नई मछली पालन नीति का अनुमोदन (मंत्रिमण्डल के निर्णय)
भोपाल 6 अगस्त#08। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में मत्स्यपालकों की समस्याओं के निराकरण और उनके हित संरक्षणों के लिए विकासोन्मुखी और कल्याणकारी नई मत्स्यपालन नीति वर्ष 2008 के प्रावधानों के अनुमोदन किया गया।
बैठक में 100 हेक्टेयर से 1000 हेक्टेयर तक के जल क्षेत्र प्रबंधन के अधिकार जिला पंचायत के अधीन रखे जाने का निर्णय लिया गया। पहले अधिकतम सीमा 2000 हेक्टेयर तक थी। बैठक में त्रिस्तरीय पंचायतों के तालाब-जलाशय प्रबंधन के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए केवल मत्स्य पालन के पट्टा आवंटन की प्रक्रिया-तकनीकी प्रक्रिया के अधिकार मत्स्य पालन विभाग को दिये जाने का फैसला लिया गया।
यह भी फैसला किया गया कि जिस वर्ष प्राकृतिक आपदा की वजह से मत्स्य बीज संचय नहीं हो पाएगा और इससे होने वाली हानि को देखते हुए हितग्राहियों से उस वर्ष की पट्टा राशि की वसूली नहीं की जाएगी। ऐसे तालाबों में जिनमें मछली पालन के साथ-साथ पहले से सिंघाड़ा और कमल गट्टा जैसी जलोपज का भी पट्टा दिया जाता है उनके हितग्राहियों से केवल मछली पालन कार्य के लिए निर्धारित पट्टा राशि लिए जाने का निर्णय लिया गया है।
यह भी निर्णय लिया गया कि मछली पालन कार्य के लिए पट्टे पर दिए जाने वाले सभी तालाबों और सिंचाई जलाशयों के अनुबंध प्रक्रिया को स्टाम्प शुल्क से मुक्त रखा जाएगा। पुराने तालाबों और जलाशयों में गाद जमा होने से उत्पादित जल क्षेत्र कम हो जाने के कारण संबंधित विभाग से जल क्षेत्र का पुन: आकलनं कराने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के जलाशयों में पूर्ण भराव जल क्षेत्र (एफ.टी.एल) से ऊपर के नदी क्षेत्र के एक किलोमीटर तक मत्स्याखेट प्रतिबंधित होगा।
बैठक में ग्रामीण बारहमासी तालाब एक हेक्टेयर तक, ग्रामीण मौसमी तालाब 2 हेक्टेयर तक, 1000 हेक्टेयर औसत जलक्षेत्र तक के जलाशय 4.00 हेक्टेयर तक और 1000 हेक्टेयर औसत जलक्षेत्र से अधिक के सभी जलाशयों में 10 हेक्टेयर प्रति व्यक्ति जलक्षेत्र आवंटन दर से निर्धारण किये जाने का निर्णय लिया गया।
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