुहैया कराएगा। 80.1 करोड़ अमरीकी डॉलर की सहायता आईबीआरडी से लोन के रूप में मिलेगी तो आईडीए से 19.9 करोड़ डॉलर की सहायता क्रेडिट के रूप में मिलेगी। देश की एक-चौथाई आबादी से जुड़ी गंगा घाटी में वृहत जनसंख्या निवास करती है। तेजी से बढ़ रही आबादी, नगरीकरण और औद्योगिक विकास गंगा के समक्ष मुख्य चुनौती हैं। राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी परियोजना (एनजीआरबीए) विश्व बैंक की सहायता से लागू की जा रही है। यह परियोजना केंद्र और राज्य के स्तर पर एनजीआरबीए से संबंधित संस्थाओं के निर्माण और उसके सुदृढ़ीकरण पर ध्यान केंद्रित करेगा। विश्वस्तरीय गंगा ज्ञान केंद्र की स्थापना, नदी घाटी प्रबंधन को मजबूत बनाना और प्रदूषण घटाने के लिए चुनिंदा निवेशों को धन मुहैया कराना इसका उद्देश्य होगा। औद्योगिक प्रदूषण, ठोस कचरा प्रबंधन और नदीमुख प्रबंधन, आवश्यक सीवेज निस्तारण आदि समस्याओं का भी समाधान ढूंढा जाएगा। |
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