एक माह के अन्दर सभी आंगनबाड़ी भवन शासकीय भवनों में पहुँच जाये
आंगनबाड़ी के 48 भवनों में शौचालय बनाने के लिए राशि जारी
ग्वालियर 8 अगस्त 08 । कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने महिला बाल विकास के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक माह के अन्दर संचालित सभी आंगनबाड़ी भवन शासकीय भवनों में पहुँच जाये । शासकीय भवन उपलब्ध नहीं होने की दशा में भवन किराये पर लिए जावे । एक भी भवन सहायिका एवं आंगनबाड़ी कार्र्यकत्ता के घर में संचालित नहीं होना चाहिए । कलेक्टर श्री त्रिपाठी गुरूवार को म.प्र. स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संचार संस्थान में आयोजित महिला बाल विकास विभाग की संचालित योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे ।बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा0 श्रीमती अर्चना शिंगवेकर, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती सीमा शर्मा, चिकित्सक, एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के परियोजना अधिकारी सुपरवाइजरों सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे ।
बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि शतप्रतिशत आंगनबाड़ियों में शौचालय सुविधा उपलब्ध रहे इसके लिए शेष रहे 48 आंगनबाड़ी भवनों में शौचालय बनाने के लिए राशि जारी कर दी गई है । इन सभी 48 भवनों में शौचालय स्थापित हो जाये । कलेक्टर ने कहा शतप्रतिशत आगनबाड़ी निर्धारित समय पर नियमित खुले । उन्होनें कहा कि पोषण आहार सहित जो सुविधाएॅ आंगनबाड़ियों से दी जा रही है वे सुविधाएँ नियमित मिलती रहे । इसकी नियमित मानीटरिंग सरपंचों के साथ होती रहे । आंगनबाड़ियों में बच्चों की अनुपस्थिति पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने कहा कि आंगनबाड़ियों में 40 से 45 प्रतिशत ही बच्चों की उपस्थिति पाई जा रही है । उन्होनें कहा कि इस प्रतिशत को बढ़ाकर 75 प्रतिशत या इससे अधिक तक ले जाना चाहिए । इसके लिए सहायिका को घर घर से बच्चों से लाने के लिए तैनात किया जावे । उन्होनें कहा कि बच्चों को जितने अच्छे तरीके से प्रोत्साहित किया जायेगा उतनी ही लगन से बच्चे आंगनबाड़ियों में आयेगें । कलेक्टर ने सभी सुपरवाइजरों को आंगनबाड़ियों में प्री स्कूल व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए ।
10-10 आंगनबाड़ियों को मॉडल स्वरूप विकसित किया जावे
कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र से 10-10 आंगनबाड़ियों को आदर्श मॉडल स्वरूप में विकसित किया जावे । माडल स्वरूप के अर्न्तगत आंगनबाड़ी केन्द्रों पर शत प्रतिशत बच्चे गर्भवती महिलाएँ उपस्थित रहे । उन्हें प्रतिदिन नियमित पोषण आहार मिले । बच्चों को रचनात्मक कार्यो से जाड़ने के लिए विभिन्न चित्रकला, पेंटिंग, खेलकूद जैसे आयोजन होते रहे। प्रत्येक गर्भवती महिला का उचित नियमित चैकअप होता रहें और प्री स्कूल की व्यवस्था रहे ।
लाड़ली लक्ष्मी योजना में सभी पात्र बच्चियाँ लाभांवित हो
कलेक्टर श्री त्रिपाठी ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना मुख्यमंत्री जी की महत्वाकांशी योजना है इस योजना को केन्द्र शासन ने भी मान्य किया है ।
इस योजना में शत प्रतिशत पात्र बच्चियों को लाभ मिले इसके लिए सभी मैदानी अमला सुनिश्चित करे । कलेक्टर ने समीक्षा के दोरान कहा कि प्रतिमाह लाड़ली लक्ष्मी योजना में प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है ।उन्होनें मुख्य चिकित्सा अधिकारी से ली गई जानकारी के अनुसार बताया कि हर माह 12-13 सौ बच्चियॉ जन्म लेती है इनमें से एक अनुमान के तौर पर 3 -4 सौ बच्चियाँ गरीब परिवार की होती है । अत: प्रतिमाह 3-4 सौ बच्चियों का योजना में रजिस्ट्रेशन होना चाहिए । बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती सीमा शर्मा द्वारा इस योजना में किये गए संशोधन पर चर्चा करते हुए कहा कि अब जुड़वा बच्चियॉ होने पर उन्हें योजना का लाभ दिया जायेगा । बैठक में मुस्कान कार्यक्रम की अच्छी प्रगति के लिए धन्यवाद दिया गया। बैठक में अन्य योजनाओं की भी समीक्षा की गई ।
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