शनिवार, 30 जून 2007

छात्रवृत्ति वितरण के दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें - कलेक्टर

छात्रवृत्ति वितरण के दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करें - कलेक्टर

ग्वालियर 29 जून 2007

       छात्रवृत्ति कार्य योजना का भली भांति अध्ययन कर आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को पात्रतानुसार निर्धारित समय- सीमा में छात्रवृत्ति वितरण सुनिश्चित करें । छात्रवृत्ति वितरण से जुड़े अधिकारी इसे गंभीरता से लें और आदिम जाति कल्याण विभाग के दिशा निर्देशों की अनदेखी नहीं करें । यह निर्देश कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने संबंधित अधिकारियों को दिए हैं ।

       जिले में छात्रवृत्ति वितरण को सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराने के लिए प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप केलेण्डर निर्धारित कर विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है । कलेक्टर ने निर्धारित कैलेण्डर के अनुसार छात्रवृत्ति वितरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं । जिले में छात्रवृत्ति आवेदन पत्र व अन्य सामग्री आदिम जाति कल्याण विभाग से नोडल अधिकारियों को गत 25 जून को प्रदाय की गई है ।

       अधिकृत अधिकारी द्वारा छात्रवृत्ति / फीस स्वीकृत किये जाने के लिए  नवीनीकरण की स्वीकृति देकर जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग को भेजने के लिए 30 जुलाई तक की तिथि निर्धारित की गई है ।  नवीन आवेदन पत्र स्वीकृत हेतु जिला संयोजक को भेजना 15 अगस्त तक व महाविद्यालयों / उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए 20 अगस्त तक की तिथि रखी गई है । छात्रवृत्ति वितरण एवं फीस भुगतान हेतु शिक्षण संस्थाओं को राशि प्रदाय करना  स्कूलों के लिए व महाविद्यालयों / उच्च शिक्षा संस्थानों सभी के लिए 30 अगस्त तक, छात्रवृत्ति / फीस भुगतान की अन्तिम तिथि 31 अक्टूबर, रखी गई है । अनुसूचित जाति, जनजाति पिछड़ा वर्ग की कक्षा 1 से 10 तक समस्त प्रकार की छात्रवृत्ति एक किश्त में 31 अक्टूबर 07 तक भुगतान करना आवश्यक है ।

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति कक्षा 11 से कॉलेज स्तर की समस्त प्रकार की 30 सितम्बर 2007 तक किया जाना आवश्यक है । (प्रथम किस्त में चार माह जून, जुलाई, अगस्त, सितम्बर तक की छात्रवृत्ति का भुगतान शामिल है) द्वितीय किस्त  किस्त में छ: माह अक्टूबर, नवम्बर, दिसम्बर , जनवरी, फरवरी, मार्च तक का भुग्तान शामिल है । इसका भुगतान 28 फरवरी 2008 तक किया जाना आवश्यक है ।

       छात्रवृत्ति कार्य निर्धारित समय- सीमा में सम्पन्न नहीं करने वाले दोषी अधिकारियो / संस्था प्रमुखों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की धारा 4 के तहत कार्यवाही करने के निर्देश है । इस धारा में अपने कर्तव्यों के पालन में जानबूझ कर उपेक्षा बरतने वाले लोक सेवकों को दण्डित करने का प्रावधान है ।

 

 

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