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शनिवार, 28 नवंबर 2020

साग सब्जी के भाव आसमान पर , आलू 60 रू , भिंडी 40 रू , मटर 160 रू दालें 100 रू से 120 रू प्रतिकिलो तक , कहां सोये हो सरकार

                                                           - नरेन्द्र सिंह तोमर ''आनन्द'' 

 ( सुफल मटर सस्ती है बाजार में - छिली हुई ताजी मटर 40 रूपये की आधा किलो यानि 80 रू की एक किलो है ) 

मुरैना/ दतिया/ ग्वालियर/भिंंड / श्योपुर , सरकारें जनता को अच्छी खबर देतीं सुनातीं आईं हैं यह एक परंपरा है , और अच्छे दिन का सपना और वायदा वोट की कीमत में बेचतीं आईं हैं , यह एक रिवाज है । 

जब सोने के दाम में प्रति दस ग्राम ( बाजारू एक तोला दस ग्राम का और पुराना पारंपरिक देश में प्रचलित एक तोला 12 ग्राम का होता है , जब से होलोग्राम वाले आये हैं तब से दो तोला होलोग्राम खा जाता है और यह तोला दस ग्राम का रह जाता है ) के वजन में एक हजार या 500 रू की कमी हो तो मीडिया की सुर्खी बन कर खबर बन जाती है और फ्रंट पेज हेडलाइन होती है , सोने के दामों में जबरदस्त धमाकेदार कमी ,गोया आम आदमी या हर अखबार पढ़ने वाला केवल सोना खरीदने और सोने के दाम पता करने के लिये ही अखबार खरीदता और पढ़ता है । 

चंद प्रतिष्ठित मीडिया को अपवादस्वरूप अगर छोड़ दें तो बाकी बकाया मीडिया को यह पता ही नहीं कि हर अखबार खरीदने पढ़ने वाला साग सब्जी और रोटी तो जरूर ही खाता है ।   

साग सब्जी रोटी हर आदमी जन्म से लेकर मरने तक संग संग ढोता खाता है , अपने संग बंधे चिपके और आश्रित परिवार वालों के पेट के लिये , जब वह जन्म के समय पेट साथ लेकर आता है और मरने तक इसी पेट को संग लिये घूमता है , तब तक कोई इसे मेहनत और ईमानदारी की ईंधन की खुराक डाल कर देह की गाड़ी चलाता है , भले ही उसकी स्पीड 500 मीटर प्रति घंटा हो या बेईमानी, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार ए दो नंबर , चार नंबर की औंधी सीधी कमाई का आलीशान मंहगा एयर पेट्रोल का ईंधन भर कर शताब्दी की स्पीड 140 किलो मीटर प्रतिघंटा या हवाई जहाज की स्पीड 600 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से इस नामुराद देह की गाड़ी चलाता या उड़ाता हो । 

बहरहाल ये साफ है कि जैसे हर स्कूटर मोटर सायकल वाले को पैदल चलता आदमी ओछा और छोटा तुच्छ गरीब इंसानी कीड़ा मकोड़ा नजर आता है तो हर कार वाले को स्कूटर मोटर सायकल वाले भी ऐसे ही नजर आते हैं , तो हर और बड़ी गाड़ीयों वालों जैसे बी एम डब्ल्यू, राल्स रायस या एम्पाला वालों को ये कारों वाले भी बड़े तुच्छ और ओछे छोटे कीड़े मकोड़े नजर आते हैं । क्या करिये इंसान की फितरत ही यही है , ग्वालियर के किले पर सास बहू यानि कि सहसबाहू के मंदिर से नीचे देखेंगे तो पूरा ग्वालियर ही , सब ई एम डब्ल्यू , बी एम डब्ल्यू , रेल गाड़ी अताब्दी शताब्दी , राजधानी वगैरह सब के सब ही रेंगते हुये छोटे मोटे तुच्छ और ओछे कीड़े मकोड़े नजर आने लगते हैं , यह फितरत नहीं , हकीकत है , दृष्टिकोण और दृष्टि युक्तिकरण है । और ऊपर लिखे बाकी सब इंसानी अहंकारी फितरत के दृष्टिभ्रम हैं । 

बिल्कुल कुछ ऐसा ही है , मीडिया भी एक दृष्टिभ्रम में रहता और चलता है , और जहां तक संभव हो यथार्थ व सचाई के धरातल से बचता है , वरना सच लिखने का कहने का ( नेता भी इसमें शामिल समझिये) अंजाम यह होगा कि जिनका सच कहा बोला  लिखा जाये उनके पास तो फूटी छदाम नहीं है देने को और जो दे सकते हैं या जिनकी कृपा से या वरद हस्त से मीडिया चलता है या विज्ञापन वगैरह या बिना विज्ञापन दो नंबर में कुछ मिल मिलू जाता है वही लोग इस देश का असत्य हैं , गलत काम करने वाले , भ्रष्ट बेईमान और रिश्वतखोर हैं , अब उनकी कृपा ओर पैसे से से ही मीडिया चलना है । तो गरीब आम आदमी तब जाकर एक छपा अखबार या टी वी चैनल पर कुछ खबर पढ़ या देख पाता है । सो मीडिया भी साग सब्जी के दामों की आवाज उठाने के बजाय सोने के ही दाम बतायेगा जिसे आम गरीब आदमी देख सुन तो ले और अखबार या चैनल को बहुत बड़ा माने और समझे , चमक दमक दीखे भले ही सारे कपड़े उतार कर दीखे मगर चमचमाती चीज दीखे , चकाचौंध में आखें चौंधिया जायें तो और देखने पढ़ने वाला बाकी सब गम , परेशानियां और समस्यायें बिसरा दे और ध्यान भूल कर सोने के दामों को राष्ट्रीय चर्चा व महत्व का विषय समझे । 

अगर साग सब्जी जैसे मसले और चीजें टी वी चैनल पर या अखबारों में देखने पढ़ने को मिलेंगी तो चमक दमक का खेल खत्म हो जायेगा और ओछी व तुच्छ चीजें नेशनल लेवल पर दिखने लगेंगी और राष्ट्रीय चर्चा , महत्व और प्रोटेस्ट का आधार बन जायेंगी , दाम यकायक गिरकर बाबाज के लंगोट के माफिक कम और कम होते जाकर ऐसे धड़ाम से गिरेंगें जैसे लंगोट की पट्टी अचानक से खुल कर बिकनी की तरह फस्स् और सररर करती खिसक गई हो । गोया किसान से खरीदी कोई चीज पांच रूपया प्रति किलों केवल दह रूपये प्रतिकिलो के दाम पर आ जायेगी । 

मतलब ये कि जब बेचने वाला ही एक रूपये प्रतिकिलो के मुनाफे पर धंधा करेगा तो , बाकी दल्ले , नेता , अफसर , और लग्गा तग्गा मसलन मीडिया और .... वगैरह वगैरह कहां से पलेंगें , कहां से खायेंगें । उसी चीज को जब पचास रू प्रतिकिलो बेचा जायेगा तो बेचने वाले को भी पांच रू मुनाफे के और बाद बाकी , चुनाव टाइम पर नेताओं और पार्टीयों को चंदा , मंडी में दूकान या ठेला लगाने की रोजाना की नगरनिगम या नगरपालिका की रोजनदारी वसूली , पुलिस वाले बीट प्रभारी का लेन देन, और बीच बीच में बीट प्रभारी के बजाय फीती लगाये आ जाने वाले सिपहिया , जब तब पत्रकार और न जाने कितनों के हिसाब किताब के बाद अगर पांच रू प्रति किलो किसान से खरीदी चीज कोल्ड स्टोरेज में डाल कर बी एच सी यानि बैंजीन हैक्सा क्लोराइड और मैलाथियान तथा भैंस का इजेक्शन लगाकर लंबी मोटी कर बढ़ाई गईं सब्जियां जैसे लौकी , तोरई , कद्दू , बैंगन , खीरा  और  सेम आदि इन सबके खर्चों को निकाल कर अपने आप ही दाम उस पांच रू का पचास रू हो ही जाता है । 

मतलब साफ है ,कोल्ड स्टोरेज किसान को भी खा रहे और लूट रहे हैं तो जनता यानि आम आदमी को भी । एक बार मुरैना में हजारों टन आलू कोल्ड स्टोरेजों को बाहर सड़क पर यानि हाई वे पर फेंकना पड़ा था , ऐसा तब हुआ जब नया आलू किसान ले आया और वह कोल्उ स्टोरेज वाले आलू से पच्चीस गुना सस्ता था । लिहाजा कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले व्यापारियों ने कोल्ड स्टोरेजों का मासिक किराया देना बंद कर दिया और नया माल ( आलू ) खरीद  कर कोल्ड स्टोरेज ले जाना शुरू कर दिया ,बाजार में उस समय आम आदमी को कोल्ड स्टोरेज वाला आलू चालीस से पैंतीस रू प्रति किलो बेचा जा रहा था , मगर किसान का नया आलू मंडी में पांच रू प्रतिकिलो और मोहल्लों घरों में वह आठ रूपये और सात रू प्रतिकिलों के दाम पर हाथठेले वालों द्वारा बेचा जाने लगा तो , ऐसी सूरत में वही चालीस पैंतीस रू प्रतिकिलो वाला कीटनाशक दवायें मिला हुआ हजारों टन आलू सड़कों पर फेंकना पड़ा  । 

उक्त घटनाक्रम से जाना जा सकता है कि सिस्टम में दोष कहां पर है , अलबत्ता कोल्ड स्टोरेजों की स्थापना इसलिये की गई थी कि किसान अपना माल यानि फसल उसमें रख सके और साल भर साग सब्जी आम जनता को हर मौसम में मिल सके , इसलिये नहीं कि दलाल , व्यापारी और विक्रेता , किसी किसान से सस्ते में माल खरीद कर सालभर मुनाफाखोरी , ब्लेकमार्केटिंग के लिये जमाखोरी कर सकें । 

किसी किसान ने अपना माल कोल्डस्टोरेज में रखा होता तो न कभी साग सब्जी के दाम बढ़ते और किसान आज तक इतना गरीब , परेशान और मजबूर व लाचार ही नहीं होता । सरकार अगर मंडी में फसल खरीदने और तुलाई के लिये किसानों का पंजीयन कर एस एम एस से नंबर लगवाती है कि केवल किसान ही बेच पाये अन्य कोई दलाल या व्यापारी नहीं ,तो फिर कोल्ड स्टोरेजों और बेयर हाउसों के लिये केवल किसान ही इनमें अपनी फसल की उपज रख सके , यह अनिवार्य क्यों नहीं करती , किसानों की भी समस्या हल होकर परेशानी खत्म हो जायेगी , किसानों के खाते की फसल की मेहनत की , लागत की मुनाफे की समस्या ही समाप्त हो जायेगी और आम जनता को भी पांच रू की चीज पचास रू प्रतिकिलो में लेने की फर्जी व कृत्रिम मंहगाई से हमेशा के लिये मुक्ति मिल जायेगी , किसान भी चैन से अपना परिवार पाल सकेगा और दो रोटी शान व इज्जत से खा सकेगा और आम आदमी भी जो आज केवल साग सब्जी के दाम पूछ कर मन मसोस कर लाचार होकर रह जाता है और देशी घी की तरह सब्जी वाले के ठेले के दर्शन कर पाव भर , या आधा किलो एकाध चीज कभी कभार खरीद कर रह जाता है और हर चुनाव के बाद हर सरकार से आस लगाता है कि अब दाम कम हो जायेंगें और हम चैन से ख पी सकेंगें । 

सरकारी साग रोटी खा रहे नेताओं और अफसरों को यह सारी बातें समझ नहीं जायेंगीं क्योंकि उनका समझदानी का लेवल हाई ( गोल्ड यानि सोने के लेवल ) रहता है और ये साग सब्जी , आम आदमी वगैरह जरा लो लेवल की बातें हैं , सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों के लेवल की बातें हैं । 

दूसरी भाषा में कहें तो ..... रोजाना खपत होने वाली चीजों को नकदी की यानि रोजाना मुनाफा देने वाली चीजें कहा जाता है , मसलन ... माचिस , नमक , साग सब्जी , तेल , दाल , मसाले ( हर कोई नहीं डालता) आदि रोजाना बिकने , खपत होने वाली चीजें हैं और हर आदमी के इस्तेमाल की चीजें हैं , अगर यही आम आदमी से दूर हो गयीं और बेतहाशा बेलगाम मंहगीं इसी तरह ही रहीं और होतीं रहीं तो ...... भई हम तो इसी तरह लिखते रहेंगें , और ग्वालियर टाइम्स इसी तरह प्रकाशित प्रसारित करती रहेगी ।   

शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

ई-नगरपालिका पोर्टल की समीक्षा के लिये समिति गठित

 प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री नीतेश व्यास द्वारा नगर निगम एवं नगर पालिका परिषदों/नगर परिषदों में संचालित ई-नगरपालिका पोर्टल की समीक्षा के लिये समिति गठित की गयी है।

समिति में डॉ. सुषमा दुबे वित्तीय सलाहकार नगरीय विकास एवं आवास अध्यक्ष होंगी। समिति में श्री सौरभ तिवारी लेखाधिकारी नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, श्री अली मोहम्मद कनिष्ठ लेखाधिकारी वित्तीय सलाकार नगरीय विकास एवं आवास और श्री देवेन्द्र व्यास सहायक संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय सदस्य होंगे। श्री योगेन्द्र पटेल सहायक संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय सदस्य सचिव होंगे।

अब 1.50 रु. के स्थान पर 50 पैसे होगा मंडी शुल्क 14 नवंबर 2020 से आगामी 3 माह के लिए लागू होगी यह छूट

 मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में व्यापारियों से लिए जाने वाले मंडी शुल्क की राशि अब 1.50 रु. के स्थान पर 50 पैसे प्रति 100 रु. होगी। यह छूट 14 नवंबर 2020 से आगामी 3 माह के लिए रहेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने गत दिनों व्यापारियों से इस संबंध में किए गए वादे को पूरा कर दिया है। व्यापारियों द्वारा मुख्यमंत्री श्री चौहान को आश्वस्त किया गया था कि इससे मंडियों की आय में कमी नहीं होगी। 3 महीने बाद इस छूट के परिणामों का अध्ययन कर आगे के लिए निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज इस संबंध में विभाग की उच्च स्तरीय बैठक ले रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव श्री अजीत केसरी, प्रमुख सचिव श्री मनोज गोविल तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

गत वर्ष मंडियों को हुई थी 12 सौ करोड़ रुपए की आय

वर्ष 2019-20 में प्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों को मंडी फीस एवं अन्य स्रोतों से कुल 12 सौ करोड रुपए की आय हुई थी। मंडी बोर्ड में लगभग 4200 तथा मंडी समिति सेवा में लगभग 29 सौ अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं तथा लगभग 2970 सेवानिवृत्त अधिकारी- कर्मचारी हैं। इनके वेतन भत्तों पर गत वर्ष 677 करोड रुपए का व्यय हुआ था।

आगे भी लागू रह सकती है छूट

व्यापारियों के आश्वासन पर मंडी शुल्क में छूट दी गई है। छूट की अवधि में यदि मंडियों को प्राप्त आय से मंडियों के संचालन, उनके रखरखाव एवं कर्मचारियों के वेतन भत्तों की व्यवस्था सुनिश्चित करने में कठिनाई नहीं होती है, तो राज्य शासन द्वारा इस छूट को आगे भी जारी रखा जा सकता है।

पर्यटन के लिए लीज पर ली गई शासकीय भूमि पर होगी बैंक से ऋण लेने की पात्रता

 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि मध्य प्रदेश में पर्यटन का तेज गति से विकास कर न सिर्फ इसे भारत में पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है, बल्कि इसके माध्यम से रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित करने हैं। प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है तथा प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग डेढ़ गुना हो गई है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज मंत्रालय में पर्यटन कैबिनेट की बैठक ली। बैठक में पर्यटन के लिए मध्यप्रदेश में लीज पर दी जाने वाली शासकीय भूमि पर बैंकों से ऋण लेने की पात्रता संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला आदि उपस्थित थे।

प्रमुख सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि पर्यटन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश का भारत में सातवां स्थान है। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश में कुल 5 करोड़ 88 लाख पर्यटक आए वहीं वर्ष 2019 में आठ करोड़ 90 लाख से अधिक पर्यटक मध्यप्रदेश में आए।

प्रदेश में चल रही है पांच फिल्मों की शूटिंग

मध्यप्रदेश की फिल्म पर्यटन नीति, जिसके तहत प्रदेश में फिल्म, टीवी सीरियल, वेब सीरीज आदि निर्माण के लिए ₹10 करोड़ तक का अनुदान दिया जाता है, काफी लोकप्रिय हो रही है। वर्तमान में प्रदेश में पांच फिल्मों की शूटिंग चल रही है। राजकुमार संतोषी, अनुपम खेर जैसे फिल्म निर्माता मध्यप्रदेश में फिल्म शूट कर रहे हैं। वर्ष 2020 21 में लगभग 45 फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी सीरियल आदि की शूटिंग संभावित है।

साहसिक एवं जल कीड़ा पर्यटन

मध्यप्रदेश की कैंपिंग नीति 2018 तथा जल पर्यटन नीति 2017 के चलते यहां साहसिक एवं जल क्रीड़ा पर्यटन में काफी वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत प्रदेश में सभी सावधानियां बरतें हुए सीमित संख्या में ये गतिविधियां की जा सकती हैं।

रिस्पांसिबल टूरिज्म मिशन

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश में रिस्पांसिबल टूरिज्म मिशन चालू किया गया है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन, अनुभव आधारित पर्यटन, हस्तकला एवं हस्तशिल्प पर्यटन, स्वस्थ जीवन शैली पर्यटन आदि को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के 'वर्चुअल टूर' विदेशों में लोकप्रिय

प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि मध्य प्रदेश के 20 वर्चुअल टूर तैयार किए गए हैं, जो कि गूगल आर्ट एंड कल्चर के माध्यम से विदेशों में अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में फिल्म एंड प्री वेडिंग शूटिंग तथा डेस्टिनेशन टूरिज्म पॉलिसी भी बनाई गई है।

धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। देश में बुद्धिस्ट सर्किट, रामायण सर्किट, तीर्थंकर सर्किट आदि विकसित किए जा रहे हैं। ओमकारेश्वर कथा अमरकंटक का विकास किया जा रहा है। सालरिया गो अभयारण्य जैसे स्थानों पर ध्यान एवं आयुष चिकित्सा के अंतर्गत पंचकर्म आदि पर केंद्रित पर्यटन केंद्र प्रारंभ किए जा सकते हैं।

वन एवं पर्यावरण आधारित पर्यटन

मध्यप्रदेश में वन एवं पर्यावरण आधारित पर्यटन के अंतर्गत वाइल्डलाइफ सर्किट, इको सर्किट, बफर में सफर आदि पर कार्य किया जा रहा है। लोनली प्लैनेट संस्था द्वारा मध्य प्रदेश को दुनिया का तीसरा सबसे अच्छा गंतव्य चुना गया है।

बंद होंगें बरसों पुराने ग्वालियर, इंदौर रीवा के ऐतिहासिक शासकीय मुद्रणालय , पशुपालन विभाग का नाम बदलेगा

 मंत्रि-परिषद ने पशुपालन विभाग का नाम परिवर्तित कर पशुपालन एवं डेयरी विभाग किये जाने एवं कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन की कार्यवाही करने का भी निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने हॉक फोर्स में सहायक सेनानी के 5 पदों को समर्पित कर 3 उप सेनानी के पदों के निर्माण की स्वीकृति दी है।

मंत्रि-परिषद ने शासकीय मुद्रणालय ग्वालियर, इंदौर, रीवा को बंद करने एवं शासकीय प्रेस के 495 पदों को समर्पित एवं 185 पदों को सांख्येत्तर घोषित करने का निर्णय लिया।

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश प्रतीकरात्मक वन-रोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (राज्य कैम्पा प्राधिकरण) के कार्यालय की स्थापना तथा उसके लिये पदों की मंजूरी दी।

स्व सहायता समूहों को उनकी निर्माण व सप्लाई क्षमता के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक के छात्र छात्राओं के लिये ड्रेस बनाने का काम सौंपा

 मंत्रि-परिषद ने सभी ऐसे जिले, जहाँ पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला-बाल विकास एवं नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग अंतर्गत क्रियाशील एवं सक्षम स्व-सहायता समूह हैं, को उनकी क्षमता के अनुरूप गणवेश प्रदाय का आर्डर दिये जाने का निर्णय लिया। स्व-सहायता समूह द्वारा कक्षा एक से 8 तक के अनुरूप 3 माह के भीतर स्टेंडर्ड साइज की यूनिफार्म उपलब्ध कराई जायेगी।

नर्सिंग कोर्स की मान्यता, सीट वृद्धि और मान्यता नवीनीकरण के नियमों में बदलाव को सन 2018 से मंजूरी दी गई , ये सुविधायें नहीं तो कालेज और सर्टीफिकेट अमान्य व अवैध होंगें

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश में संचालित नर्सिंग पाठ्यक्रम के संचालन के संबंध में नवीन मान्यता, नवीनीकरण एवं सीट्स वृद्धि की मान्यता में शैक्षणिक सत्र 2018-19 एवं 2019-20 में की गई कार्यवाहियों में नियमों से संबंधित व्यवहारिक समस्याएँ उद्भूत हुईं, जिन्हें उदाहरण स्वरूप- एम.एस.सी. नर्सिंग पाठ्यक्रम हेतु न्यूनतम 50 बिस्तरों का सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल अनिवार्य किया जाना, किसी चिकित्सालय द्वारा पैरेन्ट हॉस्पिटल के रूप में एक ही नर्सिंग संस्था को संबद्ध करना, वर्ष 2013 के बाद नवीन नर्सिंग संस्था प्रारंभ करने के लिये स्वयं का 100 बिस्तरीय अस्पताल होना एवं नर्सिंग संस्थाओं द्वारा ब्लॉक/जिला परिवर्तन करने पर नवीन संस्था के रूप में आवेदन किया जाना आदि निर्णयों के रूप में समाधान के लिये मध्यप्रदेश नर्सिंग शिक्षण मान्यता नियम, 16 अक्टूबर, 2018 एवं 23 सितम्बर, 2019 में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दी गई।

बुधवार, 18 नवंबर 2020

नगर निगम ग्वालियर एवं नगर पालिका डबरा के वार्डों की आरक्षण की प्रक्रिया सम्पन्न

 

नगर पालिका निगम ग्वालियर एवं नगर पालिका डबरा के वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के जन-सुनवाई कक्ष में हुई। आरक्षण की प्रक्रिया कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा की गई। इस मौके पर एडीएम श्री टी एन सिंह, अपर कलेक्टर श्री रिंकेश वैश्य एवं एसडीएम श्री विनोद भार्गव उपस्थिति थे। वार्डों के आरक्षण के समय जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में पूरी प्रक्रिया के साथ वार्डों का आरक्षण किया गया।

संभागीय समीक्षा बैठक 20 नवम्बर को संभाग आयुक्त लेंगें , विद्युत विभाग की समीक्षा अनिवार्यत: की जायेगी

 विकास कार्यों की संभागीय समीक्षा बैठक संभाग आयुक्त श्री आशीष सक्सेना की अध्यक्षता में 20 नवम्बर को प्रात: 11 बजे से मोतीमहल के मानसभागार में आयोजित की गई है। बैठक में संभाग के सभी जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सहित संभाग स्तरीय विभागीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

    संभाग आयुक्त द्वारा प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए 15 बिंदु एजेण्डे की समीक्षा के साथ-साथ नजूल भूमि के प्रबंधन एवं निर्वतन निर्देश 2020 की समीक्षा एवं आरसीएमएस प्रकरणों की भी समीक्षा की जायेगी। शासन द्वारा 15 बिंदु के एजेण्डे में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार, बाजरा खरीदी, कानून व्यवस्था, मिलावट से मुक्ति अभियान, मुख्यमंत्री किसान कल्यण योजना, नवीन पात्रता पर्ची धारियों को खाद्यान्न वितरण, पथ विक्रेता उत्थान योजना, स्व-सहायता समूहों का सशक्तिकरण, कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन, आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण, एक जिला एक उत्पाद योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की जायेगी।
    इसके साथ ही लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन पोर्टल पर परिसम्पत्तियों की जानकारी का अध्ययन करने के कार्य की समीक्षा, नगरीय निकायों में एकल खाता प्रणाली लागू करने के संबंध में समीक्षा, खाद्य आपूर्ति की समीक्षा के साथ-साथ विद्युत विभाग की भी समीक्षा की जायेगी।

संभाग आयुक्त आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करेंगे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा

 संभाग आयुक्त श्री आशीष सक्सेना ग्वालियर संभाग में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से संचालित योजनाओं की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा करेंगे। यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग 18 नवंबर को प्रातः 11 बजे से होगी। जिसमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर व दतिया जिले के जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, कार्यपाल यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सहित संभाग की सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भाग लेंगे।

   वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में खास तौर पर पथ विक्रेता उत्थान योजना ग्रामीण, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, स्वरोजगार मेला आयोजन/स्वरोजगार प्रदाय की स्थिति, स्व-सहायता समूहों का सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश, जिलावार कार्ययोजना/क्रियान्वयन, मनरेगा योजना, गौशाला का निर्माण एवं संचालन, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, सीएम हैल्पलाइन, जवाब प्रस्तुत हेतु लंबित न्यायालयीन प्रकरण, पंच परमेश्वर योजना, ईओएल सर्वे की प्रगति, लंबित शिकायतें, सिंचाई जलाशयों को पट्टे पर दिए जाना, सांसद निधि, राज्यसभा निधि, विधायक निधि, जनभागीदारी, आदिम जाति कल्याण विभाग, आंगनबाड़ी निर्माण, किचन शेड निर्माण जिला एवं जनपद स्तरीय परफोरमेंस ग्रांट आदि, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के निर्माण कार्य एवं स्वच्छ भारत मिशन सामुदायिक स्वच्छता परिसर निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की कार्य योजना एवं प्रगति आदि योजनाओं व कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी।
   संभाग के सभी जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को इन बिंदुओं से संबंधित जानकारी ई मेल के जरिये 16 नवंबर तक संभाग आयुक्त कार्यालय में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री चौहान ने दी मीडिया जगत को बधाई, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया का भी उल्लेख किया

 मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नेशनल प्रेस दिवस पर पत्रकार भाई-बहनों को हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संदेश में कहा कि समाज के नवनिर्माण में पत्रकार और कलमकार महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। किसी समय प्रेस से आशय सिर्फ पत्र-पत्रिकाओं से था। आज इस प्रेस का आशय मीडिया से है, जिसमें सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इन माध्यमों से जुड़े सभी साथियों को प्रेस दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि पत्रकारिता से लोकतंत्र को नई शक्ति मिली है। समाज में नव चेतना जागृत हुई है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रेस ने आपातकाल में दमन का दौर भी देखा है। कोरोना महामारी के दौर में हमारे पत्रकार बंधुओं ने निर्भीक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाई। आज पत्रकारिता से जुड़े सभी लोग बेहतर वातावरण में कार्य कर रहे हैं। प्रेस ने अपनी भूमिका को स्वयं के प्रयासों से महत्वपूर्ण बनाया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कामना की है कि प्रेस प्रतिनिधि सशक्त होकर, समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण में इसी तरह महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।

विभिन्न मिष्ठान भण्डारों से लिए नमूने खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने की कार्रवाई

 

आम जनता को शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने एवं खाद्य पदार्थों मे मिलावट रोकने के उद्देश्य से जिले में लगातार मिठाईयों एवं अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जाँच कराई जा रही है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार को ग्वालियर शहर में विभिन्न मिठाईयों की दुकानों से 7 नमूने लेकर जाँच के लिये राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजे गए हैं।
    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मयूर मार्केट ठाठीपुर स्थित बंगाली स्वीट्स, जय भोले मिष्ठान भण्डार सनातन धर्म मंदिर रोड़, न्यू महावीर स्वीट्स कुम्हरपुरा चौराहा, शुभम स्वीट्स नया बाजार चौराहा, अयोध्यावासी स्वीट्स एण्ड नमकीन सदर बाजार एवं नया बाजार स्थित मुरैना मिष्ठान भण्डार से विभिन्न मिठाईयों के नमूने लिए हैं।
    इस दौरान सभी मिठाई विक्रेताओं को निर्देश दिए गए कि त्यौहार बीत जाने पर बासी मिठाईयाँ कदापि न बेची जाएँ। दुकानों का संचालन मास्क पहनकर एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए करें।
    डिप्टी कलेक्टर एवं अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा प्रशासन श्री संजीव खेमरिया के नेतृत्व में कार्रवाई के लिये गए दल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सर्वश्री रवि कुमार शिवहरे, लोकेन्द्र सिंह, आनंद शर्मा, लखनलाल कोरी, गोविंद नारायण सरगैंया, सतीश धाकड़, सतीश शर्मा एवं श्रीमती निरूपमा शर्मा शामिल थीं।
 

रविवार, 15 नवंबर 2020

भ्रष्ट बिजली कंपनी का स्तरहीन घटिया इन्फ्रारस्ट्रक्चर और निकम्मे तथा भ्रष्ट बिजली अफसरों की अयोग्य और नाकारा टीम की बदौलत चंबल अंधेरे में डूबी , शाम 6 बजे से मुरैना में बिजली गोल

शिकायतों को महज 500 से 800 रूपये लेकर करा दिया जाता है फोर्सली फर्जी तरीके से सी एम हेल्पलाइन में क्लोज

मुरैना, 15 नवम्बर ( ग्वालियर टाइम्स ) मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के चंबल संभाग के वितरण में जो भी क्रम जारी है , उसमें कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में हुई अयोग्य व भ्रष्ट अफसरों और फील्ड में बिजली कर्मियों की पदस्थी तो खैर अपने आप में भ्रष्टाचार का एक नायाब नमूना रही है , सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों को महज 500 से 800 रूपये लेकर ( हमारी आंखों देखी ) मुरैना कलेक्ट्रेट के गेट स्थित एन आई सी के सेवा केन्द्र से हर शिकायत को फर्जी तरीके से फोर्सली क्लोज कर यह कहा जाता रहा कि (  कोई भी ) शिकायतकर्ता (साले ) को घुमाते रहेंगें एक नंबर से चार नंबर तक ऐसे ही , तुम पैसे दिये जाओ , हम यूं ही क्लोज करते रहेंगें ।

यह वाकया उस वक्त का है जब एक पुलिस शिकायत के संबंध में हम सी एस पी मुरैना को अपना बयान दर्ज कराने गये थे , तब संयोग से सी एस पी मुरैना ने हमें वहां उस कक्ष में भेज दिया था और दो चार घंटे हमने उस कक्ष की कार्यवाही और प्रणाली को खुद अपनी आंखों से देखा , संयोग से कक्ष प्रभारी हमें पहचानता नहीं था सो धड़ल्ले से हमारे सामने ही खेल करता और बताता रहा ।

बिजली कंपनी का भ्रष्टाचार और घटिया इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा अवैध व फोर्सली फर्जी बिल देना तो खैर किसी से छिपा नहीं है , न आम जनता से और न किसी राजनेता से , न न्यायालय से और न किसी भी जांच एजेंसी से । न थ्री फेज सप्लाई है कहीं और न किसी उपभोक्ता के थ्री फेज बिल लगातार भुगतान के बावजूद ही थ्री फेज सप्लाई ही मिल रही है , मटरूआ , करूआ हों या कोई और शराब में 24 घंटे मस्त पड़े बिजली अफसर और बिजली कर्मीयों के शौक और मौज केवल दारू तक ही हो ऐसा नहीं है , औरतखोरी और रिश्वत , भ्रष्टाचार के अलावा मांस , मुर्गा और बकरे के शौकीन , जहां फैक्ट्रियों और उद्योगों को जमकर बिजली चोरी करा कर रोजाना ही कंपनी को अपने बाप का माल समझ कर बेच रहे हैं तो उनके बिजली बिलों को घरेलू आम उपभोक्ताओं पर एडजस्टमेण्ट के नाम और आकलित खपत के नाम पर फर्जी तरीके से लाद देता है और चोरों को साहूकार तथा साहूकारों को चोर बनाता रहता है ।

भ्रष्टाचार और अंधेरगर्दी का आलम ये है कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली तो कभी मिलती ही नहीं है और केवल बिल मिलते हैं , जबकि उद्योगों और फैक्ट्रियों के हर महीने के लाखों करोड़ों के बिलों की चोरी करवा कर , एडजस्टमेण्ट के लिये आकलित खपत का फर्जी आंकड़ा बना कर धर दिये जाते हैं ।

बिजली आम आदमी को न तो कमलनाथ की कांग्रेस सरकार दे पाई और वही नतीजा भी हालिया उपचुनाव परिणामों में कमनाथ सरकार ने भोगा भी, और उन्हीं अंधेरगर्द और भ्रष्ट अफसरों तथा बिजली कर्मियों की तैनाती और उनकी अयोग्यता, नाकारा और निकम्मापन और भ्रष्टाचार  अब उपचुनाव होते ही फिर से सिरदर्द बन कर उठा है ।

उपचुनावों से पहले रोजाना की जा रही आठ दस घंटों की अघोषित अंधाधुंध  बिजली कटौती , उपचुनाव और दीवाली गुजरते ही फिर से आज 15 नवम्बर सेफिर से चालू हो गयी है , मुरैना में ( गांधी कालोनी . ग्वालियर टाइम्स के प्रधान कार्यालय के आसपास क्षेत्र की ) आज सुबह 9:30 बजे  बिजली काटने के बाद , शाम 6:15 बजे से बिजली फिर काट दी गयी  जो कि इस समय इस खबर के लिखे और प्रकाशित किये जाने के वक्त तक पूरी तरह बंद है , ग्वालियर टाइम्स के प्रधान कार्यालय पर हालांकि 3 फेज का कनेक्शन सन 1995 से है , और 3 फेज का ही बिजली भुगतान किया जाता रहा है मगर बिजली केवल सिंगल फेज के ही 3 फेज बनाकर दी जाती है अर्थात 3 फेज की केबल को पोल पर तीनों फेजों को एक ही सिंगल फेज से जोड़कर दी जाती है । जिसकी तमाम शिकायतें सी एम हेल्पलाइन में की गईं और पी जी पोर्टल भारत सरकार में की गईं , भ्रष्ट अफसरों ने सी एम हेल्पलाइन की सभी शिकायतें बिना किसी निराकरण के ही फोर्सली उटे सीधे जवाब देकर बंद करवा दीं और पी जी पोर्टल भारत सरकार की किसी भी शिकायत का आज तक जवाब ही नहीं दिया , वहां सभी शिकायतें आज दिनांक तक अनिराकृत और पेंडिंग तथा जवाबहीन हैं । जबकि भारत सरकार द्वारा म. प्र. शासन के प्रमुख सचिव ऊर्जा से तत्समय ही जवाब तलब किया जा चुका है लेकिन आज दिनांक तक किसी शिकायत का जवाब देने की जहमत म.प्र. शासन ने नहीं उठाई जिससे आगे हाई कोर्ट जाने का रास्ता खुले ।

इस भ्रष्टाचार की और निकम्मेपन तथा अयोग्यता की ही देन है कि आज चम्बल अंधेरे में डूबी हुई है ।  

शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

जनसहभागिता और मॉनिटरिंग का नया ढाँचा बनाया जायेगा : मुख्यमंत्री - आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप - 2023 जारी

 मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मिंटो हॉल में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के विकास का रोडमैप-2023 जारी किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस ऐतिहासिक अवसर पर कहा कि विकास में जनसहभागिता और मॉनिटरिंग की व्यवस्था का नया ढाँचा खड़ा किया जायेगा। ग्राम, जनपद और जिला स्तर पर दीनदयाल समितियाँ गठित कर जनसहभागिता और मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जायेगी। आधुनिक टेक्नालॉजी का हर क्षेत्र में व्यापक उपयोग कर विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ायी जायेगी। खेती में आधुनिक ढंग से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाकर खेती को लाभ का धंधा बनाया जायेगा। किसानों को पी.एम. सम्मान निधि और मुख्यमंत्री सम्मान निधि के रूप में हर साल कुल 10 हजार रूपये की सम्मान निधि दी जायेगी।

   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की रणनीति पर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप जारी करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप में अधोसंरचना विकास, स्वास्थ्य एवं शिक्षा, अर्थव्यवस्था एवं रोजगार और सुशासन पर स्पष्ट रणनीति तैयार की गई है। इस रोडमैप के आधार पर मंत्री अपने विभागों की योजना तैयार कर क्रियान्वित करेंगे। मंत्री एवं प्रशासन के हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की जायेगी और उसकी प्रत्येक स्तर पर सख्त मॉनिटरिंग होगी।
   आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश रोडमैप-2023 के विमोचन अवसर पर विशिष्ट अतिथि सांसद श्री वी.डी. शर्मा, मिंटो हॉल में एवं भारत सरकार के नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत वी.सी. के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रोडमैप का विमोचन कर उसके क्रियान्वयन के लिये रोडमैप की प्रति मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस को सौंपी। इस अवसर पर अनेक मंत्री, विधायक, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत ने कहा कि कोरोना कॉल में सिर्फ मध्यप्रदेश ने वेबिनार आयोजन की यह महत्वपूर्ण पहल की। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप को लागू कर मध्यप्रदेश देश के अग्रणी प्रांत की पहचान बनाएगा।
प्रधानमंत्री श्री मोदी हमारे प्रेरक
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी हमारे प्रेरक हैं। उनसे सदैव उत्साह और ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने कोरोना की चुनौती को अवसर में बदलने का आव्हान कर आत्मनिर्भर भारत के लिए सभी राज्यों से सहयोग की अपील की थी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश आवश्यक है। इसके लिए किए गए प्रयास आज प्रदेश की जनता के सामने इस रोडमैप के रूप में रखे जा रहे हैं, क्योंकि मध्यप्रदेश की जनता मेरी आराध्य है। मध्यप्रदेश मेरा मंदिर है। यह जनता मेरे लिए भगवान है। इस मंदिर का पुजारी शिवराज सिंह चौहान है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना काल में आर्थिक संकट से लोगों को उबारना एक चुनौती थी। हमने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक राशि पहुंचाई। इन परिस्थितियों में मध्यप्रदेश का रोडमैप प्रस्तुत करना भी एक विशेष कार्य था, जिसे अपनी चाह से हमने पूरा किया। अब रोडमैप को लागू करने के लिए निरंतर कार्य होगा। धनराशि की व्यवस्था भी की जाएगी। निजी क्षेत्र की सहभागिता की सुनिश्चित की जायेगी।
मध्यप्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाएंगे
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बने इसके लिए आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा देंगे। सड़कों के निर्माण के साथ ही अधोसंरचना संबंधी सभी कार्य और नर्मदा जल सहित पानी की एक-एक बूंद का उपयोग करते हुए कृषि क्षेत्र को भी लाभकारी व्यवसाय बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। थर्मल पावर के साथ ही सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग होगा। ओंकारेश्वर जलाशय में सोलर पेनल बिछाएंगे। शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालयों तक विद्यार्थियों को बसों से लाने की व्यवस्था होगी। पढ़ाई से कोई वंचित नहीं रहेगा। लघु जलसंरचनाओं का जाल बिछाया जाएगा। जहां पूर्व में 7 लाख हेक्टेयर से 31 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई क्षेत्र बढ़ाया गया था, उसे 60 लाख तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) एक आंदोलन के रूप में विस्तार प्राप्त करेंगे। संसाधनों के बंटवारे का ध्यान रखते हुए जितनी आबादी उतनी राशि के सिद्धांत पर कार्यों का क्रियान्वयन होगा।
 वोकल को लोकल बनाने का ध्येय
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में रोजगार के माध्यम से अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना एक प्रमुख कार्य रहेगा। वोकल को लोकल बनाने का ध्येय है। स्थानीय उत्पाद को बिक्री से जोड़ा जाएगा। महिला सशक्तिकरण भी स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री को प्रोत्साहन देते हुए बढ़ेगा। ग्रामीण महिलाओं के कौशल को निखार कर उनके व्यवसाय को लाभकारी बनाया जाएगा। इसी तरह सांस्कृतिक गतिविधियों से रोजगार वृद्धि के प्रयास होंगे। छोटे व्यापारियों को तकलीफ न हो, बड़े व्यापारी यदि बेईमानी करते हों, वे सावधान हो जाएं क्योंकि आम लोगों को परेशानी में डालने वाले छोड़े नहीं जाएंगे। अपराधी तत्व कुचल दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में प्रत्येक व्यक्ति का सहयोग प्राप्त किया जाएगा।
सहभागिता और सकारात्मक सोच आवश्यक
   मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेशवासियों से आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश गढ़ने में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि विकास में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। इसके साथ ही सकारात्मक सोच का भी महत्व है। हम सभी सकारात्मक होकर प्रदेश के विकास में भागीदारी करें। एक जिद, जूनून और जज़्बे के साथ सभी प्रदेश की प्रगति के लिए कार्य करें। हमारा मध्यप्रदेश गान भी इसी भाव का परिचायक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नीति आयोग ने प्रदेश के रोडमेप के निर्माण में सहयोग किया है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग रोडमैप क्रियान्वयन में समवन्य करेगा। अन्य सभी विभाग सक्रिय भागीदारी करेंगे। दीनदयाल समितियों के माध्यम से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। कोरोना के संदर्भ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि अभी यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। मास्क ही वैक्सीन है। दीपावली भी सावधानी से सभी लोग मनाएं। कोरोना पूरी तरह समाप्त होगा। "ये रैन अंधेरी बीतेगी, पतवार चलाते जाएंगे, मंजिल आएगी, जरूर आएगी"। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्वामी विवेकानन्द जी के कथन का स्मरण करते हुए कहा कि आज यह जरूरी है कि सभी उठें, जागें और तब-तक कार्य करें, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
रोड मैप में है विकास का विजन
   कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सांसद श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि रोडमैप- 2023 के विमोचन अवसर का यह कार्यक्रम अभिनव है क्योंकि इसमें प्रदेश के विकास के विजन को सामने रखते हुए ग्रामीण स्ट्रीट वेंडर्स को लाभान्वित करने का महत्वपूर्ण कल्याणकारी यज्ञ भी पूरा हो रहा है। इस रोडमैप में एक विजन के दर्शन होते हैं। ये विकास का विजन है। मुख्यमंत्री श्री चौहान विकास के प्रति अत्यंत गंभीर और निरंतर कार्य करने वाले मुख्यमंत्री हैं।
मध्यप्रदेश ने कोरोना से निपटते हुए रोडमैप भी बना लिया - श्री अमिताभ कांत
   नीति आयोग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिताभ कांत ने नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विशिष्ट अतिथि के रूप में भागीदारी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की रणनीति के अनुरूप मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने विभिन्न विषय-विशेषज्ञों से परामर्श कर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप तैयार किया है। इस रोडमैप को प्रदेशवासियों के सामने रखा गया है। जब सभी राज्य सिर्फ कोरोना से ही लड़ रहे थे, तब मध्यप्रदेश ने कोरोना से लोगों के बचाव के लिए अच्छे प्रबंध करते हुए प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए यह रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया जो निश्चित ही प्रशंसनीय है। उल्लेखनीय है कि 7 से 11 अगस्त की अवधि में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप को तैयार करने के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने चार मुख्य विषयों भौतिक अधोसंरचना, सुशासन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा और अर्थव्यवस्था एवं रोजगार पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किये। इन वेबिनार्स में नीति आयोग के प्रतिनिधि, सुशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषय-विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनके सुझाव प्राप्त किये गये। वेबिनार्स में प्राप्त सुझाव के आधार पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप की कार्ययोजना तैयार की।
   प्रारंभ में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के रोडमैप को तैयार करने का श्रेय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को है। मुख्यमंत्री श्री चौहान की उमंग, ऊर्जा और उत्साह के सामने सभी कठिनाईयां बौनी सिद्ध हुईं। जब देश-विदेश में कोविड-19 नियंत्रण से बाहर हो रहा था, तब मध्यप्रदेश में अच्छा प्रबंधन हुआ। प्रशासनिक व्यवस्था में एक आमूल-चूल परिवर्तन यह हुआ की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से निर्णय लेने का महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान के निश्चय से वेबिनार में करीब 650 विषय-विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। ऑन लाइन सुझाव भी प्राप्त हुए। मुख्य सचिव श्री बैंस ने आशा व्यक्त की कि मध्यप्रदेश की विकास यात्रा विभिन्न पड़ावों से होकर मंजिल तक पहुंचेगी। निष्ठा, परिश्रम और जिम्मेदारी से इस रोड मैप को सभी अंजाम तक पहुंचाएंगे। मुख्य सचिव श्री बैंस ने मुख्यमंत्री श्री चौहान का उनकी नेतृत्व क्षमता से मिले इस लाभ के लिए आभार भी व्यक्त किया।
   आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप के विमोचन कार्यक्रम में मंत्री, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव, विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्ष भी शामिल हुए। इसके अतिरिक्त संभाग एवं जिलों से सांसद, विधायक, संभागायुक्त, आईजी, कलेक्टर, एसपी भी कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल थे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण मध्यप्रदेश दूरदर्शन, क्षेत्रीय न्यूज चैनल्स एवं सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर किया गया। कार्यक्रम का संचालन उप सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री सुधीर कोचर ने किया।
   यहाँ ग्वालियर में कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में संभाग आयुक्त श्री आशीष सक्सेना, आईजी श्री अविनाश शर्मा, कलेक्टर श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री अमित सांघी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री शिवम वर्मा, नगर निगम कमिश्नर श्री संदीप माकिन व एडीएम श्री किशोर कान्याल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

4 अपराधी जिला बदर एवं 7 को देना होगा बंध पत्र

 जिला दण्डाधिकारी श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने 4 लोगों को मध्यप्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 के अंतर्गत जिला बदर करने के आदेश जारी किए हैं। पुलिस अधीक्षक ग्वालियर से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर लोक शांति एवं जन सुरक्षा को देखते हुए जिला बदर करने के आदेश जारी किए गए हैं।

    जिला दण्डाधिकारी श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिन अपराधियों के विरूद्ध जिला बदर के आदेश पारित किए हैं उनमें आदिल खां पुत्र ईदा शाह निवासी ग्राम महलगांव थाना विश्वविद्यालय, अरूण यादव पुत्र रणवीर यादव निवासी ग्राम सौंसा थाना उटीला, शेरू उर्फ आशीष दण्डोतिया पुत्र रामगोविंद दण्डोतिया निवासी कुंज विहार कॉलोनी फेस-2 थाना गोले का मंदिर एवं रंजीत उर्फ राणा पुत्र कप्तान सिंह गुर्जर निवासी बेड़ी वाली माता लक्ष्मण तलैया, थाना बहोड़ापुर  जिला ग्वालियर शामिल हैं।
    इसके अतिरिक्त अजमेर पुत्र धनीराम जाटव निवासी ग्राम बेरू थाना डबरा देहात, विष्णु किरार पुत्र लाल सिंह किरार निवासी तांगा अड्डा तिकोनिया मुरार थाना मुरार, जीतू उर्फ जितेन्द्र मराठा पुत्र अशोक मराठा निवासी चॉकलेट फैक्ट्री के पास शब्दप्रताप आश्रम बहोड़ापुर थाना बहोड़ापुर, श्याम उर्फ लल्लू पुत्र ईश्वरी सिंह तोमर निवासी तारघर जयेन्द्रगंज लश्कर थाना इन्दरगंज, आकाश कुशवाह पुत्र अशोक कुशवाह निवासी महेशपुरा अजयपुर सिकन्दर कम्पू थाना गिरवाई, अंकुश राजपूत पुत्र रामसेवक राजपूत निवासी विनयनगर सेक्टर-2 थाना बहोड़ापुर एवं दीपेन्द्र उर्फ करू गुर्जर पुत्र राजेन्द्र सिंह गुर्जर निवासी ग्राम लक्ष्मणगढ़ थाना महाराजपुरा जिला ग्वालियर को तीन दिन के अंदर अपने संबंधित थानों में 50 – 50 हजार रूपए का बंध पत्र प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।
 

मध्यप्रदेश के इतिहास में 2789.55 लाख यूनिट बिजली सप्लाई का नया रिकार्ड कायम , ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न तोमर ने की अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यों की सराहना

 मध्यप्रदेश के इतिहास में 10 नवम्बर को बिजली सप्लाई का नया रिकार्ड कायम हुआ। इस दिन 2789.55 लाख यूनिट बिजली की सप्लाई पूरे प्रदेश में की गई। प्रदेश में पिछले पांच दिनों से बिजली की सप्लाई लगभग 2700 लाख यूनिट से अधिक हो रही है। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक श्री आकाश त्रिपाठी ने जानकारी दी कि इससे पूर्व 21 नवम्बर 2018 को  प्रदेश में बिजली की एक दिन की सर्वाधिक सप्लाई 2658.69 लाख यूनिट हुई थी। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अधिकतम विद्युत मांग की सफलतापूर्वक आपूर्ति पर सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यों की सराहना की है।

प्रदेश में दो दिनों से बिजली की मांग पहुंची 14 हजार मेगावाट के ऊपर
   श्री त्रिपाठी ने जानकारी दी है कि 10 नवम्बर को प्रदेश में बिजली की मांग 14 हजार 147 मेगावाट दर्ज हुई। इस रबी सीजन में पहली बार बिजली की मांग 14 हजार मेगावाट से ऊपर दर्ज हुई है, जो बढ़ कर 11 नवम्बर को प्रात:काल 14 हजार 190 मेगावाट बिजली तक पहुंच गई। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में इस रबी सीजन में दो माह पूर्व ही बिजली की मांग 14 हजार मेगावाट से ऊपर पहुंच गई, जबकि पिछले रबी सीजन में बिजली की मांग जनवरी-फरवरी माह में शीर्षतम स्तर पर पहुंचती थी।
प्रदेश के पश्चि‍म क्षेत्र में बिजली की मांग 5744 मेगावाट
   वर्तमान में प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (इंदौर व उज्जैन) में सर्वाधिक 5,744 मेगावाट, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (भोपाल व ग्वालियर) में बिजली की अधिकतम मांग 4,741 मेगावाट एवं पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (जबलपुर, सागर व रीवा) में 3,663 मेगावाट दर्ज हुई।  
प्रदेश में बिजली सप्लाई कैसे हुई
   प्रदेश में 11 नवम्बर को जब बिजली की मांग 14 हजार 147 मेगावाट दर्ज हुई, उस समय बिजली की सप्लाई में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप व जल विद्युत गृहों को उत्पादन अंश 3,450 मेगावाट, इंदिरा सागर-सरदार सरोवर-ओंकारेश्वर जल विद्युत परियोजना का अंश 436 मेगावाट, एनटीपीसी व नार्दन रीजन का अंश 3,955 मेगावाट, सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट का अंशदान 1,349 मेगावाट व आईपीपी का अंश 1,334 मेगावाट रहा और बिजली बैंकिंग से 1,948 मेगावाट व अन्य स्त्रोत, जिनमें नवकरणीय स्त्रोत भी शामिल हैं, से प्रदेश को 1,676 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई।