जस्टिस तन्खा मैमोरियल इन्सटीटयूट फॉर चिल्ड्रन उद्धाटित, निशक्तजनों की स्नेहपूर्वक देखभाल के लिये अवश्य समय लिकालें – मुख्य न्यायाधिपति पटनायक
ग्वालियर 9 मई 09। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री ए के. पटनायक ने आज सुबह स्थानीय चैम्बर ऑफ कॉमर्स के सभागृह में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में '' जस्टिस तन्खा मैमोरियल इन्सटीटयूट फॉर चिल्ड्रन ग्वालियर'' का शुभांरभ किया। महती सभा में उन्होंने स्वर्गीय जस्टिस राजकृष्ण तन्खा का स्मरण किया जिनकी स्मृति में संस्था का नाम रखा गया है। निशक्त जनों की बेहतरी की दिशा में किये जा रहे प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए उन्होंने संस्था को प्रारम्भ करने वाले स्व. जस्टिस तन्खा के सुपुत्र श्री विवेक तन्खा व उनकी टीम के सदस्यों को साधुवाद दिया। साथ ही ग्वालियर में प्रारम्भ की जा रही संस्था की इस चौथी कड़ी की सफलता और विकास की कामना की। अपने सम्बोधन में मुख्य न्यायाधिपति ने निशक्तजनों के समान अधिकारों की वजनदारी से पैरवी करते हुए 1995 के समान अधिकारों वाले अधिनियम का उल्लेख किया। मुख्य न्यायाधिपति ने इस दिशा में उनके समक्ष प्रस्तुत न्यायालयीन प्रकरणों को भी उध्दत किया जिनमें निशक्तजनों ने चिकित्सा पाठयक्रमों में प्रवेश में उनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी। तब उच्च न्यायालय ने आदेश जारी कर इस विसंगति को दूर करवाया था। मुख्य न्यायाधिपति ने इस दिशा में अपनी युवा अवस्था के उन संस्मरणों को भी सुनाया जब उन्हें न्यूजर्सी अमेरिका में वर्षों पूर्व रोटेरियन्स के दो प्रोजेक्ट देखने का अवसर मिला था। अपने अनुभव सुनाते हुए उन्होंने कहा कि पहले प्रोजेक्ट में वहां के रोटरी सदस्य सप्ताह में कम से कम एक दिन दो घण्टे का समय निकालकर ऐसे परिवारों में जाते थे जिसमें कोई स्पेशल बच्चा अर्थात निशक्त बच्चा होता था। जाने वाला रोटरी सदस्य उस परिवार के कामों में स्नेहपूर्वक हाथ बांटता था। दूसरे प्रोजेक्ट में उन्होंने आक्युपेशनल थैरेपी के हालनुमा विशाल कक्ष का उल्लेख किया जहां मन्द बुध्दि एवं अन्य कई तरह की निशक्तता वाले व्यावसायिक कौशल में दक्षता अर्जित कर रहे थे जिससे वे जीवन यापन के लिये जीविका अर्जित कर सकें व जीवन की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि दोनों ही प्रोजेक्ट अद्भुत और सराहनीय थे। मुख्य न्यायाधिपति श्री पटनायक ने कहा कि समाज मे ऐसे प्रयासों की बहुत जरूरत है। समाज को निशक्तजनों के प्रति अपना नकारात्मक नजरिया त्यागना होगा। निशक्तजनों को शारीरिक व्याधि के साथ-साथ मानसिक संताप आदि की समस्या भी हो सकती है। स्नेहपूर्वक वर्ताव से उसे कम किया जा सकता है। हमें निशक्तजनों के लिये समय निकालना होगा। उनकी स्नेहपूर्वक बेहतर देखभाल करनी होगी ताकि वे समाज की मुख्याधारा से जुड़कर यथा संभव बेहतर जीवन जी सकें तभी समान अधिकारों का मानवतावादी सच पूरा हो सकेगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा अतिथियों के स्वागत से हुआ। संस्था की स्थानीय सचिव श्रीमती कामना सिंह ने स्वागत भाषण दिया। संस्था की पृष्ठ भूमि एवं प्रयासों पर संस्था अध्यक्ष श्री विवेक तन्खा ने विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश में निशक्तजनों की आबादी चार प्रतिशत है। जिनकी बेहतरी के लिये शिक्षकों, उपकरणों यहां तक कि जागरूकता का भी अभाव है जिसे दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि विगत 12 वर्षों से संस्था इस दिशा में विनम्र प्रयास कर रही है परन्तु इस दिशा में सबको जोड़ने और सबके सहयोग की बहुत आवश्यकता है।
इस अवसर पर संस्था के बच्चों ने मनोहारी नृत्य एवं फैन्सी ड्रेस की प्रस्तुति दी। संस्था के प्रयासों पर आधारित लघु वृत्ति का भी प्रदर्शन किया गया।
समारोह में मुख्य न्यायाधिपति की धर्मपत्नी श्रीमती प्रतिभा पटनायक, संस्था अध्यक्ष की धर्मपत्नी श्रीमती आरती तन्खा, महापौर श्री विवेकनारायण शेजवलकर, उच्च न्यायालय की ग्वालियर खण्डपीठ के माननीय न्यायाधिपतिगण, रजिट्रार, जिला न्यायालय के न्यायिक अधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ताओं सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन जबलपुर से पधारे श्री मैनी ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्री राजेन्द्र तिवारी ने किया।
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