रविवार, 29 मार्च 2015

महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमर साम्राज्य

महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की दिल्ली से चम्बल में ऐसाहगढ़ी तक की यात्रा और ग्वालियर में तोमर साम्राज्य
पांडवों की तीन भारी ऐतिहासिक भूलें और बदल गया समूचे महाभारत का इतिहास
भारत नाम किसी भूखंड या देश का नहीं , एक राजकुल का है, जानिये क्यों कहते हैं तोमरों को भारत
नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनंद'' ( एडवोकेट )
Gwalior Times
Worldwide News & Broadcasting Services
www.gwaliortimes.in

चम्बलघाटी सनातन धर्म के प्रचंड व तेजस्वी महाभारत सम्राट और समस्त विश्व भूमंडल के अंतिम चक्रवर्ती सम्राट पांडव अर्जुन के वंशज दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर  की दिल्ली का राज सिंहासन त्यागने के बाद अगली राजधानी और अंतिम पड़ाव और दिल्ली सलतनत का अगला अध्याय, सनातन धर्म की बुनियाद और रक्षा का अंतिम निशान ।
धर्म को लेकर अक्सर विवाद पैदा होता है, लोग अनेक संप्रदाय और पंथों को धर्म कह कर पुकारते हैं, मगर धर्म असल में क्या है और धर्म की असल परिभाषा क्या है , यह सब जानने के लिये हमें भारत के असल इतिहास की ओर अपना ध्यान और स्मृति को काफी पीछे तक खींचना होगा । हमें सनातन धर्म के शास्त्रों में वर्ण‍ित सतयुग , त्रेता युग, द्वापर युग और कलयुग तक भारत के समूचे इतिहास पर न केवल विहंगम सिंहावलोकन व दृष्ट‍िपात करना होगा , बल्क‍ि बहुत गहराई से भारत के असली इतिहास को जानना व समझना होगा । हमें अपने शास्त्रों व ग्रंथों की ओर ही मुख मोड़ना होगा । तभी हम भारत को महाभारत को और उसके असल इतिहास को जान पायेंगें ।
भारत का इतिहास न केवल पूरा का पूरा समूचा बदल दिया गया है बल्क‍ि उसका बहुत लंबा चौड़ा फर्जीकरण कर कभी पैसों व धन के बल पर तो कभी चाटुकारों , चापलूसों से जिन्हें भांड़ या भाट या चारण कहा पुकारा जाता है , दुर्भाग्यवश वही नकली फर्जी इतिहास उन फर्जी मनगढ़ंत व काल्पनिक राजाओं के चारण भाटों और धन पाकर इतिहास लिखने वालों ने कूटरचित एवं विद्रूपित काल्पनिक इतिहास रच डाला है, यह भी दुखद है कि भारत के स्कूलों से लेकर महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालयीन छात्रों को वही फर्जी व कूटरचित नकली इतिहास पढ़ाया जाता है ।
भारत में सतयुग , त्रेता, द्वापर और कलयुग के करीब चार हजार साल तक भारत का इतिहास एकदम सही व सटीक मिलता है , जोभी भारत के इतिहास में गड़बड़ी होती है वह विगत करीब एक हजार वर्ष से मिलती है ।
सत्ता लोलुप ख्वाहिशमंदों ने भारत के इतिहास की असल कूटरचना सोलहवीं सदी के बाद की । राजपूत राजा महाराजाओं के तमाम दास और सेवक तथा अनुचर किसी भी राजा महाराजा के न रहने या उनके अभाव में स्वयं को पहले मुगलों का गुलाम , फिर अंग्रेजों का गुलाम कह कर उनकी दासता व गुलामी कर करें श्री व संपत्त‍ि एकत्र कर दबे चुपके पहले स्वयं को राजा और फिर महाराजा बताने कहने लगे ।
असल राजवंश और असल राजपूत राजा अपे गॉंवों , खेतों किसानी जैसे कामों में व्यस्त बने रहे , उधर देश में दासों अनुचरों से एक नई राजा महाराज की फसल उग गई, चाटुकारों ने भी उनका नाम राजा या महाराज रख दिया । लिहाजा वे राजा ये महाराजा बन गये ।
कलयुग में भारत के इतिहास को तीन भागों में बांटा जाना अपरिहार्य व समुचित है ।
प्रथम भाग भारत के इतिहास का महाभारत सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के दिल्ली के शासनकाल तक , दूसरा भाग प्थ्वीराज सिंह चौहान , मोहम्मद गौरी से लेकर मुगल शासनकाल तक का, और तीसरा भाग गुलाम भारत के दासों, अनुचरों के गुलाम और राजा बनने का । चौथे भाग की बात यदि की जाये कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का , तो वस्तुत: यदि आज के परिवेश में देखें तो न तो भारत ऐसा कभी गुलाम हुआ और न भारत कभी ऐसा आजाद हुआ । यदि भारत गुलाम था तो आज तक जस का तस गुलाम है, और यदि भारत अंग्रेजों या मुगलों के दौर में आजाद  था तो भी आज तक जस का तस आजाद है । यह प्रश्न लाजिम है कि क्या मुगल शासन काल में भारत में स्वतंत्रता संग्राम या आजादी की लड़ाई किसी ने नहीं लड़ी ।  
क्रमश: अगले अंक में जारी .......

शनिवार, 21 जून 2014

दिवा स्वप्न बनी अटल ज्योति, बदलेगें कांग्रेस अध्यक्ष , घर घर फुंक गये मोदी , केजरीवाल से ज्यादा बुरा अंजाम मोदी का

दिवा स्वप्न बनी अटल ज्योति, बदलेगें कांग्रेस अध्यक्ष , घर घर फुंक गये मोदी , केजरीवाल से ज्यादा बुरा अंजाम मोदी का
मुरैना - डायरी
कुंवर उजागर सिंह चौहान
म.प्र. से काफूर हुई आखि‍रकार चुनावी अटल ज्योति
बड़े जोर शोर से गाजे बाजे के साथ करीब सात आठ करोड़ रूपये के विज्ञापनों पर पैसा फूंक कर जनरेटरों के सहारे म.प्र. विधानसभा चुनावों के वक्त शुरू की गई चुनावी अटल ज्योति‍ हालांकि 25 नवंबर 2013 को ही म.प्र. विधानसभा चुनाव का मतदान समाप्त होते ही लपझप लपझप करने लगी थी , लेकिन मजबूरी थी कि कैसे भी करके इसे लोकसभा चुनावों तक तो कम से कम चलाया ही जाये , लिहाजा जैसे तैसे मार्च महीने में इसकी मरम्मत कर करा के डीजल पानी डाल के मार्च  से मई तक फिर इस खटारा को शि‍वराज सरकार ने घसीटा , 16 मई को लोकसभा चुनाव परिणाम घोषि‍त होते ही फिर खटारा फेल हो गया और म.प्र. में तकरीबन हर इलाके में भरी भीषण गर्मी में बिना घोषणा अघोषि‍त बिजली कटौती पुन: न्यूनतम 8 घंटे से लेकर 16 – 17 घंटे तक की शुरू कर दी गई , अनेक बहानों के पुराने चीथड़े शि‍वराज सरकार म.प्र. की जनता को नन्हा मुन्ना बच्चा समझकर लगाती बहलाती रही , म.प्र. ही केवल भारत में ही नहीं अपितु समूचे विश्व में  एक ऐसा राज्य है , जहॉं साल के पूरे 365 दिन मेंटीनेन्स के नाम पर बिजली कटौती पिछले दस साल से लगातार की जा रही है , उल्लेखनीय है कि सन 2003 में म.प्र. में भाजपा केवल एक माह के भीतर 24 घंटे बिजली देने का वायदा करके सरकार में आई थी , उसके बाद सन 2008 में भी यही वायदा शि‍वराज ने हर जगह जाकर किया , और सन 2013 के चुनावों में भी इसी वायदे को लेकर और अरबों रूपये जनता के खून पसीने की कमाई के फोकट उड़ा कर अटल ज्योति‍ के नकली फिल्मी ड्रामे के साथ  शि‍वराज ने चुनाव लड़ा ।
यह उल्लेख प्रासंगिक व समीचीन होगा कि सन 2008 के विधानसभा चुनावों में म.प्र. में कांग्रेस के गलत टिकिट वितरण और टिकिट बेचे जाने , गलत प्रत्याशीयों के मैदान में उतारे जाने का भरपूर लाभ उठा कर शि‍वराज ने सत्ता में वापसी की तो वहीं सन 2013 के विधानसभा चुनावों में खुलकर कांग्रेस के टिकिट बेचे गये, गलत प्रत्याशी उतारे गये , आरोप यह है कि कांग्रेस के सारे टिकिट भाजपा ने और शि‍वराज ने अरबों खरबों रूपये देकर खरीद लिये , और सन 2013 में अपनी कहानी दोहराते हुये कांग्रेस ने म.प्र. की सत्ता पुन: शि‍वराज सिंह को बेच दी ।
म.प्र. कांग्रेस में भारी फेरबदल , बदलेंगें अनेक जिलाध्यक्ष
म.प्र. कांग्रेस में बहुत बड़ा परिवर्तन दस्तक दे रहा है , कांग्रेस हाईकमान द्वारा जारी निर्देशों में म.प्र. कांग्रेस में आमूलचूल बदलाव करने को कहा गया है , पूर्व पदाधि‍कारीयों या वर्तमान चालू सीरीज के पदाधि‍कारीयों को को संगठन में पुन: पद न देकर नये लोगों को व जमीनी लोगों को ही कांग्रेस संगठन में पद दिये जायें, इस के तहत मुरैना व दतिया के नये कांग्रेस  जिलाध्यक्षों के नाम लगभग तय हो चुके हैं , ऊपर से सूत्रों से मिल रही विश्वस्त खबरों के अनुसार मुरैना के लिये नरेन्द्र सिंह तोमर और दतिया के लिये प्रदीप गुर्जर का नाम कांग्रेस के नये जिलाध्यक्ष के रूप में तय कर दिया गया है , अब केवल घोषणा होनी बाकी है , शेष जगह के लिये कई जगह के नये कांग्रेस जिलाध्यक्ष तय किये जा चुके हैं तो कई जगह के लिये नये कांग्रेस जिलाध्यक्षों के नामों पर विचार मंथन जारी है , कांग्रेस में गुटबाजी समाप्त करने और निर्गट या गुटबाजी से दूर रहने वाले कांग्रेसियों को ही संगठन के पुनर्गठन में तवज्जुह दी जा रही है
जिस कारण सत्ता में आये, उसी कारण घर घर फुंक गये मोदी
मंहगाई खत्म करने और हर चीज सस्ती कर देने , अच्छे दिन आयेंगें या अच्छे दिन आने वाले हैं का सब्जबाग दिखाकर , जनता को लालच का लॉलीपॉप देकर सत्ता में आये नरेन्द्र मोदी की सरकार की बोहनी ही खराब हुई है , नरेन्द्र मोदी के सरकार में आते ही जहॉं एकदम से सभी चीजों के दाम उछल गये और मंहगाई सिर उठाकर आसमान चूमने लगी वहीं रेल बजट से पहले ही रेल किराये और माल भाड़े में वृद्ध‍ि , डीजल दामों में समानांतर श्रेणी में वृद्ध‍ि को लेकर  जनता भी कई फीट ऊँची उछल गई और देश भर में घर घर , हर घर में मोदी के पुतले पहले ही महीने में  फुंक गये , शपथ लिये अभी मोदी को महीना भी पूरा नहीं हुआ और उससे पहले ही घर घर पुतला दहन मोदी के लिये अपशकुन ही माना जायेगा और न देश के लिये , न मोदी और भाजपा के लिये इसे अच्छे आसार कहा जा सकता है
केजरीवाल से भी अधि‍क बुरा हश्र हो सकता है नरेन्द्र मोदी का
नई केन्द्र सरकार के आसार कुछ अच्छे नजर नहीं आ रहे , जख्म खाई दिल्ली की  जनता के साथ जो दोगला व्यवहार व भद्दा मजाक केजरीवाल ने किया , उसका तुरत फुरत फल केजरीवाल चख चुके हैं , केजरीवाल के ही कदमच्हि‍नों पर चल रही नरेन्द्र मोदी सरकार बिल्कुल उसी स्टाइल में केन्द्र में सरकार में आई है , जिस स्टाइल में केजरीवाल सरकार दिल्ली में आई थी , बस फर्क केवल इतना है कि केजरीवाल के पास खुद का बहुमत नहीं था और नरेन्द्र मोदी के पास खुद का बहुमत है , केजरीवाल की तुलना में नरेन्द्र मोदी का हश्र अधि‍क बुरा इसलिये होगा कि केजरीवाल के पास बहुमत न होने का एक आसान बहाना था , लेकिन नरेन्द्र मोदी के पास तो कोई बहाना ही शेष नहीं बचा है , नरेन्द्र मोदी के पास केवल एक चारा शेष बचा है , या तो करके दिखाओ , या फिर अब सदा के लिये वापस जाओ , नरेन्द्र मोदी के भयावह अंजाम से सीध सीधा भाजपा व आर.एस.एस. का भी अभि‍न्न रूप से   भयावह हश्र जुड़ा हुआ है, यह भी तय है कि नरेन्द्र मोदी उतना भी नहीं कर पायेंगें जितना दिखावटी व नकली ही सही, केजरीवाल ने कर दिया था , राजनीति में बातें करना आसान है , काम करना नामुमकिन , नरेन्द्र मोदी नामुमकिन को कर दिखाने के वायदे करके सत्ता में आये हैं , भारत की जनता की आदत है कि दवा वो चाहिये जिससे बुखार बस केवल तुरत फुरत दो मिनिट में छू मंतर हो जाये, नरेन्द्र मोदी इसी बुखार को केवल एक मिनिअ में छू मंतर कर देने की दवा देने वाले डॉक्टर का रूप धर कर आये हैं , एक कल्पनालोक व मायावी स्वप्न जनता को परोस कर सत्ता में आये हैं, इसलिये नरेन्द्र मोदी के सामने केवल करो या मरो के सिवा कोई चारा शेष नहीं है  
यह उल्लेखनीय है कि केवल बहुमत के सहारे सत्ता में अधि‍क दिन टिके रहना मोदी के लिये संभव नहीं है , एक सन्न‍िकट ही भारी जन विद्रोह या गृहयुद्ध की आशंकित संभावनाओं से कतई इंकार नहीं किया जा सकता , इसलिये बहुमत के बावजूद या तो नरेन्द्र मोदी को अपने चुनावी वायदों के मुताबिक तुरंत ही कुछ कर दिखाना होगा वरना देश में जन विद्रोह या गृहयुद्ध की सूरतों का सामना करना होगा , इसलिये यह स्पष्टत: लगभग कहा जा सकता है कि जो कह कर आये वह करना संभव नहीं , अगर किया नहीं तो सत्ता में रहना संभव नहीं , इसलिये अब या तो करो, करके दिखाओ या केजरीवाल सरकार से अधि‍क बुरा हश्र भुगतने को तैयार रहो  

गुरुवार, 5 जून 2014

शुक्रवार, 14 मार्च 2014

हम धर्मशाला हुये सबकी

आने वाले सभी टूरिस्टों को चंबल की इस धरती मुरैना संसदीय क्षेत्र का सादर प्रणाम , होली के शुभ अवसर पर वंदन, अभिवादन, स्वागत (कुछ पंक्त‍ियां होली पर दिल से आप लोगों के स्वागत गीत में )
ना हम तीरथ, ना हम ताजमहल या महल पिकनिक धाम कोई ।
पर किस्मत ही कुछ ऐसी अपनी कि सैलानी फिर भी आते हैं । 
अरे ना कोई रंज दिल में है, ना खुशियों की है बात कोई ।
अपनी तो वो हालत है जैसे  हो ना  हो अब साथ कोई ।
ये न मायूसियों के मंजर, है न हंसी खुशी की बात यहॉं ।
न स्याही है काली रातों की, न उजले दिन की धूप यहॉं ।
परिंदे यहॉं बसेरे करते हैं सुबह कभी और शाम यहॉं ।
जब तक दिल हो ठहरा करते, जब दिल हो उड़ जाते हैं ।
मेरा यह दिल बस एक बसेरा है, धर्मशाला हुआ शहर मेरा ।
टूरिस्ट यहॉं आया करते, घूम घाम सैर सपाटा कर जाते ।
लड़ते हैं खुद की तकदीरों से, हम दुर्भागी कुछ भाग लिये ऐसे ।
सबने बस हमको केवल समझा है, हम होटल लॉज हुये जैसे । 
माना सबकी अपनी अपनी हसरत हैं, अपनी हसरत कोई नहीं ।
हर विदेशी राज करे दिल पर, जैसे अंग्रेजों का उपनिवेश बना ।
ऐ भारत,  कब बदलेगी तकदीर तेरी ऐ भारत देश मेरे ।
जो किस्सा है मेरी धरती का, वही है कुछ मेरे दिल का ।
दिल और देश , जन्मभूमि तक सभी गुलाम अभी तक हैं ।
आते हैं राज करें इन पर , पी खा घूम सैर कर चले गये ।
ना बदली तकदीर कभी दिल की, ना देश की आदत बदली ।
ना जन्मभूमि धरती की मेरी , नहीं कभी किस्मत बदली ।
(बुरा ना मानो होली है )
........ नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद''
-  शुभ प्रभात मित्रवर ....... जय श्री कृष्ण .... जय जय श्री राधे

शनिवार, 18 जनवरी 2014

बेहद प्रसिद्ध ब्लॉग चम्बल की आवाज फिर से इंटरनेट पर उपलब्ध होगा

बेहद प्रसिद्ध ब्लॉग चम्बल की आवाज फिर से इंटरनेट पर उपलब्ध होगा :
सिब्बू सरकार का एक सबसे बड़ा झूठ और फर्जी हेल्पलाइन नंबर की कहानी तो
हम आज आपको बता ही चुके हैं .... अब इन नंबरों को देख लीजिये .... ये
नंबर बाकायदा मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपनी वेबसाइट पर
जारी किये गये हैं ..... ये नंबर भी कभी नहीं लगते और इन नंबरों पर कभी
कोई जन शिकायत दर्ज नहीं की जाती .... इन सब फर्जी नंबरों के अलावा
इन्हीं लोगों की वेबसाइटों पर इनके फर्जी ई मेल पते भी दिये हुये हैं ...
जिन पर कभी भी कोई ई मेल रिसीव नहीं होती , हमेशा वापस लौट आती है और
रिपोर्ट आती है कि इस नाम का कोई ई मेल पता उपलब्ध नहीं है ..... हमने
ऐसी लौटी हुई सारी ई मेल लगातार सन 2009 से संभाल कर रखी हुई हैं ....
ग्वालियर टाइम्स म.प्र. सरकार के ऐसे ही इसी तरह के सैकड़ों फर्जीवाड़ों
और झूठ के पुलिंदों पर बाकायदा किश्तबद्ध एक श्रंखलाबद्ध आलेख एवं
विस्तृत सामग्री का प्रकाशन शुरू करने जा रहा है , म.प्र. डायरी एवं
मुरैना डायरी जो कि काफी समय से एक अरसे से ग्वालियर टाइम्स पर प्रकाशित
नहीं की जा रही थी अब आप हर हफ्ते उसे हमारे विभि‍न्न प्रिंट संस्करणों,
प्रसिद्ध पत्रिकाओं यूथ मीडिया तथा हमारी लोकप्रिय पत्रिका नोबलयूथ सहित
इंटरनेट पर प्रकाशित किये जाने वाले हमारे विभ‍न्न सभी 23 ब्लॉगों,
ग्वालियर समाचार, भिण्ड समाचार, मुरैना समाचार, चम्बल की आवाज, जनता की
आवाज, चंबल मित्र, ग्वालियर टाइम्स (वर्ड प्रेस पर) तथा इसके अलावा हमारी
मूल वेबसाइटों ग्वालियर टाइम्स सहित सभी 8 वेबसाइटों पर नियमित रूप से
पढ़ा जा सकेगा , इनके फर्जीवाड़े और झूठ एवं लफ्फाजी के वीडियो वर्जन
हमारे यू टूयूब चैनलों के अलावा सिंडिकेशन सर्विसेज में भी उपलब्ध
रहेंगें , हमारी सभी सिंडिकेटेड वेबसाइटों पर भी यह सब श्ररंखलायें एक
साथ प्रकाशित व प्रसारित की जायेंगी ... अन्य लोग जो इसे सिंडिकट या शेयर
करना चाहें उनके लिय इन सबके एटम एवं आर.एस.एस. फीड के अलावा एक्स.एम.एल.
फीड भी उपलब्ध रहेंगें .... हमारी यह श्रंखलायें नियमित रूप से 01 मार्च
2014 से सभी जगह एक साथ प्रकाशित होगीं किंतु मुरेना डायरी का प्रकाशन 01
फरवरी से प्रारंभ हो जायेगा , बेहद प्रसिद्ध और सर्वाधिक लोकप्रिय हमारा
ब्लॉग चम्बल की आवाज इसी माह के अंत तक दोबारा से प्रकाश‍ति होना शुरू हो
जायेगा, तदनुसार हमारे सभी पुराने एवं नये सुधी पाठकजन व दर्शकजन कृपया
नोट कर लें - पूर्ववत सहयोग की अपेक्षा व आकांक्षा के साथ - आपका -
नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनंद'' , प्रधान संपादक एवं सी.ईओ. ग्वालियर टाइम्स
ग्रुप , प्रबंध निदेशक , देवपुत्र प्रा. लिमिटेड ग्रुप