ग्रीष्मकालीन फसलों के लिये कृषकों को सामयिक सलाह
ग्वालियर 6 मई 09 । कृषि विभाग द्वारा कृषकों को कृषि तकनीकी सुझावों को अपनाने की सामयिक सलाह दी गई है । किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ग्वालियर संभाग के संयुक्त संचालक श्री एम.आर.जाटव ने कृषकों को रबी फसलों की कटाई, गहाई एवं भंडारण, ग्रीष्म कालीन जुताई, ग्रीष्म कालीन फसलों की देखभाल, चारे की फसलों की देखभाल, नमी संरक्षण के विभिन्न उपायों को अपनाने, साग सब्जी एवं फल वृक्षों की देखभाल तथा अन्य प्रकार की तकनीकी सलाह दी है ।
संयुक्त संचालक कृषि श्री जाटव द्वारा बची हुई रबी फसलों जैसे गेंहूँ आदि की कटाई मई के प्रथम सप्ताह तक अवश्य पूरी करने की सलाह दी गई है । साथ ही गीली फसलों को अच्छी तरह सुखाकर ही गहाई कराने को कहा गया है । किसान थ्रेसर की सावधानियों का अवश्य ध्यान रखें । एक ही अनाज की अलग-अलग किस्मों को खलिहान में दूरी पर रखें, तथा एक किस्म की गहाई के बाद दूसरी किस्म की गहाई करने के पूर्व थ्रेसर व खलिहान की अच्छी तरह से सफाई कर लें , ताकि बीज की शुध्दता बनी रहे । अनाज का भंडारण वैज्ञानिक विधि से करें । कृषक रबी फसलों की कटाई के तुरंत बाद गहरी जुताई करें तथा तीन वर्ष के अंतराल पर निरंतर जारी रखें । फली बीटल का ग्रीष्म कालीन मूँग की फसल पर प्रकोप देखा जा रहा है । इसकी रोकथाम के लिए क्लोरोपायरी फास डस्ट का 15-20 किलो प्रति हैक्टैयर की दर से भुरकाव करें । मूँग की फसल में एसिड या जैसिड कीट शिशु या वयस्क कोमल पत्ती तथा नरम पत्तियों का रस चूसकर नुकसान पहुँचाते हैं । इसकी रोकथाम के लिए फास्पोमिडाम 100 ई.सी. (डायमेक्रान) की 250 मि.ली. मात्रा का प्रति हैक्टैयर छिड़काव करें । ग्रीष्म कालीन उड़द की फसल में भी उपरोक्त कीटों का प्रकोप होता है।इसकी रोकथाम के लिए मूँग के लिए सुझाये गये उपाय ही काम में लाये जायें । मूँग एवं उड़द में पर्याप्त नमी बनायें रखें ।
ग्रीष्म कालीन मूँगफली में भी समय पर सिंचाई करते रहें । बोनी के 50 वें दिन से मूँगफली का पौधा केवल नमी पर ही आधारित रहता है । व भूमि से खाद्य पदार्थ ग्रहण नहीं करता है ।अत: इस अवस्था पर सिंचाई कर नमी बनायें रखे । इसी प्रकार गन्ने की फसल में निदाई गुड़ाई कर समय पर सिंचाई करते रहें । चारे की फसलों के बारे में किसानों को सलाह दी गई है कि गर्मी में बोई गई चारे की फसलों की समय पर सिंचाई करते रहें । इस अवधि में नई चरी की फसल की बोनी भी की जा सकती है । कृषकों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की नमी को संरक्षित करने के लिए मृदा आवरण (सॉयल मल्च), वानस्पतिक मल्य एवं अन्य तरीकों को अपना कर मृदा की नमी को संरक्षित करने का भरसक प्रयास करें । इसके लिए खेतों की जुताई कर मेढ़ बंदी करें, जिससे आगामी वर्षां के पानी को भी खेतों में संरक्षित एवं संग्रहित किया जा सके ।
साग सब्जी एवं फल वृक्षों की देखभाल के लिए प्याज के कंद जब अच्छी तरह तैयार हो जायें तब खुदाई करें । जब पौधे की पत्तियाँ हरी होने के बावजूद भी कंद के ठीक ऊपर से गिरने लगें तब समझना चाहिए कि फसल तैयार है । कद्दू कुल की सब्जियों में बुकनी रोग की रोकथाम के लिए मोरेस्टान 0.05 प्रतिशत या केरेथान 0.05 प्रतिशत घोल का 20 दिन के अन्तर से छिड़काव करें । इसी प्रकार अन्य कार्यों में प्रदर्शन प्लाट, मिनीकिट तथा अनुकूलन अनुसंधान परीक्षण के परिणाम शीघ्र भेजें ।
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