गुरुवार, 2 अप्रैल 2015

गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब मध्य प्रदेश की जिला कमेटियों का गठन , *+ नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद'' संपूर्ण मुरैना जिला और श्री निवास शर्मा मुरैना शहर अध्यक्ष बनाये गये

गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब मध्य प्रदेश की जिला कमेटियों का गठन ,
*+ नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद'' संपूर्ण मुरैना जिला और श्री निवास शर्मा मुरैना शहर अध्यक्ष बनाये गये
 *+ भोपाल- शहर अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र मिश्रा शैली
*+ श्री मनीष शर्मा इन्दोर अध्यक्ष नियुक्त
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              भोपाल 01 अप्रेल 2015.  गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब मध्य प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष संतोष गंगेले ने आज प्रदेश कमेटी केप्रदेश कार्यालय प्रभारी श्री माखन विजयवर्गीय  संरक्षक श्री अवधेश भार्गव श्री राम  भुवन सिंह कुशवाह श्री पवन देवलिया जी कार्य बाहक अध्यक्ष श्री कीर्ति राणा प्रदेश महामंत्री श्री चंदा बारगल प्रदेश उपाध्यक्ष श्री बी एल राजपूत ,  श्री गणेश सोनी मुंगावली अशोकनगर , श्री अरविंदर शर्मा रीवा ,श्री आशुतोष शुक्ल होशंगावाद श्री सोनू चौबे बुधनी , प्रदेश प्रचार मंत्री श्री मथुरा प्रसाद परमार ,संगठन मंत्री श्री दीपक बिड़ला भोपाल ,प्रदेश सचिव डॉ बी एल गुर्जर  [जीरापुर ]प्रतिनिधि श्री तेज करण चौहान शाजापुर , से मार्गदर्शन के बाद प्रदेश की जिला कमेटियों का गठन किया है जिसमे भोपाल शहर अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र मिश्रा शैली ]श्री अशोक प्रजापति संगठन मंत्री भोपाल , श्री मनीष शर्मा इंदौर अध्यक्ष नियुक्त ,श्री जे पी यादव इंदौर संभागीय सचिव बनाये गए।  विदिशा श्री अमित श्रीवास्तव ,श्री कैलाश नारायण शर्मा सचिव ,श्री चन्द्र भान सिंह लटेरी , सीहोर शहर श्री योगेन्द्र यादव ,ग्रामीण श्री राजेश शर्मा इंछावर ,रायसेन श्रीसंजय दुवे उर्फ़ हरी ओम शरण ,राजगढ़ श्री दिनेश जमीदार, बैतूल श्री राम किशोर पवार , कटनी श्री राहुल उपाध्याय ,होशंगावाद श्री रुद्रप्रताप सिंह आशीष कुमार बालाघाट सम्पूर्ण जिला  ,      श्री   जाफर खान आगर मालवा , ,श्री अलीम खान,संभाग  ,श्री कमल कोडले  शहर ,,श्री प्रकाश जायसवाल छिंदवाड़ा ,श्री जितेंद्र मिश्रा सिवनी ,श्री सुनील बेसर मन्दसौर ,श्री लोक भानु सिंह बड़वानी , श्री अनवर जिंदरान खान खरगोन ,श्री गौरव कंछल महू इंदौर ,श्री सुशील कटारे भिंड ,श्री दीपक उर्फ़ बल्बेन्द्र सिंह डबरा ग्वालियर ,श्री अभिषेक पाण्डेय सीधी शहर श्री विजय दुवे ग्रामीण ,श्री सलामत खान नरसिंहपुर ,श्री राजा पाठक दमोह श्री विभोर पाण्डेय टीकमगढ़ शहर , डॉ जीवन सिंह गुर्जर शाजापुर ,श्री ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी धार ,श्री घनश्याम लोहार नीमच ,श्री मनोज शिवहरे गुना ,श्री नरेंद्र सिंह तोमर  सम्पूर्ण मुरैना श्री श्रीनिवाश शर्मा  शहर मुरैना , श्री बीरेंद्र ओझा अशोक नगर ,श्री पुष्पेन्द्र दिक्षित छतरपुर ,श्री नंदू राजा पन्ना ,श्री राहुल दुवे रीवा ,श्री नीरज यादय उमरिया श्री विवेक त्रिपाठी सतना श्री अनुराग सिंह दतिया श्री राजेश पाठक देवास ,श्री सुनील समैया सागर को संगठन का दायित्य सोपा है।  सभी पदाधिकारी एक माह के अंदर अपनी अपनी कमिटी का गठन कर प्रांतीय समिति को सूचि सौपेंगे।  यदि एक माह में गठन प्रक्रिया पूरी न की गई तो संगठन फेर बदल का अधिकार रखता है।
          गणेश शंकर विधार्थी प्रेस क्लब मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष संतोष गंगेले ने बताया की संगठन में सदस्यता शुल्क नहीं लिया गया है न ही आगे लिया जायेगा ,संगठन जनता की आवाज बनकर एक प्रतिनिधि के रूप में कार्य करेगा।  भारतीय संस्कृति को बचाने व सम्मान प्रदान कराने का कार्य करता है।

मंगलवार, 31 मार्च 2015

राजपूतों की हुंकार में गरजा चम्बल का शेर , दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर का वंशज नरेन्द्र सिंह तोमर

दशहरा महोत्सव - हजारों हजार (करीब सवा लाख)  राजपूतों का सम्मेलन - तंवरावाटी , सरूण्ड ग्राम - राजस्थान  ओलम्प‍िक में निशानेबाजी के स्वर्ण पदक विजेता  ( मंचासीन - वर्तमान मंत्री - भारत सरकार)  जयपुर सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर, जोधपुर विश्व विद्यालय के कुलपति एल.एस. राठौर, जोधपुर विश्व विद्यालय के स्पोर्टस डीन एल.एस. शक्तावत, पाटन दरबार राजा साहब राव दिग्व‍िजय सिंह तोमर, राजकुमार रूद्रावत सिंह तोमर , कर्नल वीरेन्द्र सिंह तंवर , कुंअर जय सिंह तोमर (मंडोली- गॉंव का नाम मंडोली है , जयपुर में जय सिंह मंडोली के नाम से ही मशहूर हस्ती हैं, )  तथा अन्य राजपूत राजा महाराजा , सम्मेलन में शामिल अन्य सभी हजारों हजार राजपूत सरदार एवं इंडियन आर्मी के अनेक कर्नल एवं लेफ्टी. कर्नल  गण नीचे सम्मेलन की सभा में आसन ग्रहण किये हुये हैं )

रविवार, 29 मार्च 2015

महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमर साम्राज्य

महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमर साम्राज्य
पांडवों की तीन भारी ऐतिहासिक भूलें और बदल गया समूचे महाभारत का इतिहास
भारत नाम किसी भूखंड या देश का नहीं , एक राजकुल का है, जानिये क्यों कहते हैं तोमरों को भारत
नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनंद'' ( एडवोकेट )
Gwalior Times
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चम्बलघाटी सनातन धर्म के प्रचंड व तेजस्वी महाभारत सम्राट और समस्त विश्व भूमंडल के अंतिम चक्रवर्ती सम्राट पांडव अर्जुन के वंशज दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर  की दिल्ली का राज सिंहासन त्यागने के बाद अगली राजधानी और अंतिम पड़ाव और दिल्ली सलतनत का अगला अध्याय, सनातन धर्म की बुनियाद और रक्षा का अंतिम निशान ।
धर्म को लेकर अक्सर विवाद पैदा होता है, लोग अनेक संप्रदाय और पंथों को धर्म कह कर पुकारते हैं, मगर धर्म असल में क्या है और धर्म की असल परिभाषा क्या है , यह सब जानने के लिये हमें भारत के असल इतिहास की ओर अपना ध्यान और स्मृति को काफी पीछे तक खींचना होगा । हमें सनातन धर्म के शास्त्रों में वर्ण‍ित सतयुग , त्रेता युग, द्वापर युग और कलयुग तक भारत के समूचे इतिहास पर न केवल विहंगम सिंहावलोकन व दृष्ट‍िपात करना होगा , बल्क‍ि बहुत गहराई से भारत के असली इतिहास को जानना व समझना होगा । हमें अपने शास्त्रों व ग्रंथों की ओर ही मुख मोड़ना होगा । तभी हम भारत को महाभारत को और उसके असल इतिहास को जान पायेंगें ।
भारत का इतिहास न केवल पूरा का पूरा समूचा बदल दिया गया है बल्क‍ि उसका बहुत लंबा चौड़ा फर्जीकरण कर कभी पैसों व धन के बल पर तो कभी चाटुकारों , चापलूसों से जिन्हें भांड़ या भाट या चारण कहा पुकारा जाता है , दुर्भाग्यवश वही नकली फर्जी इतिहास उन फर्जी मनगढ़ंत व काल्पनिक राजाओं के चारण भाटों और धन पाकर इतिहास लिखने वालों ने कूटरचित एवं विद्रूपित काल्पनिक इतिहास रच डाला है, यह भी दुखद है कि भारत के स्कूलों से लेकर महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को वही फर्जी व कूटरचित नकली इतिहास पढ़ाया जाता है ।
भारत में सतयुग , त्रेता, द्वापर और कलयुग के करीब चार हजार साल तक भारत का इतिहास एकदम सही व सटीक मिलता है , जोभी भारत के इतिहास में गड़बड़ी होती है वह विगत करीब एक हजार वर्ष से मिलती है ।
सत्ता लोलुप ख्वाहिशमंदों ने भारत के इतिहास की असल कूटरचना सोलहवीं सदी के बाद की । राजपूत राजा महाराजाओं के तमाम दास और सेवक तथा अनुचर किसी भी राजा महाराजा के न रहने या उनके अभाव में स्वयं को पहले मुगलों का गुलाम , फिर अंग्रेजों का गुलाम कह कर उनकी दासता व गुलामी कर करें श्री व संपत्त‍ि एकत्र कर दबे चुपके पहले स्वयं को राजा और फिर महाराजा बताने कहने लगे ।
असल राजवंश और असल राजपूत राजा अपे गॉंवों , खेतों किसानी जैसे कामों में व्यस्त बने रहे , उधर देश में दासों अनुचरों से एक नई राजा महाराज की फसल उग गई, चाटुकारों ने भी उनका नाम राजा या महाराज रख दिया । लिहाजा वे राजा ये महाराजा बन गये ।
कलयुग में भारत के इतिहास को तीन भागों में बांटा जाना अपरिहार्य व समुचित है ।
प्रथम भाग भारत के इतिहास का महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के दिल्ली के शासनकाल तक , दूसरा भाग प्थ्वीराज सिंह चौहान , मोहम्मद गौरी से लेकर मुगल शासनकाल तक का, और तीसरा भाग गुलाम भारत के दासों, अनुचरों के गुलाम और राजा बनने का । चौथे भाग की बात यदि की जाये कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का , तो वस्तुत: यदि आज के परिवेश में देखें तो न तो भारत ऐसा कभी गुलाम हुआ और न भारत कभी ऐसा आजाद हुआ । यदि भारत गुलाम था तो आज तक जस का तस गुलाम है, और यदि भारत अंग्रेजों या मुगलों के दौर में आजाद  था तो भी आज तक जस का तस आजाद है । यह प्रश्न लाजिम है कि क्या मुगल शासन काल में भारत में स्वतंत्रता संग्राम या आजादी की लड़ाई किसी ने नहीं लड़ी ।  
क्रमश: अगले अंक में जारी .......

शनिवार, 21 जून 2014

दिवा स्वप्न बनी अटल ज्योति, बदलेगें कांग्रेस अध्यक्ष , घर घर फुंक गये मोदी , केजरीवाल से ज्यादा बुरा अंजाम मोदी का

दिवा स्वप्न बनी अटल ज्योति, बदलेगें कांग्रेस अध्यक्ष , घर घर फुंक गये मोदी , केजरीवाल से ज्यादा बुरा अंजाम मोदी का
मुरैना - डायरी
कुंवर उजागर सिंह चौहान
म.प्र. से काफूर हुई आखि‍रकार चुनावी अटल ज्योति
बड़े जोर शोर से गाजे बाजे के साथ करीब सात आठ करोड़ रूपये के विज्ञापनों पर पैसा फूंक कर जनरेटरों के सहारे म.प्र. विधानसभा चुनावों के वक्त शुरू की गई चुनावी अटल ज्योति‍ हालांकि 25 नवंबर 2013 को ही म.प्र. विधानसभा चुनाव का मतदान समाप्त होते ही लपझप लपझप करने लगी थी , लेकिन मजबूरी थी कि कैसे भी करके इसे लोकसभा चुनावों तक तो कम से कम चलाया ही जाये , लिहाजा जैसे तैसे मार्च महीने में इसकी मरम्मत कर करा के डीजल पानी डाल के मार्च  से मई तक फिर इस खटारा को शि‍वराज सरकार ने घसीटा , 16 मई को लोकसभा चुनाव परिणाम घोषि‍त होते ही फिर खटारा फेल हो गया और म.प्र. में तकरीबन हर इलाके में भरी भीषण गर्मी में बिना घोषणा अघोषि‍त बिजली कटौती पुन: न्यूनतम 8 घंटे से लेकर 16 – 17 घंटे तक की शुरू कर दी गई , अनेक बहानों के पुराने चीथड़े शि‍वराज सरकार म.प्र. की जनता को नन्हा मुन्ना बच्चा समझकर लगाती बहलाती रही , म.प्र. ही केवल भारत में ही नहीं अपितु समूचे विश्व में  एक ऐसा राज्य है , जहॉं साल के पूरे 365 दिन मेंटीनेन्स के नाम पर बिजली कटौती पिछले दस साल से लगातार की जा रही है , उल्लेखनीय है कि सन 2003 में म.प्र. में भाजपा केवल एक माह के भीतर 24 घंटे बिजली देने का वायदा करके सरकार में आई थी , उसके बाद सन 2008 में भी यही वायदा शि‍वराज ने हर जगह जाकर किया , और सन 2013 के चुनावों में भी इसी वायदे को लेकर और अरबों रूपये जनता के खून पसीने की कमाई के फोकट उड़ा कर अटल ज्योति‍ के नकली फिल्मी ड्रामे के साथ  शि‍वराज ने चुनाव लड़ा ।
यह उल्लेख प्रासंगिक व समीचीन होगा कि सन 2008 के विधानसभा चुनावों में म.प्र. में कांग्रेस के गलत टिकिट वितरण और टिकिट बेचे जाने , गलत प्रत्याशीयों के मैदान में उतारे जाने का भरपूर लाभ उठा कर शि‍वराज ने सत्ता में वापसी की तो वहीं सन 2013 के विधानसभा चुनावों में खुलकर कांग्रेस के टिकिट बेचे गये, गलत प्रत्याशी उतारे गये , आरोप यह है कि कांग्रेस के सारे टिकिट भाजपा ने और शि‍वराज ने अरबों खरबों रूपये देकर खरीद लिये , और सन 2013 में अपनी कहानी दोहराते हुये कांग्रेस ने म.प्र. की सत्ता पुन: शि‍वराज सिंह को बेच दी ।
म.प्र. कांग्रेस में भारी फेरबदल , बदलेंगें अनेक जिलाध्यक्ष
म.प्र. कांग्रेस में बहुत बड़ा परिवर्तन दस्तक दे रहा है , कांग्रेस हाईकमान द्वारा जारी निर्देशों में म.प्र. कांग्रेस में आमूलचूल बदलाव करने को कहा गया है , पूर्व पदाधि‍कारीयों या वर्तमान चालू सीरीज के पदाधि‍कारीयों को को संगठन में पुन: पद न देकर नये लोगों को व जमीनी लोगों को ही कांग्रेस संगठन में पद दिये जायें, इस के तहत मुरैना व दतिया के नये कांग्रेस  जिलाध्यक्षों के नाम लगभग तय हो चुके हैं , ऊपर से सूत्रों से मिल रही विश्वस्त खबरों के अनुसार मुरैना के लिये नरेन्द्र सिंह तोमर और दतिया के लिये प्रदीप गुर्जर का नाम कांग्रेस के नये जिलाध्यक्ष के रूप में तय कर दिया गया है , अब केवल घोषणा होनी बाकी है , शेष जगह के लिये कई जगह के नये कांग्रेस जिलाध्यक्ष तय किये जा चुके हैं तो कई जगह के लिये नये कांग्रेस जिलाध्यक्षों के नामों पर विचार मंथन जारी है , कांग्रेस में गुटबाजी समाप्त करने और निर्गट या गुटबाजी से दूर रहने वाले कांग्रेसियों को ही संगठन के पुनर्गठन में तवज्जुह दी जा रही है
जिस कारण सत्ता में आये, उसी कारण घर घर फुंक गये मोदी
मंहगाई खत्म करने और हर चीज सस्ती कर देने , अच्छे दिन आयेंगें या अच्छे दिन आने वाले हैं का सब्जबाग दिखाकर , जनता को लालच का लॉलीपॉप देकर सत्ता में आये नरेन्द्र मोदी की सरकार की बोहनी ही खराब हुई है , नरेन्द्र मोदी के सरकार में आते ही जहॉं एकदम से सभी चीजों के दाम उछल गये और मंहगाई सिर उठाकर आसमान चूमने लगी वहीं रेल बजट से पहले ही रेल किराये और माल भाड़े में वृद्ध‍ि , डीजल दामों में समानांतर श्रेणी में वृद्ध‍ि को लेकर  जनता भी कई फीट ऊँची उछल गई और देश भर में घर घर , हर घर में मोदी के पुतले पहले ही महीने में  फुंक गये , शपथ लिये अभी मोदी को महीना भी पूरा नहीं हुआ और उससे पहले ही घर घर पुतला दहन मोदी के लिये अपशकुन ही माना जायेगा और न देश के लिये , न मोदी और भाजपा के लिये इसे अच्छे आसार कहा जा सकता है
केजरीवाल से भी अधि‍क बुरा हश्र हो सकता है नरेन्द्र मोदी का
नई केन्द्र सरकार के आसार कुछ अच्छे नजर नहीं आ रहे , जख्म खाई दिल्ली की  जनता के साथ जो दोगला व्यवहार व भद्दा मजाक केजरीवाल ने किया , उसका तुरत फुरत फल केजरीवाल चख चुके हैं , केजरीवाल के ही कदमच्हि‍नों पर चल रही नरेन्द्र मोदी सरकार बिल्कुल उसी स्टाइल में केन्द्र में सरकार में आई है , जिस स्टाइल में केजरीवाल सरकार दिल्ली में आई थी , बस फर्क केवल इतना है कि केजरीवाल के पास खुद का बहुमत नहीं था और नरेन्द्र मोदी के पास खुद का बहुमत है , केजरीवाल की तुलना में नरेन्द्र मोदी का हश्र अधि‍क बुरा इसलिये होगा कि केजरीवाल के पास बहुमत न होने का एक आसान बहाना था , लेकिन नरेन्द्र मोदी के पास तो कोई बहाना ही शेष नहीं बचा है , नरेन्द्र मोदी के पास केवल एक चारा शेष बचा है , या तो करके दिखाओ , या फिर अब सदा के लिये वापस जाओ , नरेन्द्र मोदी के भयावह अंजाम से सीध सीधा भाजपा व आर.एस.एस. का भी अभि‍न्न रूप से   भयावह हश्र जुड़ा हुआ है, यह भी तय है कि नरेन्द्र मोदी उतना भी नहीं कर पायेंगें जितना दिखावटी व नकली ही सही, केजरीवाल ने कर दिया था , राजनीति में बातें करना आसान है , काम करना नामुमकिन , नरेन्द्र मोदी नामुमकिन को कर दिखाने के वायदे करके सत्ता में आये हैं , भारत की जनता की आदत है कि दवा वो चाहिये जिससे बुखार बस केवल तुरत फुरत दो मिनिट में छू मंतर हो जाये, नरेन्द्र मोदी इसी बुखार को केवल एक मिनिअ में छू मंतर कर देने की दवा देने वाले डॉक्टर का रूप धर कर आये हैं , एक कल्पनालोक व मायावी स्वप्न जनता को परोस कर सत्ता में आये हैं, इसलिये नरेन्द्र मोदी के सामने केवल करो या मरो के सिवा कोई चारा शेष नहीं है  
यह उल्लेखनीय है कि केवल बहुमत के सहारे सत्ता में अधि‍क दिन टिके रहना मोदी के लिये संभव नहीं है , एक सन्न‍िकट ही भारी जन विद्रोह या गृहयुद्ध की आशंकित संभावनाओं से कतई इंकार नहीं किया जा सकता , इसलिये बहुमत के बावजूद या तो नरेन्द्र मोदी को अपने चुनावी वायदों के मुताबिक तुरंत ही कुछ कर दिखाना होगा वरना देश में जन विद्रोह या गृहयुद्ध की सूरतों का सामना करना होगा , इसलिये यह स्पष्टत: लगभग कहा जा सकता है कि जो कह कर आये वह करना संभव नहीं , अगर किया नहीं तो सत्ता में रहना संभव नहीं , इसलिये अब या तो करो, करके दिखाओ या केजरीवाल सरकार से अधि‍क बुरा हश्र भुगतने को तैयार रहो  

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

हम धर्मशाला हुये सबकी

आने वाले सभी टूरिस्टों को चंबल की इस धरती मुरैना संसदीय क्षेत्र का सादर प्रणाम , होली के शुभ अवसर पर वंदन, अभिवादन, स्वागत (कुछ पंक्त‍ियां होली पर दिल से आप लोगों के स्वागत गीत में )
ना हम तीरथ, ना हम ताजमहल या महल पिकनिक धाम कोई ।
पर किस्मत ही कुछ ऐसी अपनी कि सैलानी फिर भी आते हैं । 
अरे ना कोई रंज दिल में है, ना खुशियों की है बात कोई ।
अपनी तो वो हालत है जैसे  हो ना  हो अब साथ कोई ।
ये न मायूसियों के मंजर, है न हंसी खुशी की बात यहॉं ।
न स्याही है काली रातों की, न उजले दिन की धूप यहॉं ।
परिंदे यहॉं बसेरे करते हैं सुबह कभी और शाम यहॉं ।
जब तक दिल हो ठहरा करते, जब दिल हो उड़ जाते हैं ।
मेरा यह दिल बस एक बसेरा है, धर्मशाला हुआ शहर मेरा ।
टूरिस्ट यहॉं आया करते, घूम घाम सैर सपाटा कर जाते ।
लड़ते हैं खुद की तकदीरों से, हम दुर्भागी कुछ भाग लिये ऐसे ।
सबने बस हमको केवल समझा है, हम होटल लॉज हुये जैसे । 
माना सबकी अपनी अपनी हसरत हैं, अपनी हसरत कोई नहीं ।
हर विदेशी राज करे दिल पर, जैसे अंग्रेजों का उपनिवेश बना ।
ऐ भारत,  कब बदलेगी तकदीर तेरी ऐ भारत देश मेरे ।
जो किस्सा है मेरी धरती का, वही है कुछ मेरे दिल का ।
दिल और देश , जन्मभूमि तक सभी गुलाम अभी तक हैं ।
आते हैं राज करें इन पर , पी खा घूम सैर कर चले गये ।
ना बदली तकदीर कभी दिल की, ना देश की आदत बदली ।
ना जन्मभूमि धरती की मेरी , नहीं कभी किस्मत बदली ।
(बुरा ना मानो होली है )
........ नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद''
-  शुभ प्रभात मित्रवर ....... जय श्री कृष्ण .... जय जय श्री राधे