न्यायालयीन प्रकरणों में जबाब बनवाने में लेत-लाली करने वाले अधिकारी दण्डित होंगे
ग्वालियर दिनांक 04.09.2009- निगमायुक्त डॉ. पवन शर्मा द्वारा आज नगर निगम के विभन्न विभागाधिकारियों की बैठक लेकर न्यायालयीन प्रकरणों में निगम का पक्ष की स्थिति की समीक्षा की गई। विधि अधिकारी श्री दिनेश बाथम द्वारा निगमायुक्त को अवगत कराया गया कि नगर निगम ग्वालियर के विरूद्व माननीय उच्च न्यायालय में 571 प्रकरण दर्ज है जिनमें निगम के विभिन्न विभागों के अधिकारी जबाब तैयार कराने के लिये सक्षम अधिकारी के रूप में नियुक्त किये जा चुके हैं।
निगमायुक्त द्वारा बैठक के दौरान निर्देश दिये गये कि माननीय उच्च न्यायालय में अवमानना के प्रकरणों की पृथक सूची बनाकर सक्षम अधिकारियों को प्रस्तुत की जावे तथा प्रत्येक माह विभिन्न न्यायालयों में प्रचलित प्रकरणों की सूची सक्षम अधिकारी को दी जाये। यह सूची विभागवार तथा वकील वार तैयार कराई जावे ताकि पता चल सके किस विभाग किस वकील के अधीन कितने प्रकरण निगम में प्रचलित है।
निगमायुक्त द्वारा निर्देश दिये गये कि नगर निगम का कोई भी प्रकरण न्यायालय में प्रचलित होने के कारण उसका जबाब बनवाने तथा निर्धारित तारीख पेशी पर ओ.आई.सी. का उपस्थित होना अनिवार्य है। यदि प्रकरण में सक्षम अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि किसी प्रकरण के लिये निगम अभिभाषक का बदला जाना तो वह अपर आयुक्त के माध्यम से निगम अभिभाषक बदलवाने की कार्यवाही करें। जबाब नहीं बनवाने अथवा गलत जबाब बनवाने व जबाब में कमी पाये जाने पर सक्षम अधिकारी को निलंबित करने की भी कार्यवाही की जावेगी।
समीक्षा के दौरान निगमायुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि प्रत्येक प्रकरण तीन फाईलें तैयार कराई जावे जिसमें से एक फाईल सक्षम अधिकारी, एक निगम अभिभाषक तथा एक विधि शाखा में जमा कराई जावे। प्रत्येक प्रकरण में नोटशीट पर सक्षम अधिकारी के हरवार हर तारीख पर हस्ताक्षर हों। न्यायालय में प्रकरण की तारीख लगने पर सक्षम अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर दो वेतनवृध्दियां रोके जाने की कार्यवाही की जावेगी।
निगमायुक्त द्वारा यह भी निर्देश दिये गये कि सक्षम अधिकारी न्यायालय में जाने वकीलों से मिलने तथा न्यायालय की तारीख इत्यादि पर जाने पर तथा कार्यवाही का विवरण डायरी में दर्ज करेंगे। प्रत्येक प्रकरण में डायरी संलग्न रहेगी। समीक्षा बैठक के दौरान कुछ ऐसे प्रकरण भी आये जिसमें सक्षम अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाने के बाद भी नया सक्षम अधिकारी नहीं बनाया गया। ऐसे प्रकरणों के विषय में निगमायुक्त द्वारा अपर आयुक्त कौशलेन्द्र सिंह भदौरिया को निर्देशित किया गया कि अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने पर उनके स्वत्वों का भुगतान करने से पूर्व उनके विभाग के अधीन चल रहे प्रकरणों का जमा कराया जाना अनिवार्य किया जावे।
समीक्षा बैठक में उच्च न्यायालय में प्रचलित विभिन्न प्रकरणों के जबाब तैयार न होने की स्थिति पर निगम के विधिक सलाहकार द्वारा निगमायुक्त को कहा गया कि सक्षम अधिकारी विभिन्न प्रकरणों में नोटिस प्राप्त होते हुये यदि अपने जबाब मेरे पास लेकर उपस्थित होते हैं तो प्राथमिक जबाब तैयार कराकर निगम के अभिभाषक को उपलब्ध कराऊंगा।
अधिकारियों के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र इत्यादि में ट्रांसर्फर होने की दशा में भी ऐसे सभी प्रकरणों को चार्ज में सौंपा जावेगा जो प्रकरण अधिकारी अपने पूर्व पद पर रहते हुये देख रहे थे। निगमायुक्त द्वारा यह भी निर्देशित किया गया कि जिन निगम अभिभाषकों के पास अधिक मात्रा में प्रकरण हैं उन्हें कम केश देकर अन्य योग्य अभिभाषकों को प्रकरण दिये जावे तथा जो निगम अभिभाषक सक्षम अधिकारी के बार-बार जाने पर जबाब बनवाने में विलंब करते हैं तो उनके स्थान पर तत्काल दूसरा निगम अभिभाषक नियुक्त कराया जाये।
निगमायुक्त द्वारा निगम में कार्यरत निगम अभिभाषकों के विषय में उनके कार्य तथा जबाब बनाने की शैली तथा निगम के प्रति कर्तव्यनिष्ठा के विषय में गोपनीय राय सक्षम अधिकारियों के माध्यम से अपर आयुक्त को दिये जाने का भी निर्देश दिया गया। विधि अधिकारी दिनेश बाथम द्वारा निगमायुक्त को जानकारी दी गई कि न्यायालयीन प्रकरणों में समय पर जबाब नहीं बनवाने के लिये 15 प्रभारी अधिकारियों को नोटिस जारी किये गये हैं। निगमायुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि नगर निगम ग्वालियर के विरूद्व बढ़ रहे न्यायालयीन प्रकरणों को देखते हुये प्रत्येक माह सभी न्यायालयीन प्रकरणों की समीक्षा अपर आयुक्त कौशलेन्द्र सिंह भदौरिया एवं विधिक सलाहकार करेंगे।
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