शुक्रवार, 4 जुलाई 2008

महापौर व निगमायुक्त ने प्रोजेक्ट उदय के इंजीनियरों को कसा

महापौर व निगमायुक्त ने प्रोजेक्ट उदय के इंजीनियरों को कसा

ग्वालियर दिनांक 02 जुलाई 2008- महापौर विवेक नारायण शेजवलकर एवं निगमायुक्त डॉ. पवन शर्मा द्वारा ए.डी.बी. कार्यक्रम के अंतर्गत जल सप्लाई परियोजना तथा प्रोजेक्ट उदय के तहत गतिशील कार्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान महापौर द्वारा बल्क मीटरों की स्थापना निर्धारित समयावधि में पूर्ण न होने पर अधिकारियों को नाराजगी व्यक्त करते हुये कार्य को अतिशीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिये ।

महापौर द्वारा बताया गया कि उक्त कार्य पांच जुलाई 2007 तक पूर्ण किया जाना था जिसे एक वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बावजूद भी पूर्ण नहीं किया गया। प्रोजेक्ट प्रभारी के. के. श्रीवास्तव द्वारा इस संबंध में जानकारी दी गई कि 22 बल्क मीटर क्रय करने की कार्यवाही की जा चुकी है तथा मोतीझील फिल्टे्रशन प्लांट, नये ट्रीटमेंट प्लांट इत्यादि पर बल्क मीटर स्थापित किये जा चुके हैं उनके द्वारा बताया गया कि 30 जुलाई 2008 तक सभी 25 बल्क मीटर चालू कर दिये जावेंगे जिससे सम्पूर्ण शहर में सप्लाई किये जाने वाले पानी का अंकेक्षण किया जा सकेगा।

परियोजना के दूसरे बिन्दु पम्पिंग स्टेशन तथा नये वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के आधुनिकीकरण के कार्य में भी हो रहे विलंब पर महापौर द्वारा नाराजगी व्यक्त की गई। उक्त कार्य में अभी तक ठेकेदार को दो बार कार्यवृध्दि की जा चुकी है। प्रभारी अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि विभिन्न रिपेयरिंग कार्य तेजी से गतिशील हैं। 22 में 21 फिल्टर का कार्य पूर्ण हो चुका है, अंतिम फिल्टर में प्लास्टर का कार्य चल रहा है तथा 2600 मीटर फैन्सिंग का कार्य पूर्ण होकर केवल 100 मीटर फैन्सिंग का कार्य शेष होकर गतिशील है।

उन्होंने बताया कि नवीन ट्रीटमेंट प्लांट के पूर्ण हो जाने का लाभ चालू वित्तीय वर्ष में गहराये पेयजल संकट से निबटने के लिये मिला। 31.05.2008 तक इस फिल्टे्रशन प्लांट के नवीनीकरण हेतु 6 करोड़ 42 लाख 50 हजार रू. व्यय किये जा चुके हैं तथा 25.10.2008 तक इसका कार्य पूर्ण हो जाना प्रस्तावित है।

परियोजना के तहत चल रहे पैकेज क्र. डब्ल्यू.एस. 03 में लीक परीक्षण कार्य हेतु तीन बार बुलाई गई निविदाओं में अत्यधिक रेट आने के कारण अभी तक कार्य प्रांरभ नहीं हो पाया है इस विषय में विशेषज्ञों से परामर्श गतिशील है।

पैकेज क्र. 04 में जल सप्लाई हेतु डाली गई 18 कि0मी0 लम्बाई की लाईन डाली जाना थी किन्तु अभी तक 7 कि0मी0 लम्बाई की लाईन डाली गई है। डाली गई लाईन में पाईप के नीचे मिट्टी के भराव न होने पर महापौर द्वारा अधिकारियों की खिंचाई की गई। प्रभारी द्वारा बताया गया कि कम्पनी द्वारा किये गये कॉन्टे्रक्ट में आवश्यकतानुसार मिट्टी का भराव करने का अनुबंध है। जहां-जहां मिट्टी भराव की आवश्यकता होगी वहां पर मिट्टी डाली जावेगी।

निगमायुक्त द्वारा निर्देश दिये गये कि डाले जा रहे पाईपों में पर्याप्त मात्रा में मिट्टी का भराव किया जाये ताकि हुडको योजना अंतर्गत निर्मित सड़कों पर भराव कम होने की दशा में विपरीत स्थितियां निर्मित न हो। महापौर तथा निगमायुक्त द्वारा अधिकारियों को आगाह किया गया कि उक्त प्रोजेक्ट जुलाई माह तक पूर्ण हो जाना था किन्तु कार्य की गति को देखते हुये उक्त प्रोजेक्ट अगस्त माह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करें।

निगमायुक्त द्वारा यह भी निर्देश दिये गये कि जिन क्षेत्रों में पाईप लाईन डाल दी गई है कि उनमें मिट्टी का भराव यदि 7 दिन में ठेकेदार द्वारा नहीं किया जाता है तो उसके लिये पृथक से टेण्डर आंमत्रित कर मिट्टी का भराव कर संबंधित ठेकेदार के बिल से राशि काटकर भुगतान किया जावे। हर हाल में रोड़ निर्माण का कार्य अगस्त तक पूर्ण किया जाना है इसलिये मिट्टी भराव की कार्यवाही सात दिवस में पूर्ण करें । बैठक के दौरान यह भी निर्देश दिये गये कि प्रोजेक्ट उदय के तहत विभिन्न पैकेजों में कार्यरत टी.सी.ई. कम्पनी के स्टाफ अनुबंध के अनुसार कितना होना चाहिये तथा योग्यता के अनुरूप स्टाफ सप्लाई किया जा रहा है अथवा नहीं, इस बात का परीक्षण कर कार्यरत स्टाफ की हाजिरी निगम अधिकारियों के माध्यम से ली जावेगी।

महापौर विवेक नारायण शेजवलकर द्वारा शिन्दे की छावनी, रामदास घाटी, रामबाग कॉलोनी की सामने प्रोजेक्ट उदय के तहत डाली जाने वाली पाईप लाईन के बाद खोदी गई सड़क को तत्काल मरम्मत करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये ।

निगमायुक्त द्वारा ठेकेदार से बूस्टर पम्पिंग स्टेशन की डिजायन प्राप्त नहीं होने पर ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिये गये तथा स्टाफ की कमी के कारण प्रभावित होने वाले कार्य के लिये मुताबिक अनुबंध राशि काटने के निर्देश भी निगमायुक्त द्वारा दिये गये।

पैकेज क्र. 11 के अंतर्गत तिघरा पर स्थापित होने वाले 45 एम.एल.डी. के नये जल शोधन संयंत्र के कार्य को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिये गये। इस संयंत्र के विषय में अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि उक्त पैकेज का कार्य फरवरी 2009 तक पूर्ण कर लिया जावेगा।

पैकेज क्र. डब्ल्यू.एस. 12 के तहत तिघरा से गुप्तेश्वर तक पाईप लाईन डाली जानी थी। सितम्बर 2008 तक उक्त कार्य पूर्ण होना है। वांछित डाया के पाईप उपलब्ध न हो पाने के कारण कार्य में विलंब हो रहा है।

महापौर द्वारा प्रोजेक्ट उदय के तहत कार्य कर रहे विभिन्न कम्पनियों को निर्देशित किया गया कि कार्य के दौरान पी.एच.ई., सीवर इत्यादि की पाईप लाईनें यदि टूट जाती है तो उसकी सम्पूर्ण मरम्मत निगम के इंजीनियरों के देख-रेख में संबंधित ठेकेदार द्वारा करनी होगी। निगमायुक्त एवं महापौर विवेक नारायण शेजवलकर द्वारा प्रोजेक्ट उदय में कार्य कर रही       टी.ई.सी. कम्पनी के इंजीनियरों तथा विशेषज्ञों को निर्देश दिये कि उनके द्वारा किये गये कार्यों का आगामी माह में पुन: परीक्षण किया जावेगा। यदि कार्य में संतोषजनक प्रगति नहीं पाई गई तो मुताबिक अनुबंध ठेके के विरूद्व कार्यवाही की जावेगी।

आज की समीक्षा बैठक में अपर आयुक्त राजेश बाथम, परियोजना अधिकारी प्रोजेक्ट उदय के.के. श्रीवास्तव, परियोजना इंजीनियर आर.के. शुक्ला, बलवीर सिंह सिकरवार, टी.सी.ई. कम्पनी के कन्सलटेंट पीयूष कुमार, जलकार्य प्रभारी दत्तात्रेय भालेराव उपस्थित थे ।

 

विभिन्न स्थानों से स्थाई व अस्थाई अतिक्रमण हटाये गये

विभिन्न स्थानों से स्थाई व अस्थाई अतिक्रमण हटाये गये

ग्वालियर दिनांक 01 जुलाई 2008- अपर आयुक्त द्वारा दिये गये निर्देशानुसार सहायक आयुक्त गुलाबराव काले के निर्देशन में शिवशक्ति आइस फैक्ट्री स्थित सागरताल रोड का नल कनेक्शन, उपयंत्री दीपक उफाले की उपस्थिति एवं निशानदेही में कटवाया गया। उपयंत्री सुधीर शर्मा स्थल पर उपस्थित रहे।

       उपयंत्री केशव सिंह चौहान क्षेत्र क्र. 3 के निर्देशानुसार रसूलाबाद रोड, डॉ. सिंह की गली में ज्ञान सिंह लोधी द्वारा बिना स्वीकृति बाउण्ड्री का निर्माण किया जा रहा था, स्थल पर जाकर कार्य बंद कराया गया तथा फावड़ा, तसला जप्त कर लाया गया। हजीरा चौराहा मुख्य मार्ग पर हाथ ठेले वालों को सहायक आयुक्त गुलाबराव काले के साथ हटाने की कार्यवाही हेतु पहुँचे उन्हें अंदर तीन दिवस हॉकर्स जोन में ठेले लगाने के निर्देश दिये गये। इसके पश्चात मदाखलत दस्ते द्वारा जप्ती कार्यवाही की जावेगी।

       यूनिवर्सिटी रोड, गांधी रोड, ठाटीपुर रोड, कुम्हरपुरा रोड, बारादरी चौराहा, 70 चौराहा, दुग्ध डेयरी रोड, गोले का मंदिर, मेला रोड, स्टेशन बजरिया, बस स्टेण्ड, फूलबाग आदि क्षेत्रों से अस्थाई अतिक्रमण हटवाये गये एवं ठेले वालों को हॉकर्स जोन भिजवाया गया। लश्कर क्षेत्र में नदी गेट, इंदरगंज, दाल बाजार, नया बाजार, कमलाराजा हॉस्पीटल, के.आर.जी. कॉलेज, कम्पू, आमखो, मॉडरे की माता चौराहा, कटोराताल, अचलेश्वर चौराहे तक अस्थाई अतिक्रमण हटवाये गये तथा कम्पू रोड पर लगे ठेलों को हॉकर्स जोन भिजवाया गया। इसके पश्चात रामस्वरूप जैन नाका इमली एवं श्री गुप्ता निवासी- कम्पू पुल के पास अवैध निर्माण कार्य बंद कराया गया। पुराना हाईकोर्ट स्थित न्यायालयीन परिसर के अंदर शिकायत के आधार पर कुत्ते पकड़वाए गये तथा लक्ष्मणपुरा से एक पागल कुत्ते को पकड़वाया गया।

       आज की कार्यवाही में मदाखलत अधिकारी सत्यपाल सिंह चौहान, दिग्विजय सिंह जादौन, सहायक निरीक्षक अजय सक्सैना, राधेश्याम शर्मा, सुरेश शर्मा, श्यामसुंदर शर्मा एवं विजय माहौर उपस्थित रहे।

 

निगमायुक्त द्वारा हुडको के सहयोग से बनने वाली सड़को का निरीक्षण किया

निगमायुक्त द्वारा हुडको के सहयोग से बनने वाली सड़को का निरीक्षण किया

ग्वालियर दिनांक 01 जुलाई 2008-  आयुक्त नगर निगम ग्वालियर डॉ. पवन शर्मा द्वारा आज नगर निगम, ग्वालियर द्वारा हुड़कों से प्राप्त ऋण से गतिशील सड़कों के निर्माण कार्य का अवलोकन किया गया। नगर निगम के जनकार्य विभाग के अमले के साथ आज निगमायुक्त हुरावली, चार शहर का नाका, गोले का मंदिर, हनुमान टॉकीज तिराहा से एस.ए.एफ होते हुये के.आर.जी कालेज तक निर्माणाधीन सड़क का निरीक्षण करने गये। निरीक्षण के दौरान सडक निर्माण एवं चौडीकरण कार्य की प्रगति का जायजा लिया गया तथा कार्य कर रहे ठेकेदारों तथा अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये ।

       निरीक्षण के दौरान कार्यपालनयंत्री चतुर सिंह यादव को गतिशील कार्य में बाधक विघुत पोलो को स्थानांतरित करने की निर्देश दिये साथ ही सागरताल रोड पर चल रहे प्रोजेक्ट उदय के कार्य में बिछाये पाइपों के गडडों के कारण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए प्रोजेक्ट प्रभारी के.के श्रीवास्तव को सागर ताल रोड़ पर तत्काल पाइप डाल कर गड्डे भरने के निर्देश दिये गये। ग्वालियर में 29 जुलाई को प्रस्तावित इनवेस्टर्स मीट के पूर्व गिट्टी कुटाई का कार्य पूर्ण करने के निर्देष दिये तथा मार्ग की प्रस्ताावित चौडाई में बाधक अतिक्रमण को हटाने के भी निर्देष दिये गये।

भ्रमण के समय अपर आयुक्त सुरेश शर्मा, अधीक्षणयंत्री चतुर सिंह यादव, कार्यपालन यंत्री दिनेश अग्रवाल एवं सहायकयंत्री प्रेमकुमार पचौरी, सुशील कटारे महेश भार्गव आदि उपस्थित थे ।

 

बुधवार, 2 जुलाई 2008

सूचना आयोग ने मुरैना न्‍यायालय को आवेदक को 15 दिन में सूचनायें उपलब्‍ध कराने के आदेश दिये

सूचना का अधिकार में सूचनायें न देने पर मुरैना न्‍यायालय के विरूद्ध 25 हजार के जुर्माने की कार्यवाही प्रारंभ

खास रपट नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

सूचना आयोग ने मुरैना न्‍यायालय को आवेदक को 15 दिन में सूचनायें उपलब्‍ध कराने के आदेश दिये

आयोग के निर्देश पर मिली आवेदक को सूचनायें, आयोग की लताड़ के बाद अब अधिनियम की धारा 4 का भी पालन करेगा मुरैना न्‍यायालय

मुरैना 2 जुलाई 08, अंतत: लड़ते लड़ते आवेदक की विजय हुयी । हालांकि मुकाबला टेढ़ा था कठिन था, और किस्‍सा जल में रहकर मगर से वैर करने वाला था, लेकिन लड़ाई अधिकारों को पाने और हक की थी, सत्‍य की शक्ति और हौसलों की सवारी पर चढ़कर गरीब तथा लाचार होने के बाद भी वह जंग जीत गया ।

एक चींटीं जब किसी हाथी को चुनौती देती है, तो उपहास का पात्र बन जाती है, वह भी बन गया था लेकिन चींटीं ने आखिर हाथी को पछाड़ दिया । और भारत के उन हजारों आसधारीयों को आशा और हौसलों की एक किरण दे दी जो सूचना का अधिकार पाने के लिये आज तक संघर्षरत हैं ।

मध्‍यप्रदेश के सूचना आयोग ने न्‍याय व सच्‍चाई का साथ देते हुये थोड़ी सी हिम्‍मत दिखाई है इसे कुछ हद तक शुभ ही माना जा सकता है । ऐसे मिसाली (माइल स्‍टोन्‍ड) फैसले आयोग थोड़ी सी हिम्‍मत जुटाकर सुनाता रहे तो लोगों में सूचना का अधिकार के प्रति पुन: विश्र्वास जागेगा और लगभग विस्‍मृत किये जा चुके इस जन अधिकार को पुनर्जीवन प्राप्‍त होगा । मेरी नजर यह प्रतीकात्‍मक अलार्म बनना चाहिये और मीडिया में ऐसे निर्णयों को खास तवज्‍जो दी जाना चाहिये ।

मुरैना जिला की छोटी सी तहसील कैलारस में वकालत करने वाले एडवोकेट लज्‍जाराम पाण्‍डेय की मध्‍यप्रदेश के राज्‍य सूचना आयोग को की गयी द्वितीय अपील में यह निर्णय आया है । आयोग ने अपने ताजे निर्णय में मुरैना जिला न्‍यायालय को 15 दिवस के भीतर सूचनायें उपलब्‍ध कराने के सख्‍त आदेश के साथ ही जिला न्‍यायालय मुरैना के लोकसूचना अधिकारी एस.आर.अनगरे के खिलाफ 25 हजार रूपये की जुर्माना वसूलने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है ।

कैलारस के एडवोकेट लज्‍जाराम पाण्‍डेय द्वारा 4 जनवरी 2007 को सूचनायें चाहे जाने के लिये अपना आवेदन मुरैना जिला न्‍यायालय के लोकसूचना अधिकारी एस.आर.अनगरे के समक्ष प्रस्‍तुत किया, अनगरे द्वारा अपने लोकसूचना अधिकारी होने सम्‍बन्‍धी तथ्‍य से इंकार किया जिस पर आवेदक लज्‍जाराम द्वारा मुरैना के तत्‍कालीन जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश बी.डी.राठी के समक्ष अपना आवेदन प्रस्‍तुत किया, बी.डी. राठी उस समय जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश होने के साथ ही सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मध्‍यप्रदेश के माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा अपीलीय अधिकारी नियुक्‍त किये गये थे, इसी आदेश के तहत माननीय उच्‍च न्‍यायालय म.प्र. ने न्‍यायालय अधीक्षक एस.आर. अनगरे को मुरैना जिला न्‍यायालय का लोकसूचना अधिकारी नियुक्‍त किया था । लेकिन आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय द्वारा सूचना का अधिकार के तहत आवेदन प्रस्‍तुत किया तो दोनों ही लोगों ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अपनी नियुक्तियों को जो कि मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय द्वारा की गयी, दरकिनार करते हुये, अपीलीय अधिकारी बी.डी.राठी ने खुद को लोकसूचना अधिकारी के रूप में प्रकट कर आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय से उसका आवेदन ग्रहण कर लिया जिसे सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कार्यवाही करने और पंजीबद्ध करने के बजाय नियमित न्‍यायालयीन कार्यवाही में लेकर आवेदन क्रमांक 53 पर पंजीकृत कर लिया, इसके अलावा एक तमाशा और भी किया आवेदक द्वारा अपने आवेदन के साथ अधिनियम के तहत आवेदन शुल्‍क के रूप में मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित 10 रूपये का नान जूडिशियल स्‍टाम्‍प भी संलग्‍न किया था इसके अतिरिक्‍त आवेदक से 10 रूपये अतिरिक्‍त और भी दोबारा आवेदन के साथ ही शुल्‍क के रूप में वसूल लिये जिसकी रसीद क्रमांक 94/1734 काट दी गयी ।

उपरोक्‍त बातों के अलावा और भी अधिक गंभीर बात थी कि आवेदक ने बी.डी.राठी पर नोटरी नियुक्ति के पैनल भेजे जाने में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाते हुये, बी.डी.राठी द्वारा संपादित कार्यालयीन कार्यवाहीयों के दस्‍तावेज मांगे गये थे । और खुद के खिलाफ आरोपग्रस्‍त सूचना के अधिकार के आवेदन को न केवल स्‍वयं ही अनाधिकृत रूप से ग्रहण किया बल्कि उसकी सुनवाई भी कर डाली और निर्णय भी सुना डाला ।

जब आरोपी ही जज हो तो फैसला क्‍या होगा, वही हुआ आवेदक के आवेदन को अधिनियम में प्रावधानित कोई भी कार्यवाही किये बगैर सीधे ही 10 एवं 11 जनवरी (दो भिन्‍न आदेश) 2007 को खारिजी आदेश जारी कर आवेदक को सूचना दिये जाने से अधिनियम की धारा 8(1) (जे) की शक्ति की आड़ लेकर खारिज कर दिया ।

आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय के इस आवेदन के खारिज होने के बाद बड़ी विचित्र स्थिति उत्‍पन्‍न हो गयी । आवेदक के आवेदन को लोकसूचना अधिकारी के बजाय अपीलीय अधिकारी ने ग्रहण कर फैसला सुना दिया था, सो अब प्रश्‍न यह था कि आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय अधिनियम की धारा 19 के तहत अपनी पहली अपील कहॉं व किसे प्रस्‍तुत करे । ऐसी स्थिति में आवेदक ने अधिनियम की धारा 19 को पालन करते हुये अपनी पहली अपील मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय के ग्‍वालियर व जबलपुर के अपीलीय अधिकारीयों तथा स्‍वयं पुन: बी.डी.राठी को अपीलीय अधिकारी के रूप में प्रस्‍तुत कर दी साथ ही एक प्रति मध्‍यप्रदेश के सूचना आयोग को भी भेज दी ।

विचित्र स्थिति निर्मित हो जाने से, उच्‍च न्‍यायालय ने बी.डी.राठी को नियमित स्‍थानान्‍तरण प्रक्रिया के तहत मुरैना से अन्‍यत्र स्‍थानान्‍तरित कर दिया । लेकिन तकनीकी विसंगति व त्रुटि प्रकरण में आ जाने से प्रथम अपील अनिराकृत ही रही । तब आवेदक ने मध्‍यप्रदेश के सूचना आयोग अपनी द्वितीय अपील प्रस्‍तुत की । इस द्वितीय अपील को म.प्र. के राज्‍य सूचना आयोग द्वारा क्रमांक ए-0195 पर पंजीकृत कर लिया और सुनवाई प्रारंभ की ।

लगभग एक साल बाद आयोग ने आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय की अपील का निराकरण करते हुये मुरैना जिला न्‍यायालय के खिलाफ अपना फैसला 10 अप्रेल 2008 को सुनाया और आवेदक को 15 दिन के भीतर सूचनायें उपलब्‍ध कराने के आदेश दिये । और मुरैना जिला न्‍यायालय के लोकसूचना अधिकारी के खिलाफ 25 हजार रूपये जुर्माना वसूलने की कार्यवाही अधिनियम की धारा 20(1) के तहत प्रारंभ कर दी ।

आयोग के फैसले के लगभग 50 दिन बाद मुरैना जिला न्‍यायालय ने आवेदक को सूचनायें उपलब्‍ध करवा दीं । लेकिन आवेदक द्वारा अपने आवेदन में मुरैना जिला न्‍यायालय द्वारा अधिनियम की धारा 4 के पालन किये जाने एवं इण्‍टरनेट पर जानकारीयां उपलब्‍ध कराये जाने सम्‍बन्‍धी सवाल पर हैरत अंगेज उत्‍तर देते हुये सारा दोष म.प्र.उच्‍च न्‍यायालय के ऊपर पटक दिया है और कहा है कि म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय ने इस धारा का पालन करने के आदेश 24 मई 2008 को दिये जाना बताया गया है ।

आवेदक लज्‍जाराम पाण्‍डेय को सूचनायें प्राप्‍त हुयीं इस लम्‍बी लड़ाई से अवश्‍य ही अन्‍य लोगों को प्रेरणा प्राप्‍त होगी । उल्‍लेखनीय है कि लज्‍जाराम पाण्‍डेय गरीब अभिभाषक है, इसके बावजूद वह लड़ा और जीता ।  

मंगलवार, 1 जुलाई 2008

मुरैना डायरी - चम्‍बल की कानून व्‍यवस्‍था –भाग- 1, मुरैना में लूट, चोरी, हत्‍याओं और अपहरणों का ताबड़तोड़ सिलसिला, पुख्‍ता सूचनाओं के बावजूद अपराधीयों को नहीं पकड़ती पुलिस -1

मुरैना में लूट, चोरी, हत्‍याओं और अपहरणों का ताबड़तोड़ सिलसिला, पुख्‍ता सूचनाओं के बावजूद अपराधीयों को नहीं पकड़ती पुलिस -1

नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

मुरैना डायरी - चम्‍बल की कानून व्‍यवस्‍था भाग- 1

किश्‍तबद्ध रिपोर्ट ऑंखों देखी, भुक्‍त भोगी- नो कायमी नो चालान

मजे की बातें पते की बातें- 100 प्रतिशत सच

 मय सबूत

टीप इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया जाने से पहले सारी सच्‍चाई का स्‍पष्‍ट ध्‍यान रखा गया है साथ ही सावधानी बरती गयी है कि , हम यह जानते हैं इसके प्रकाशन का अंजाम क्‍या हो सकता है, इसके लिये हमने अपने स्‍तर पर पूर्ण व्‍यवस्‍था की है । और हम अपने सूत्र वाक्‍य '' यदा यदा हि धर्मस्‍य ग्‍लानिर्भवति भारत...'' तथा ''स्‍वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:'' एवं '' धर्म युक्‍त युद्ध से बढ़कर क्षत्रिय के लिये अन्‍य कोई कल्‍याण कारक कर्तव्‍य नहीं है , को स्‍मरण व आधार बना कर इस धर्म युद्ध व सत्‍य संग्राम का प्रारंभ करते हैं । ''यत्र योगेश्‍वर कृष्‍णो यत्र पार्थो: धनुर्धर: । तत्र श्री: र्विजयोर्भूतिध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ।।   

·          पॉंच साल में एक भी चोर नहीं पकड़ पाई मुरैना पुलिस (सबूत हमारे पास है)

·          हाईकोर्ट के आदेश से दर्ज मामलों एवं पुलिस विवेचना में सिद्ध पाये गये अपराधों में छह साल में एक भी अपराधी नहीं गिरफ्तार कर पायी न चालान पेश कर पायी मुरैना पुलिस, फर्जी खात्‍मा रिपोर्ट भी लगा देती है पुलिस

·          थाने बने व्‍यावसायिक परिसर और दलाली केन्‍द्र, नहीं दर्ज होतीं थानों में एफ.आई.आर., दिल बहलाने को गालिब ख्‍याल अच्‍छा बनकर रह गयी दण्‍ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154, 154(3) और इण्‍टरनेट से दर्ज रिपोर्टें

·          पुलिस की नौकरी बनाम अपराध करने का खुला लायसेन्‍स और कमाई का बेस्‍ट जरिया, महज राजनेताओं और अपराधियों के नौकर और दलाल बन कर रह गयी है पुलिस

·          नवाचार प्रणाली और इण्‍टेलीजेन्‍सी क्राइम तथा सायबर क्राइम में शून्‍य बटा सन्‍नाटा है मुरैना पुलिस

·          दिनदहाड़े सुबह शाम और रात हर घड़ी घटित हुये अपराध, दिन के सोलह प्रहर चौबीस घण्‍टे जनजीवन असुरक्षित

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·          पुलिसिया बदला, फर्जी मुठभेड़ों, फर्जी केसों में फंसाने में अव्‍वल एवं माहिर है मुरैना पुलिस

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·          दण्‍ड प्रक्रिया संहिता एवं उसके संशोधनों का , पुलिस एक्‍ट (संशोधित) का ज्ञान शून्‍य बटा सन्‍नाटा, खुलेआम सरे थाने रात दिन टूटता है कानून 

·          डकैत खुल कर होते हैं डकैत, मगर पुलिस है लायसेन्‍स्‍ड डकैत, चोर, ठग, और जेबकट   

 

मुरैना 1 जुलाई 08, शहर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों ताबड़तोड़ वारदातों का सिलसिला जारी है । मजे की बात ये है कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठकर महज तमाशाई बन कर रह गयी है । और मलाल ये है कि घट रहे अपराधों में से 70 फीसदी मामलों में पुलिस रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करती । सबसे अधिक बुरे हालात सिटी कोतवाली मुरैना के क्षेत्र के हैं । हमने इस रिपोर्ताज के लिये पुखता सबूत जुटाये हैं ।  

अभी इस साल की होली के आसपास से शुरू हुआ वारदातों का सिलसिला खत्‍म होने के बजाय दिनोंदिन रफ्तार पकड़ता जा रहा है । सबसे अधिक बुरे हालात मई जून के महीने में रहे । जिसमें चोरी, लूट, अपहरण और हत्‍याओं की आंधी सी चल पड़ी ।

हमारे सूत्रों से संकलित जानकारी के मुताबिक महज मई जून के महीने में समूचे जिले को छोड़कर केवल शहर मुरैना में 7 अपहरण, 71 लूट, 13 हत्‍यायें और लगभग ढाई सैकड़ा चोरीयां हुयीं । अफसोस जनक तथ्‍य यह है कि पुलिस ने 70 फीसदी मामलों की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की । सर्वाधिक घटनायें मोबाइल लूटने, चोरी किये जाने और छीनने की घटनायें हुयीं केवल मई जून में मुरैना शहर से 1700 मोबाइल छीने, लूटे और चोरी किये गये । पुलिस ने अधिकांश या लगभग सभी मामलों में (अपवाद स्‍वरूप कुछ मामले छोड़ दीजिये) रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कीं ।

मुरैना को भयमुक्‍त व आतंकमुक्‍त करने का नारा और वायदा देकर चुनाव जीतने वाले मध्‍यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री रूस्‍तम सिंह स्‍थानीय मुरैना विधानसभा से ही विधायक हैं । उनके मुरैना जिला को भय व आतंक से मुक्‍त करने की बात तो छोड़ कर फेंक ही दीजिये उनके खुद के विधानसभा क्षेत्र विशेषकर शहर मुरैना में सबसे ज्‍यादा भय व आतंक का कहर इस समय व्‍याप्‍त है ।

मुरैना शहर तो इन दिनों अपराधियों की राजधानी या यूं कहिये कि स्‍वर्ग है । जहॉं आप शौक से कहीं भी कभी भी वारदातें करिये, मजे से रहिये, खुले आम घूमिये । पुलिस आपको न तंग करेगी न परेशान बल्कि फुल प्रोटेक्‍शन मिलेगा और अगले क्‍लास या लेवल तक उन्‍नत वारदातें सीखने के तौर तरीके भी जानने को मिलेंगें ।

हमारी रिसर्च के मुताबिक मध्‍यप्रदेश तो क्‍या भारत के किसी भी पुलिस वाले या उसके रिश्‍तेदार को यदि मोबाइल फोन की जरूरत है तो उसका कोई परिचित मुरैना पुलिस में होना चाहिये । आप मुरैना पुलिस के अदने से सिपाही से लेकर बड़े अफसर तक से फ्री के मोबाइल आसानी से प्राप्‍त कर सकते हैं । इन मोबाइल सेटों की कीमत हजार ग्‍यारह सौ रूपये से लेकर तीस चालीस हजार रूपये तक होती है लेकिन सब फ्री में या चार पॉंच सौ रूपये में आपको मुरैना से उपलब्‍ध हो जाते हैं ।

मुरैना के केवल स्‍थानीय वाशिन्‍दों के ही मोबाइल छीने, लूटे या चोरी जाते हों ऐसी बात नहीं है । बाहर से आने वाले लोगों के सड़क चलते, बस से उतरते ट्रेन में चढ़ते मोबाइल छीन, लूट या चोरी कर लिये जाते हैं ।

कौन छीनता लूटता या चोरी करता है मोबाइल

मोबाइल छीनने, लूटने और चोरी करने वालों के कई जुदा रैकेटस हैं लेकिन आश्‍चर्य जनक तथ्‍य यह है कि इन सभी की किशोर वय या नवयुवा अवस्‍था है जो कि 13-14 साल की उम्र से लेकर करीब 27 -28 साल के दरम्‍यान ही हैं । सबके लगभग जुदा ग्रुप हैं । ये लोग रास्‍ता चलते मोबाइल पर बात कर रहे लोगों से या उनके कपड़ो की जेबों में से पलक झपकते या कुछ ही सेकण्‍डों के भीतर मोबाइल उड़ा देते हैं, आदमी तब तक सारा माजरा समझे तब तक मोटर साइकिल या बाइक से उड़नछू हो जाते हैं । घरों में चोरी होने की 60-65 फीसदी वारदातों में मोबाइल अवश्‍य ही चुराये गये । घरों में रात को या दिन को कूदने या गृह भेदन के मामलों में इन किशोरों के नाम आना निसंदेह भारत के भविष्‍य के लिये चिन्‍ताजनक है । जहॉं इन किशोरों को छात्र होने का कानूनी लाभ और सहानुभूति मिलती है वहीं किशोर वर्ग में शराब, जुआ, चोरी, सट्टा और लूट की बेतहाशा रूचि वृद्धि कुछ खतरनाक संकेत भी देती है । समझने वाले समझ सकते हैं कि इन कुप्रवृत्तियों के पीछे क्‍या कारण और मकसद हैं ।

मैंने लम्‍बा समय अपराधीयों के रिसर्च और तरीकों पर गुजारा है, मुझे हैरत है कि कभी बम्‍बई या मुम्‍बई में घटित होने वाली क्राइम प्रणाली चम्‍बल में आज आम हो गयी है, जबकि कुछ समय पहले यहॉं की अपराध प्रणाली सर्वथा भिन्‍न थी । आज किशोरों को लाभ, लोभ, ऐश, आराम और शराब, पैसे तथा नाम रूतबा बुलन्‍दी के लिये आसानी से लोग हायर कर लेते हैं । जिसे दूसरी भाषा में गुण्‍डे पालना या सुपारी देना कहा जाता है । चम्‍बल का हर अदना या बड़ा नेता इन किशोर गुण्‍डों को हायर कर रहा है यह बात ठीक है लेकिन समाज का व्‍यवसायी वर्ग या प्रतिष्ठित वर्ग भी इन्‍हें हायर करने में लगा है, पुलिस ने व्‍यावसायिक तौर पर एवं बदला कार्यवाही के लिये इन्‍हें हायर करना शुरू कर दिया है यह चिन्‍ताजनक है । कई लोगों को नहीं मालुम होगा कि उनकी संतान गलत संगत में है या हायर्ड है लेकिन बहुतेरे लोगों को बाकायदा यह पता होता है कि उनकी संतान हायर्ड है और कई कारणों से वे इस हायरिंग को कन्‍टीन्‍यू रहने देते हैं । मसलन एक गुण्‍डे के आतंक से बचने का अच्‍छा उपाय है दूसरे गुण्‍डे की शरण में बने रहो, या उनकी किशोर संतान उन्‍हें मरने या आत्‍महत्‍या करने की धमकियां देतीं हैं, या आत्‍महत्‍या के प्रयास तक एकाध बार करके दिखा देते हैं , जिससे घर परिवार के लोग भयवश मौन हो जाते हैं । यह सतत प्रक्रिया है । कभी कभी घर वाले खुद ही लोभ लालच में फंस कर उनकी संतान के आपराधिक लाभों में भागीदार बन कर इलेक्‍ट्रानिक सामानों और कई चीजों व रूपये पैसे से समृद्ध होने लगते हैं । हालांकि कई कारण इस सम्‍बन्‍ध में प्रखर हैं किन्‍तु हर कारण इन किशोर युवाओं को आपराधिक दलदल में प्रविष्‍ट होने और सतत रहने की ओर ही प्रेरित करता है । सबसे अधिक खतरनाक तथ्‍य यह है कि केवल बालक किशोर युवा ही नहीं वरन बालिकायें किशोर नवयुवतियां भी इब इन गिरोहों में शामिल हो गयीं हैं । पिछले दिनों कई मामलों में मुरैना शहर में इस तरह की लड़कियों को पकड़ा गया ।  

 

क्रमश : जारी अगले अंक में .....      

 

ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत- महामहिम राष्ट्रपति

ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत- महामहिम राष्ट्रपति

 

ग्वालियर 30 जून 08 । महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने कहा कि असली भारत गांवों में बसता है । ग्रामों को देश की मुख्य धारा से जोड़ने की आज महती जरूरत है । उन्होंने ग्रामों के समग्र विकास के लिये ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान को बढ़ावा देने पर जोर दिया और कहा कि देश के इंजीनियर ग्रामीण क्षेत्रों में जायें और वहां की आवश्यकताओं को समझें, इससे वे ग्रामों की समस्याओं से तो रूबरू होंगें ही साथ ही सामाजिक चेतना पैदा करने में मददगार साबित हो सकेंगें ।  श्रीमती पाटिल आज ग्वालियर में माधव प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान के स्वर्ण जयंती के समापन समारोह को संबोधित कर रही थी । इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा तैयार किये गये डाक टिकिट को जारी किया । समारोह की अध्यक्षता केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री एवं संस्थान और सिंधिया इंजीनियरिंग सोसायटी के अध्यक्ष श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की । विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के खनिज, संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा, मंचासीन थे । इस अवसर पर दर्शकदीर्घा में प्रदेश के जलसंसाधन एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री अनूप मिश्रा, वन एवं राजस्व राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह प्रमुख रूप से उपस्थित थे ।

       महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने सरस्वती की प्रतिमा और ग्वालियर के तत्कालीन महाराज श्री जीवाजी राव सिंधिया और श्री माधवराव सिंधिया के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । उन्होंने ग्वालियर के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक वैभव का उल्लेख करते हुये संस्थान द्वारा दी जा रही तकनीकी शिक्षा की प्रशंसा की और शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे छात्रों को ऐसी शिक्षा दें जिससे वे राष्ट्र की उन्नति के लिये समर्पित होकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि देश में 39 प्रतिशत स्नातक इंजीनियरों को नौकरी मिल पा रही है और अनेक औद्योगिक संस्थानों को अच्छे इंजीनियर नहीं मिल पा रहे हैं । देश में 3 हजार 500 इंजीनियरिंग कालेज हैं, जहां से प्रतिवर्ष साढ़े चार लाख स्नातक इंजीनियर पढ़ लिखकर निकलते है । इसके बावजूद भी देश में प्रति वर्ष करीब 70 हजार सिविल इंजीनियरों की जरूरत महसूस की जा रही है । यह स्थिति बेहद विसंगतिपूर्ण है। इस कमी को दूर करने के लिये शैक्षणिक संस्थान अपनी प्रशिक्षण विधियों और पाठयक्रमों को उन्नत करें। प्रासंगिक पाठयक्रम के निर्माण में नये उद्योग  और अकादमिक संस्थाओं के बीच विचार विमर्श उपयोगी साबित हो सकता है ।

       महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के बाद स्कूल, कालेज सड़क,सिंचाई, कृषि, औद्योगिक संरचना का विकास आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है । फिर भी भविष्य में इस क्षेत्र में हमें अभी और अधिक काम करने की जरूरत है । उन्होंने दो महत्वपूर्ण बिन्दुओं की तरफ ध्यान आकर्षित करते हुये कहा कि इंजीनियरिंग संस्थान भविष्य की चुनौतियों का किस तरह से सामना करें और विद्यार्थी अपने आपको भविष्य के लिये किस तरह तैयार करें । इस पर विचार करने की जरूरत है । उन्होंने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिये एमआईटीएस की सराहना की और कहा कि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिये इस तरह के संस्थानों की जरूरत है । उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस संस्थान के अध्यक्ष और केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री श्री सिंधिया के निर्देशन में देश में तकनीकी शिक्षा का समुचित विकास एवं विस्तार होगा । उन्होंने शिक्षा के साथ ही साथ खेल, संस्कृति आदि गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी वकालत की । इससे विद्यार्थी  शिक्षित और अनुशासित बनेंगें तथा शरीरिक रूप से मजबूत होंगें । उन्होंने बेहतर समाज के निर्माण के लिये समाज के सभी लोगों से सत्य, कर्म और धर्म का पालन करने का आव्हान किया ।

       कार्यक्रम के अध्यक्ष केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिक राज्यमंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी है । आर्यभट्ट ने विश्व को शून्य से परिचित कराया था । सात सौ वर्ष ईसा पूर्व भारत में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में तक्षशिला विश्व का पहला विश्वविद्यालय था, जिसमें उस समय लगभग साढ़े दस हजार विद्यार्थी थे । उन्होंने समाज में ज्ञान आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की जरूरत प्रतिपादित की और कहा कि यह संस्था राष्ट्र के निर्माण और ज्ञान के प्रसार में अपनी सशक्त भूमिका निभाती रहेगी और देश के लिये कुशल इंजीनियर तैयार करती रहेगी ।

       कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि खनिज, संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि देश में शिक्षा का स्तर सुधरा है , जिसके कारण प्रतिभाओं का पलायन रूका है । उन्होंने कहा कि एमआईटीएस जैसी संस्थायें प्रतिभाओं को आगे लाने और उनका पलायन रोकने का प्रयास कर रही हैं । उन्होंने कहा कि यह संस्था ग्वालियर के लिये ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश के लिये भी गौरव है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र लगातार  तरक्की कर रहा है और विश्व का सिरमौर बनने की दिशा में अग्रसर है । उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से महामहिम का अभिनंदन किया ।

       इस अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति ने संस्थान को अपनी उत्कृष्ट व उल्लेखनीय सेवायें देने के उपलक्ष्य में प्रो. डी पी चक्रवर्ती, प्रो. कांतिलाल देवजी मेहता, प्रो. पी एन विजयवर्गीय, मेजर जनरल पद्म श्री एस एन शर्मा, श्री राधे एस गुप्ता, डा. श्रेयांस कुमार जैन,श्री शिव एस अग्रवाल और श्री संजय एस दुबे को सम्मानित किया ।

       प्रारंभ में संस्थान के सचिव श्री रमेश अग्रवाल ने महामहिम का स्वागत किया और संस्थान के इतिहास और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला । श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अतिथियों को संस्थान की स्मारिका और स्मृति चिन्ह भेंट किये । अंत में सभी की उपस्थिति के लिये संस्थान के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के प्रभारी प्रो. वाय पी सिंह ने आभार व्यक्त किया ।

 

महामहिम राष्ट्रपति की अगवानी

महामहिम राष्ट्रपति की अगवानी

 

ग्वालियर 30 जून 08। महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल आज भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से प्रात: 10.55 बजे महाराजपुरा एयरबेस पर पधारी । उनके साथ प्रदेश के जनसंपर्क एवं संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा भी आए।

       विमानतल पर केन्द्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री, श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश के जलसंसाधन एवं जन शिकायत मंत्री श्री अनूप मिश्रा, वन राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने राष्ट्रपति की अगवानी की । इस अवसर पर ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री जगदीश शर्मा, नगर निगम के सभापति श्री बृजेन्द्र सिंह जादौन, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री कौशल शर्मा, पूर्व मंत्री श्री बालेन्दु शुक्ला, श्री राजेन्द्र सिंह, श्री भगवान सिंह यादव, एयर कमाडोर श्री दलजीत सिंह, संभागायुक्त      डा. कोमल सिंह, पुलिस महानिरीक्षक श्री देवेन्द्र सिंह सेंगर, कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक श्री व्ही.के. सूर्यवंशी सहित विभिन्न राजनैतिक एवं सामाजिक संगठनो के पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार गण उपस्थित थे।