शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

भारतीय औषधि केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1970 का संशोधन- सोवा-रिग्पा को मान्यता

भारतीय औषधि केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1970 का संशोधन- सोवा-रिग्पा को मान्यता

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारतीय औषधि केन्द्रीय परिषद अधिनियम 1970 में संशोधन करने के लिए भारतीय औषधि केन्द्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2009 को स्वीकृति दे दी।

 

सोवा-रिग्पा

       भारत के हिमालयी क्षेत्र में प्रसिध्द सामान्यत: 'आमचि' के रूप में जानी जाने वाली विश्व में औषधि की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणाली में से एक है। भारत में इस प्रणाली का प्रयोग सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल), लाहौल और स्पीति (हिमाचल प्रदेश) तथा जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के लद्दाख में किया जाता है।

 

       सोवा-रिग्पा के सिध्दान्त और प्रयोग आयुर्वेद की तरह हैं और इसमें पारम्परिक चीनी  औषधि के कुछ सिध्दान्त शामिल हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि सोवा-रिग्पा की मौलिक पाठयपुस्तक त्रऽग्युद-ब्ज़ी बुध्द द्वारा स्वयं पढार्ऌ गई है, और यह बौध्द दर्शन से जुड़ा हुआ है।

 

       भारत सरकार ने विधिक स्वरूप प्राप्त करने के लिए सोवा-रिग्पा प्रणाली की मान्यता  हेतु अनेक संगठनों से अनुरोध प्राप्त किए हैं।  भारतीय औषधि केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1970 की धारा 2, 3,8,9 और 17 में संशोधन कर सोवा-रिग्पा को विधिक स्वरूप प्रदान किए जाने की आवश्यकता है। भारतीय औषधि केन्द्रीय परिषद अधिनियम, 1970 की धाराओं 2,3,8,9 और 17 के तहत सोवा-रिग्पा के सम्मिलन को प्रस्तावित संशोधनों से प्रभावी किया जाएगा।

 

       यह अपेक्षित है कि सोवा-रिग्पा को विधिक मान्यता चिकित्सा की इस प्राचीन प्रणाली को संरक्षित और सुरक्षित करेगी और इसके फैलाव तथा विकास में मदद मिलेगी। इस प्रणाली में प्रयोग होने वाले औषधीय पौधों खनिजों के संरक्षण और सुरक्षा के अलावा इससे सोवा-रिग्पा प्रणाली की वैज्ञानिक वैधता और सहयोगात्मक शोध के नए रास्ते भी खुलेंगे।  सोवा-रिग्पा को मान्यता से सोवा-रिग्पा से संबंधित शिक्षा और प्रयोग का संचालन करने के लिए तंत्र की स्थापना भी की जा सकेगी।

 

 

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