मत्स्य उत्पादन 2 टन से बढ़ाकर 5 टन प्रतिहेक्टर लाना है - श्री मिश्रा
मछुवारों का दस दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ
ग्वालियर 6 अगस्त 08 । देश में मत्स्य उत्पादन में वृध्दि तथा मछुवारों के जीवनस्तर में उन्नति लाने के लिये केन्द्र एवं राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से प्रशिक्षण श्रृंखला चलाई जा रही है। आज ग्वालियर के कृषि विकास केन्द्र में ऐसी दस दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डा. के.पी.एस.मलिक ने किया । उन्होंने संतुलित आहार की दृष्टि से भोजन में मछली के उपयोग का महत्व निरूपित करते हुये मछुआरों से राष्ट्रीय मत्स्यकी विकास बोर्ड द्वारा प्रायोजित इस प्रशिक्षण का पूरा-पूरा लाभ उठाने की अपील की ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये दिल्ली से पधारे राष्ट्रीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक श्री बी.के. मिश्रा ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन में वृध्दि लाना तथा मछुवारों की आर्थिक व सामाजिक स्थिति में बेहतरी लाना है । उन्होंने कहा कि देश में आज प्रति हेक्टर औसतन 2 टन मछली पैदा होती है । जिसे हमें मत्स्यपालकों को प्रशिक्षित कर मत्स्य उत्पादन 5 टन प्रति हेक्टर लाना होगा । उन्होंने मछुवारा विकास की समन्वित योजना का खुलासा करते हुये कहा कि उत्तम प्रशिक्षण एवं सहकारिता के माध्यम से अपेक्षित परिणाम अर्जित किये जा सकेंगे । अभी तक देश की 15 हजार प्राथमिक मछुवारा समितियों के माध्यम से 25 लाख मछुवारे संघ से जुड़ चुके हैं । श्री मिश्रा ने आगे कहा कि देश में 2 करोड़ मछुवारे हैं तथा हर वर्ष आठ हजार करोड़ रूपये का मत्स्य उत्पाद निर्यात होता है । हमें इस निर्यात को भी बढ़ाना है ।प्रशिक्षण में मछुआरों को मत्स्य बीज उत्पादन,संवर्धन, नर्सरी प्रबंधन, मत्स्य आहार तथा विपणन सहित विविध जानकारियां दी जावेंगी ताकि वे अपने कार्यों में अपेक्षित सुधार लाकर मत्स्य उत्पादन तथा आय में वृध्दि कर सकें ।
मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त संचालक श्री वी.डी.शर्मा ने इस अवसर पर कार्यशाला की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला । उन्होंने राज्य एवं केन्द्र सरकार की मत्स्यपालकों के हित में चलाई जा रही योजनाओं की भी विस्तार से जानकारी दी । श्री शर्मा ने कहा कि ऐसे 10 दिवसीय प्रशिक्षण चार स्थानों पर संचालित किये जाना है । डबरा में भी आज सुबह ऐसा ही दस दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया जिसमें 30 मछुआरे शामिल हुये । मुरैना तथा मोहना में भी ऐसे मछुआरा शिविरों का आयोजन किया जायेगा ।
राज्य मत्स्यकी बोर्ड द्वारा प्रायोजित इस शिविर में 45 मछुआरे शामिल हुये । शिविर में शामिल मत्स्य उद्योग सहकारी समिति ग्वालियर के अध्यक्ष श्री भरोसी लाल ने बताया कि उनकी समिति हरसी बांध जलाशय तथा ककेटो बांध जलाशय से मछली पकड़ती है । जिसके लिये जिला पंचायत को सालाना 3 लाख रूपये की अनुबंध राशि भी अदा करती है । तीन वर्ष पूर्व हरसी बांध जलाशय से उन्होंने 40 किलो की सिल्वर कार्प पकड़ी थी। इन जलाशयों में कतला, मृगल और रोहू के अलावा बाम, पटोले, कुर्सा और सिंघाड़ा मछली सहित कई प्रकार की मछलियां प्राप्त होती हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सचान ने भी इस अवसर पर मछुआरों को संबोधित किया । राष्ट्रीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ केसहायक संचालक श्री एस एल माहोर ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया ।
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