शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

1997 से सम्पत्तिकर न देने वालों से वसूली कबायद प्रांरभ

1997 से सम्पत्तिकर न देने वालों से वसूली कबायद प्रांरभ

ग्वालियर दिनांक 30.07.2009- निगमायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा द्वारा आज सम्पत्तिकर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक लेकर 1997 से बकाया सम्पत्तिकर की वसूली के विषय में अभियान चलाये जाने के निर्देश दिये।

       उन्होंने कहा कि सभी कर संग्रहक अपने-अपने वार्डों में ऐसे बकायेदारों का लेखा-जोखा एकत्रित करें जिनके द्वारा 1997 से आज तक सम्पत्तिकर की राशि निगम कोष में जमा नहीं कराई है। ऐसे बकायादारों के भवनों का नाम जोड़कर एक माह के अंदर जानकारी तैयार कर आगामी 5 सितम्बर को आयोजित समीक्षा बैठक में प्रस्तुत करें।

सितम्बर माह में ऐसे सभी बकायेदारों को विशेष बिल प्रस्तुत किये जावेंगे तथा वसूली की कार्यवाही प्रांरभ की जावेगी। अनुमान है कि नगर निगम को लंबे समय से कर न देने वाले ऐसे हजारों बकायेदारों से लगभग 10 करोड़ से अधिक सम्पत्तिकर प्राप्त होगा।     

निगमायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने पिछले दिनों चलाये गये सम्पत्तिकर अभियान कर्मचारियों की प्रशंसा करते हुये कहा कि कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है कि चार साल में नगर निगम की सम्पत्तिकर की वसूली दर 3 गुना हुई है यदि पूर्व बकायेदारों से भी वसूली प्रांरभ हो जाती है तो सम्पत्तिकर के रूप में नगर निगम को 20 करोड़ वित्तीय वर्ष रू. प्राप्त कर सकेंगे।

आज की बैठक में नगर निगम के समस्त कर संग्रहक, वसूली प्रभारी, उपायुक्त सम्पत्तिकर अभय राजनगांवकर उपस्थित थे।

 

मदाखलत दस्ते द्वारा अवैध टॉवरों के खिलाफ कार्यवाही की गई

मदाखलत दस्ते द्वारा अवैध टॉवरों के खिलाफ कार्यवाही  की गई

ग्वालियर दिनांक 30.07.2009- नगर निगम के मदाखलत विभाग द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि सिटीप्लानर के निर्देशानुसार रोशनीघर पी.एच.ई. ऑफिस पम्पहाउस के बगल से बालमुकुन्द सिंह गुर्जर नामक व्यक्ति के द्वारा आम रास्ते में 10 फुट लम्बी दीवार का निर्माण कर लिया गया था जिसे पी.एच.ई. कार्यपालनयंत्री श्री बाथम द्वारा तुड़वाया गया।

       कार्यपालनयंत्री दिनेश अग्रवाल, सहायकयंत्री कीर्तिवर्धन मिश्रा की निशानदेही में मुरार बैजल कोठी पर लग रहे एयरटेल के अवैध टॉवर का सामान जप्त किया गया। उसके बाद नई सड़क स्थित डिलाईट टॉकीज के बगल से शिवहरे कॉम्प्लेक्स के ऊपर वोडाफोन कम्पनी का टॉवर लगा हुआ था उसके कनेक्शन कटवाकर डिस्कनेट कर दिया गया। इसके पश्चात बाड़ा क्षेत्र से फट्टे वालों को हटवाया गया।

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पालन में टे्रफिक टी.आई. नरेश अन्नौटिया के नेतृत्व में अचलेश्वर रोड, हाईकोर्ट, हनुमान चौराहा, छत्री मण्डी, बाड़ा, दत्त मंदिर से 6 आवारा सांड पकड़वाकर लाल टिपारा गऊशाला भिजवाये गये एवं झांसी रोड़ खिड़क से 16 मवेशी ट्रोला में लदवाकर गऊशाला लालटिपारा भिजवाई गई।

कार्यवाही के दौरान मदाखलत अधिकारी सत्यपाल सिंह चौहान, सहायक निरीक्षक अजय सक्सैना, सुघर सिंह, श्याम शर्मा, विजय माहौर समस्त स्टाफ के साथ उपस्थित रहे।

प्रभारी सदस्य स्वास्थ्य द्वारा क्षेत्रीय कार्यालयों का औचक निरीक्षण

प्रभारी सदस्य स्वास्थ्य द्वारा क्षेत्रीय कार्यालयों का औचक निरीक्षण

ग्वालियर दिनांक 30.07.2009- प्रभारी सदस्य स्वास्थ्य एवं औषधालय विभाग राजेन्द्र जैन द्वारा सहायक कचरा प्रबंधन अधिकारी बृजेश सिंह के साथ क्षेत्र क्र. 12 के अंतर्गत वार्ड क्र. 37, 41 एवं 59 तथा क्षेत्र क्र. 13 के अंतर्गत 32 एवं 36 का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान क्षेत्र क्र. 12 के अंतर्गत वार्ड क्र. 37 में 6 कर्मचारी, वार्ड क्र. 41 में 6 कर्मचारी, वार्ड क्र. 59 में 5 कर्मचारी अनुपस्थित पाये गये। इसी प्रकार क्षेत्र क्र. 13 के अंतर्गत वार्ड क्र. 32 एवं 36 में दो-दो कर्मचारी अनुपस्थित पाये गये। सभी अनुपस्थित कर्मचारियों की अनुपस्थिति रजिस्टर में दर्ज की गई है।

प्रभारी सदस्य स्वास्थ्य द्वारा सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किये जाने पर गेड़े वाली सड़क पर शौचालय के पास कन्टेनर खाली पाया गया तथा कचरा कन्टेनर के आसपास फैला पाया गया। समस्त कर्मचारियों को हिदायत दी जाती है कि वह समय पर अपने कार्य पर उपस्थित होवे तथा वर्दी पहनकर ही कार्य पर आये। भविष्य में निरीक्षण के दौरान बिना वर्दी न आने वाले कर्मचारी तथा समय पर न आने वाले कर्मचारी के विरूद्व दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी।

 

हुडको की सड़कों में बाधक धार्मिक स्थलों के पुनर्व्यवस्थापना हेतु निरीक्षण किया

हुडको की सड़कों में बाधक धार्मिक स्थलों के पुनर्व्यवस्थापना हेतु निरीक्षण किया

ग्वालियर दिनांक 30.07.2009- निगमायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा एवं अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी आर.के. जैन द्वारा आज नगर निगम द्वारा बनायी जा रही हुडको ऋण से प्रवर्तित सड़कों के मार्ग में आ रहे धार्मिक स्थानों का निरीक्षण किया तथा धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों से स्थल पर हुडको मार्ग के लिये भूमि की मांग की। निगमायुक्त का यह दल सागरताल चौराहे पर पहुंचा जहां जैन समाज के धार्मिक स्थली दादाबाढ़ी पर हुडको रोड निर्माण हेतु आवश्यक जमीन के संबंध में निगमायुक्त ने जैन समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा की।

       समाज द्वारा आवश्यकतानुसार जमीन प्राप्त कर सड़क चौड़ीकरण में अपनी सहमति व्यक्त की। इसी स्थान पर स्थित एक मस्जिद भी सड़क चौड़ीकरण में बाधक है। उक्त मस्जिद में से भूमि लेने हेतु अधिकारियों द्वारा मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों तथा शहरकाजी के साथ मौके पर मुआयना कर चर्चा की। समाज द्वारा कितनी जमीन दी जानी है तथा कबसे कार्य प्रांरभ होना है इस विषय में निर्णय लेने के लिये शहर काजी को अधिकृत किया है।

       स्वर्ण रेखा नाले के किनारे स्थित हनुमान मंदिर तथा सुभाष नगर के पास स्थित काली माता मंदिर के पुजारियों तथा आसपास के नागरिकों से चर्चा की गई उनके द्वारा समान आकार के मंदिर नगर निगम की ओर से बनवाये जाने हेतु आश्वासन पर अपनी सहमति व्यक्त की। दादा बाढ़ी से सड़क चौड़ीकरण का कार्य कल दिनांक 31 जुलाई 2009 से प्रांरभ करने के निर्र्देश निगमायुक्त द्वारा दिये गये।

निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त नगर निगम सुरेश शर्मा, सहायकयंत्री प्रेम पचौरी, शहरकाजी अब्दुल हमीद कादरी उपस्थित थे।

 

सेमरिहा के किसानों की जीवन रेखा है जैविक खेती- आलेख, जे. पी. धौलपुरिया

सेमरिहा के किसानों की जीवन रेखा है जैविक खेती

----------------------------- आलेख, जे. पी. धौलपुरिया,

उप संचालक, जिला जन सम्पर्क कार्यालय, शहडोल म. प्र.

 

कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों के कल्याण का सपना संजोकर दो साल पहले शुरू की गई जैविक खेती की योजना शहडोल जिले के ग्राम सेमरिहा के किसानों की जीवन रेखा बन गई है। रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती अपनाने से सुर्खियों में आया सेमरिहा गांव पूरी तरह जैविक खेती का गांव बन गया है ।

       रासायनिक खाद से भूमि की उर्वरा शक्ति में हुई कमी और इस शक्ति को पुन: प्रदान करने के लिए भूमि में जैविक खेती ने गांव के सभी किसानों का ध्यान खींचा। रासायनिक खाद पर निर्भर खेती को सरकारी मदद से बने वर्मी टांकों से जैविक खाद का मिलना सुनिश्चित होने से सेमरिहा क्षेत्र किसानी हलकों में तेजी से उभरता चला गया । कृषि उत्पादकता वाले जिले के प्रमुख क्षेत्रों में जैविक खेती की बदौलत सेमरिहा क्षेत्र ने अपनी विशेष पहचान बनाई है। जैविक खेती से जहां कृषि उत्पादन में आशातीत वृध्दि हुई और फसल चक्र में परिवर्तन आया, वहीं किसानों के घरों में आर्थिक सम्पन्नता आने से उनके जीवन में खुशहाली आई है । शहडोल से 90 कि. मी. दूर छत्तीसगढ़ सीमा के पास आदिवासी वाहुल्य सेमरिहा गांव में 75 लघु कृषकों के घर हैं । जिनके पास करीब 100 एकड़ कृषि भूमि है । यहां के किसान खेती के लिए वर्षा पर निर्भर होने के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर  थे । किसानों की माली हालत ठीक नहीं थी । वर्षा हो जाने से उनके खेतों में थोड़ा-बहुत जो अन्न हो जाता था, उससे और दिहाड़ी से वह अपनी आजीविका चला रहे थे । लिहाजा कृषि की बढ़ी लागत उनके लिए मुनाफे का सौदा नहीं थी ।

       सेमरिहा की खेती वर्षा और रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक की बढ़ती कीमतों के कारण संकट की मार झेल रही थी, तब गांव के किसानों ने समस्या की जड़ को ही खत्म करने का फैसला लिया । उनका रासायनिक खेती से मोह भंग हो चुका था और वे इसकी खेती से दूर हो जाना चाहते थे। वहां के किसानें ने रासायनिक उर्वरक के वैकल्पिक स्त्रोत जैविक खाद के बारे में सुन रखा था और उन्होंने इसे आजमाने का फैसला लिया । कृषि विशेषज्ञों ने भी उन्हें समझाया कि कहने को तो रासायनिक खाद का इस्तेमाल उत्पादकता को बढ़ाता है, जबकि इसके उलट वह लम्बे दौर में मिट्टी के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिससे उर्वरता के साथ-साथ उत्पादन स्तर में गिरावट आती है। उनका जैविक खेती का दौर 2007 में उस वक्त शुरू हुआ, जब उन्होंने जैव उर्वरक का उत्पादन लेना शुरू किया, जिसके लिए राज्य सरकार के कृषि विभाग ने सात किसानों के यहां वर्मी टांके बनवाए और उन्हें केंचुआ दिलाया । अहममोड़ उस समय आया, जब आजीविका परियोजना ने 17 किसानों के यहां और कृषि विभाग ने 18 किसानों के यहां और वर्मीटांके बनवाए तथा केंचुआ उपलब्ध कराए । इस साल आजीविका परियोजना ने 25 किसानों के यहां वायोगैस संयत्र भी लगवाए हैं ।

       किसानों ने केंचुआ खाद का उत्पादन कर उसका अपने खेतों में इस्तेमाल करना जो शुरू किया कि असिंचित क्षेत्र होने के बावजूद उनका उत्पादन तीन गुना तक बढ़ गया, जिसके कारण जैविक खाद उनकी जरूरत बन गया । जो किसान इसका उत्पादन नहीं कर रहे थे, वे दूसरों से खरीदकर इसका अपने खेतों में इस्तेमाल करने लगे । कृषि विभाग के नुमाइन्दों ने सिंथेटिक उर्वरक के स्थान पर जैव उर्वरकों की ओर किसानों का रूख क्या मोड़ा कि पूरा सेमरिहा गांव ही जैविक खेती का गांव बन गया और वहां के काश्तकारों की तकदीर ही बदल गई । वे तीन फसलें  लेने लगे । जिसमें से एक सब्जी की फसल भी शामिल है । जैविक खाद से उपजी उनकी सब्जी को बाजार में लोग हाथोंहाथ खरीद लेते हैं । 

 

गांव में आये इस बदलाव पर शहडोल के उप संचालक कृषि श्री के. एस. टेकाम कहते हैं,'' कृषि विभाग ने सेमरिहा गांव का शतप्रतिशत जैविक खेती के लिए चयन किया था । इसके लिए काश्तकारों के घरों में वर्मी टांकें बनवाए गए । '' गांव के काश्तकार श्री चन्द्रभान सिंह बताते हैं, '' पहले इतनी गरीबी थी कि घर में एक टाइम चूल्हा जलता था । गुजारे के लिए मजदूरी पर जाना पड़ता था । आज दोनों वक्त भोजन कर रहे हैं और जीवन अच्छी तरह बीत रहा है । '' वे जैविक खेती के फायदे कुछ यों बताते हैं,'' रासायनिक खाद से खरपतवार होते थे और जमीन कड़ी रहती थी और उपज भी कम आती थी तथा जमीन पानी भी अधिक सोखती थी । जैविक खेती से उत्पादन दो से तीन गुना बढ़ गया है । पानी कम लगता है, जमीन मुलायम हो गयी है तथा खरपतवार  नहीं होता तथा जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है । रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर खर्च होने वाली राशि भी बच रही है।''

       सेमरिहा के काश्तकार अपने खेतों में सिर्फ जैव उर्वरक ही इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि वे कीटनाशक के रूप में नीम की नीबोली और उसकी पत्ती, करंज की पत्ती, वेशरम की पत्ती या अकमन की पत्ती को सड़ाकर बनाए गए अर्क का भी इस्तेमाल करते हैं । इस तरह वहां के काश्तकार जैविक खेती युग में जी रहे हैं । सेमरिहा गांव के चारों ओर बनाए गए वर्मी टांके जैविक खेती की ओर बढ़े कदमों की याद दिलाते हैं । काश्तकार नई तकनीक अपनाकर उपलब्ध भूमि से प्रति इकाई कृषि उत्पादन में वृध्दि कर सकें, इसके लिए राज्य सरकार का कृषि विभाग भी सक्रिय है ।

 

 

पर्यटन उद्योग हेतु प्रशिक्षण जनशक्ति

पर्यटन उद्योग हेतु प्रशिक्षण जनशक्ति

 

राज्य सभा

       पर्यटन मंत्री कुमारी सैलजा ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि यह सच है कि आतिथ्य उद्योग में प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी है। स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना (एसजेएसआरवाई) के तहत शहरी गरीब के बीच रोजगार संवर्धन हेतु कौशल प्रशिक्षण (स्टेप-अप) के घटक के अंतर्गत कौशल नप्रशिक्षण के लिए राज्यों संघ राज्य क्षेत्रों को सहायता प्रदान की जाती है। स्टेप-अप का आशय विभिन्न सेवाओं, व्यवसाय तथा निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय कौशल एवं स्थानीय शिल्पकला में शहरी गरीब को प्रशिक्षण प्रदान करना है। युवाओं के बीच रोजगार योग्य कौशल तैयार करने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम उन व्यक्तियों के लिए है, जो कि कम से कम आठवीं कक्षा उत्तीर्ण हैं और वे 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग में हैं। इस कार्यक्रम में 2 कोर्स प्रदान किए जा रहे हैं -- एक खान-पान सेवा में 6 सप्ताह की अवधि का है और दूसरा खाद्य उत्पादन से 8 सप्ताह की अवधि का है।

 

केन्द्र द्वारा संरक्षित 35 स्मारक जिनका कोई पता नहीं है

केन्द्र द्वारा संरक्षित 35 स्मारक जिनका कोई पता नहीं है

राज्य सभा

       योजना तथा संसदीय राज्य मंत्री श्री वी. नारायणसामी ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 3675 केन्द्रीय संरक्षित स्मारकों में से 35 स्मारकों स्थलों का कोई पता नहीं है।

       मंत्री महोदय ने यह भी बताया कि लुप्‍त होने का मामला प्रकाश में आया तथा इसके लिए किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी नियत करना संभव नहीं है।