शुक्रवार, 23 मई 2008

किसान के पास खेती के साथ रोजगार का अतिरिक्त साधन जरूरी : सुश्री रंजना चौधरी

किसान के पास खेती के साथ रोजगार का अतिरिक्त साधन जरूरी : सुश्री रंजना चौधरी

रबी फसल में कृषि रकबा तथा पैदावार बढ़ाने का फैसला

ग्वालियर 22 मई 08 । किसानों के पास खेती-बाड़ी के साथ-साथ रोजगार का कम से कम एक अतिरिक्त साधन जरूर होना चाहिये । निरंतर अल्पवर्षा से प्रभावित रहने वाले ग्वालियर तथा चंबल संभाग के किसानों के लिये तो यह और भी जरूरी हो जाता है । उक्त आशय के विचार आज यहां ग्वालियर तथा चंबल संभाग के खरीफ कार्यक्रम निर्धारण बैठक में प्रदेश की उत्पादन आयुक्त सुश्री रंजना चौधरी ने व्यक्त किये । बैठक में संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन विभाग के विभागाध्यक्षों सहित ग्वालियर तथा चंबल संभाग के जिला कलेक्टर्स, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत व वन विभाग की वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के अधिकारीगण भी उपस्थित थे ।

कृषि उत्पादन आयुक्त ने खाद्यान्नों के उत्पादन में बढ़ोतरी की अनिवार्यता को रेखांकित करते हुये इसे सर्वोच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र निरूपित किया । उन्होंने कहा कि बजट का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र पर लगाया जा रहा है ताकि कृषि उत्पादन में भी अपेक्षित वृध्दि दर अर्जित की जा सके । उन्होंने सभी जिला कलेक्टर्स से व्यक्तिगत रूचि लेकर विभागीय अमले को सही नेतृत्व देने की अपील की । ताकि कृषि उत्पादन वृध्दि के साथ-साथ कृषि आधारित अन्य व्यवसाय अपना-कर ग्रामीण क्षेत्रों में भी समृध्दि लाई जा सके । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, फूड सिक्यूरटी मिशन तथा वॉटर रिस्ट्रक्चरिंग जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के लचीलेपन का लाभ लेकर स्थानीय प्राथमिकता आधारित योजनाओं द्वारा प्राथमिक सेक्टर को मजबूत किया जावे।

       ग्वालियर तथा चंबल संभाग के विगत वर्षों के कृषि उत्पादन की समीक्षा करते हुये उन्होंने कहा कि विगत चार वर्षों से अल्पवर्षा के बावजूद गत वर्ष खाद्यान्न का अच्छा उत्पादन सराहनीय है । ग्वालियर तथा चंबल संभाग में आगामी खरीफ पैदावार के लिये 1119.5 हजार हेक्टर कृषि क्षेत्र में 1376.1 हजार टन कृषि पैदावार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । जो गत वर्ष की तुलना में 236.3 हजार हेक्टर कृषि रकबे में और 256.6 हजार टन पैदावार में अधिक है । उत्पादन आयुक्त ने आशा व्यक्त की है कि जब विपरीत परिस्थितियों में भी हमारा किसान पैदावार बढ़ा सकता है तो निश्चय ही जब उसे सही खाद, बीज एवं मार्गदर्शन मिलेगा तो वह अपेक्षित परिणाम अर्जित करने में अवश्य ही कामयाब होगा ।

ग्वालियर तथा चंबल संभाग में पशुपालन को बढ़ावा देने पर बल देते हुये उन्होंने पशु नस्ल संवर्धन, पशु स्वास्थ्य रक्षा, उपलब्ध संसाधनों के उचित दोहन तथा अंर्तविभागीय समन्वय पर विशेष बल दिया । उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बकरी पालन तथा कुक्ट पालन के कार्य को प्राथमिकता से बढ़ाया जाना चाहिये । सुश्री चौधरी ने कहा कि राजस्थान जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में न केवल बकरी पालन अपितु दुग्ध उत्पादन व्यवसाय को भी परिणाममूलक ढंग से किया जा सकता है तो कोई कारण नहीं कि हम ग्वालियर तथा चंबल संभाग में इस दिशा में सफल न हो । वैसे भी गौ-भैंस वंश की दृष्टि से ग्वालियर तथा चंबल संभाग में प्रदेश का सर्वाधिक 47.17 प्रतिशत पशुधन है । साथ ही दुग्ध उत्पादन में भी मुरैना तथा श्योपुरकला प्रदेश का अग्रणी क्षेत्र है जहां से प्रदेश का 23.19 प्रतिशत दूध प्राप्त होता है । उन्होंने जिला कलेक्टरों से मुखातित होते हुये कहा कि वह इस क्षेत्र में आधुनिक अण्डा उत्पादन इकाई स्थापित करने के लिये भी निवेश हेतु उद्यमियों को प्रेरित करें । पशुओं की नस्ल सुधार की दृष्टि से भी उन्होंने सभी प्रयासों को तेजी से करने की हिदायत दी । उन्होंने कहा कि पशुपालन ऐसा व्यवसाय है जिसके लिये सदा बाजार मौजूद रहता है ।

मध्यप्रदेश में वनों से सटे ग्रामों का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि प्रदेश के 55000 ग्रामों में से लगभग 20000 ग्राम वनों से सटे 5 किलोमीटर के दायरे वाले बफर जोन में आते हैं । इन क्षेत्रों की ज्वाइंट फोरेस्ट मैनेजमेंट कमेटियों के सदस्य जैविक खेती को बढ़ावा देने सहित क्षेत्र विकास में सहयोगी हो सकते हैं । उन्होंने जिला कलेक्ट्ररों से वन विभाग के अधिकारियों के माध्यम से इनका भी उपयोग क्षेत्र के प्राथमिक सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में करने की बात कही । साथ ही उन्होंने बताया कि अब शीघ्र ही सप्ताह में दो बार अर्थात मंगलवार और शुक्रवार को मौसम की अग्रिम सूचना मिलने लगेगी जिसको आधार बनाकर कृषि विज्ञानी किसानों को सही सलाह दे सकेंगे । उन्होंने कृषक उपयोगी इन सूचनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिये संस्थागत माकूल व्यवस्थायें करने के भी अधिकारियों को निर्देश दिये ।

बैठक में दोनों संभागों के जिला कलेक्ट्ररों ने अपने क्षेत्र की कृषि विशेषताओं तथा आवश्यकताओं की तरफ ध्यान दिलाते हुये उन्नत किस्म के बीजों की व्यवस्था का आग्रह किया । अशोकनगर सहित अन्य कुछ जिलों ने मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला को प्रभावी बनाने का भी अनुरोध किया । उत्पादन आयुक्त ने गुना जिले में हर गांव खेत की मिट्टी परीक्षण के कार्य करवा लिये जाने के प्रयास की भी विशेष सराहना की । उन्होंने उद्यानिकी विभाग की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की तथा उनके क्रियान्वन को परिणाममूलक बनाने के लिये जरूरी हिदायतें दी । बैठक में उर्वरक की माकूल व्यवस्था, कृषि ऋण तथा किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने के काम की भी समीक्षा की गई ।

संभागायुक्त डॉ. कोमल सिंह ने कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्य पालन आदि विभागों के अधिकारियों को जिला कलेक्ट्रर तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के सतत संपर्क में रहकर काम करने की हिदायत दी । उन्होंने कहा कि टीम भावना से संयुक्त प्रयासों द्वारा ही लक्ष्य अर्जित किया जा सकता है । साथ ही डॉ. सिंह ने प्रदेश की कृषि उत्पादन आयुक्त को विशेष गंभीरता से समीक्षा करने, कृषि आधारित व्यवसायों को बढ़ाने का मार्ग सुझाने तथा श्रेष्ठ मार्गदर्शन के लिय न केवल आभार व्यक्त किया अपितु उन्हें लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में ठोस प्रयासों का भी आश्वासन दिया ।

 

कोई टिप्पणी नहीं: