कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली फसलों को दें बढ़ावा- श्रीमती चौधरी
कृषि उत्पादन आयुक्त द्वारा प्रस्तावित रबी कार्यक्रम की समीक्षा
ग्वालियर 07 सितम्बर 09। कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने कहा है कि ऐसी फसलों का रकबा बढ़ायें जो कम पानी और कम लागत में अधिक पैदावार दे सकें। साथ ही अनाज की ऐसी फसलें लें जिनसे पशु चारा भी मिले। उन्होंने मालवा की तर्ज पर ग्वालियर-चंबल संभाग में भी बारहमासी मक्का की फसल लेने की सलाह दी। श्रीमती चौधरी आज ग्वालियर एवं चंबल संभाग के प्रस्तावित रबी कार्यक्रम की समीक्षा कर रहीं थी। प्रदेश में रबी कार्यक्रम की संभाग स्तरीय प्रथम बैठक थी जिसमें ग्वालियर तथा चंबल दोनों संभाग के रबी कार्यक्रम की जिलेवार समीक्षा की और सभी जिला कलेक्टर्स को अल्प वर्षा को ध्यान में रखकर रबी कार्यक्रम में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश भी दिये। बैठक में बताया गया कि रबी कार्यक्रम में ग्वालियर संभाग में 10 लाख 68 हजार हेक्टेयर में क्षेत्राच्छादन (बोवनी) का लक्ष्य है।
यहां राज्य स्वास्थ्य एवं संचार संस्थान में आयोजित हुई बैठक में प्रमुख सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विभाग श्री आई एन. दाणी, पंजीयक सहकारिता श्री विश्वमोहन उपाध्याय, राज्य दुग्ध सहकारी संघ की संचालक श्रीमती शिखा दुबे, संभागायुक्त ग्वालियर डॉ. कोमल सिंह व चंबल श्री एस डी. अग्रवाल, राज्य बीज निगम के प्रबंध संचालक श्री अशोक शाह, राज्य विपणन संघ के प्रबंध संचालक श्री सतीश मिश्र व एम पी. एग्रो के प्रबंध संचालक श्री निरंजन, दोनों संभागों के जिला के कलेक्टर व जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, पशु पालन, मत्स्य पालन आदि विभागों के संचालक तथा दोनों संभागों के सभी जिलों के कृषि, सहकारिता, मत्स्य पालन, पशु पालन आदि विभागों के संभाग व जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने सिंचाई संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर देते हुये कहा कि कृषि एवं जल संसाधन का मैदानी अमला आपसी समन्वय के साथ काम करें, जिससे उपलब्ध पानी से अधिक रकबे की सिंचाई हो सके। उन्होंने दोनों संभाग के जिला कलेक्टर्स को हिदायत दी कि वे वतर्मान परिस्थितियों पर नजर रखें, और कृषि विभाग के अमले के माध्यम से भूमि में उपलब्ध नमी के अनुसार कृषकों को फसल बोने के लिये उचित सलाह दिलवायें। श्रीमती चौधरी ने कृषि उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर सुनियोजित ढंग से अमल करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने के लिये भूमि व जल प्रबंधन, बीज प्रतिस्थापन, सिंचाई-प्रबंधन, समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन, पौध संरक्षण, उन्नत कृषि यंत्रों का प्रयोग, बीजोपचार आदि पर विशेष बल दिया। कृषि उत्पादन आयुक्त ने चालू वित्तीय वर्ष के अन्त तक दोनों संभाग के शत प्रतिशत किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड मुहैया कराने के भी निर्देश दिये।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने जिलेवार कृषि आदानों की मांग व उपलब्धता की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी जिला कलेक्टर्स से कहा कि किसानों को हर हालत में मानक स्तर का खाद व बीज मुहैया करायें। इसके लिये खाद व बीज की मानकता परखने के लिये नमूने लेकर समय से जांच के लिये भेजे जायें। उन्होंने खासतौर पर मुरैना जिला कलेक्टर को इस पर नजर रखने को कहा। जहां ज्वार बीज के 50 से भी अधिक नमूने अमानक पाये गये थेतथा जिला कलेक्टर ने ग्यारह विक्रेताओं के लायसेंस निरस्त किये व एफ आई आर. भी दर्ज कराई थी।
किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के प्रमुख सचिव श्री आई एन. दाणी ने सभी जिला कलेक्टर्स से कम्प्रोहेन्सिव डिस्ट्रिक्ट एग्रीकल्चर प्लान तैयार कराने को कहा। उन्होंने रोजगार गारण्टी योजना के तहत वाटर हार्वेस्ंटिग एवं जल संरक्षण व संवर्धन से संबंधित कामों को प्रमुखता से हाथ में लेने पर जोर दिया। श्री दाणी ने कहा हर जिला अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक व बीज की डिमाण्ड समय से भेजें। साथ ही उर्वरक का उठाव भी समय से कर लिया जाये। उन्होंने खासकर फास्फेट उर्वरकों की उपलब्धता पर नजर रखने को कहा।
पंजीयक सहकारी संस्थायें श्री विश्व मोहन उपाध्याय ने रूरल बैंकिंग को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को बचत के लिये प्रेरित किया जाये, जिससे आवश्यकता के समय उनकी छोटी- मोटी जरूरतें पूरी हो सकें। राज्य बीज निगम के प्रबंध संचालक श्री अशोक शाह ने बीज की उपलब्धता की बैठक में जानकारी दी। राज्य विपणन संघ के प्रबंध संचालक श्री सतीश मिश्र व एम पी. एग्रो के प्रबंध संचालक श्री निरंजन ने भी उपयोगी जानकारी दी। संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विभाग श्री डी एस. शर्मा ने मौजूदा खरीफ फसल एवं प्रस्तावित रबी कार्यक्रम पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पशु व मत्स्य पालन व दुग्ध संघ की गतिविधियों की भी हुई समीक्षा
रबी कार्यक्रम से पहले कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती रंजना चौधरी ने पशु पालन, मत्स्य पालन एवं दुग्ध संघ की गतिविधियों की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिये कि अल्प वर्षा को ध्यान को ध्यान में रखकर अभी से पशुओं का चारे व पानी के लिये माकूल बन्दोस्त करें। श्रीमती चौधरी ने हर गांव में पशुओं के लिये पूर्व में बने पानी के हौद को दुरूस्त कराने और आवश्यकतानुसार नये हौद बनाने को भी कहा।
श्रीमती चौधरी ने हर गांव में उपलब्ध सिंचाई साधनों के हिसाब से हरा चारा देने वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आंकलन के अनुसार एक आदमी द्वारा एक दिन में औसतन जितना पानी उपयोग में लिया जाता है, उसके तीन से चार गुना पानी प्रतिदिन एक पशु द्वारा खर्च होता है। अत: पशुओं के लिये इसी अनुपात में पानी का बन्दोवस्त किया जाये। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि चूँकि ग्वालियर एवं चंबल अंचल वर्ल्ड बैंक की वाटर री-स्ट्रक्चरिंग परियोजना में शामिल हैं। अत: यहां जल संरचनाओं के साथ आदर्श चारागाह भी इस परियोजना के तहत विकसित करायें।
राज्य दुग्ध सहकारी संघ की संचालक श्रीमती शिखा दुबे ने बैठक में जानकारी दी कि दुग्ध एवं उसके उत्पादों की जांच के लिये इस अंचल हेतु एक लैबोरेटरी मंजूर हुई है। यह लैबोरेटरी जल्द ही बानमोर में खोली जायेगी। उन्होंने दोनों संभागों से बाहर जा रहे दूध पर अंकुश लगाने की बात कही। श्रीमती दुबे ने कहा कि ग्वालियर दुग्ध संघ द्वारा भी दूध की अच्छी कीमत दी जाती है अत: यहां का दूध संघ को मिलना चाहिये। बैठक में मत्स्य पालन विभाग की गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने खाद्य प्रसंस्करण तथा कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने इनकी स्थापना को क्षेत्रीय आवश्यकता निरूपित किया।
संभागायुक्त ने दिये उपयोग सुझाव
संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह ने कृषि कार्यक्रम बनाते हुए जिला अधिकारियों को क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि फसल की सही प्रजाति का चयन कर बीज प्रबंधन तथा अन्य कृषि आदानों को जुटावें। साथ ही उन्होंने पशुधन संरक्षण पर जोर देते हुए भैंस की स्थानीय प्रजाति भदावरी भैंस के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिये जाने की बात कही। संभागायुक्त ने क्षेत्र में कम वर्षा की तरफ ध्यान दिलाते हुए हरे चारे की खेती को बढ़ावा देने की दृष्टि से बीज संग्रह कर उपयोग में लाने का भी सुझाव दिया।
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