मंगलवार, 29 अप्रैल 2008

भू अर्जन और मुआवजा वितरण हेतु समय सीमा निर्धारित

भू अर्जन और मुआवजा वितरण हेतु समय सीमा निर्धारित

संभागायुक्त की अध्यक्षता में टास्क फोर्स की बैठक सम्पन्न

मुरैना 28 अप्रैल 08/ संभागायुक्त श्री विश्वमोहन उपाध्याय की अध्यक्षता में गत दिवस सम्पन्न संभाग स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में कूनो अभ्यारण्य से विस्थापित किये गये 24 राजस्व ग्रामों से संबंधित पात्र व्यक्तियों को भू-अर्जन और मुआवजा वितरण की कार्रवाई दो माह की समयावधि में पूर्ण कराने का निर्णय लिया गया । श्री उपाध्याय ने कहा कि पात्र व्यक्तियों को मुआवजा वितरण की कार्रवाई कलेक्टर श्योपुर द्वारा भू- अर्जन अधिनियम 1894 के अंतर्गत की जा रही है । इस कार्य में वन विभाग समन्वय स्थापित कर सहयोग प्रदान करें और समयावधि में मुआवजा वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करायें । इस अवसर पर वन संरक्षक (वाइल्ड लाईफ) श्री मुरली कृष्णन, वन संरक्षक श्री आर.पी.सिन्हा, कलेक्टर मुरैना श्री आकाश त्रिपाठी , कलेक्टर श्योपुर श्री शोभित जैन तथा मुरैना, भिण्ड और श्योपुर जिले के पुलिस अधीक्षक, वन मंडलाधिकारी  और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व उपस्थित थे ।

       बैठक में बताया गया कि अवैध उत्खनन की गतिविधियों पर नियंत्रण हेतु प्रभावी कार्रवाई जारी है । उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार चम्बल अभ्यारण्य के नजदीक पिपरई ग्राम में अवैध रेत उत्खनन नहीं होने देने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किये गये हैं । साथ ही उत्खनन कर्ताओं के विरूध्द उनके वाहन जप्त कर वन अपराध प्रकरण पंजीवध्द किये गये हैं । शनीचरा के आस-पास का क्षेत्र फर्शी पत्थरों के अवैध उत्खनन की दृष्टि से अत्याधिक संवदन शील है, अवैध उत्खनन रोकने के लिए नियमित पैट्रोलिंग के साथ ही खदानों के रास्तों को खुदाई कर बंद कराने के प्रयास किये गये हैं । माह मार्च में 11 वन अपराध प्रकरण दर्ज किये गये । शनीचरा क्षेत्र में पढ़ावली के आस-पास 100 स्थानों पर बोर कर ब्लास्ंटिग के जरिए खदानों को नष्ट कराया गया ।

       राष्ट्रीय चम्बल अभ्यारण्य की सीमाओं के युक्तियुक्त करण के संबंध में वन्य प्राणी अधि नियम 1972 की धारा 24 के अन्तर्गत अधिकारों के व्यवस्थापन उपरांत आदेशजारीकरने की कार्रवाई की जायेगी । इनमें वन मंडलाधिकारी कलेक्टर्स का सहयोग करें । राजस्थान के रणथम्बोर टाईगर रिजर्व और मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनों वन्य प्राणी अभ्यारण्य के बीच बाघों के आवागमन हेतु कॉरीडोर की पहचान संबंधी विषय पर चर्चा के दौरान संभागायुक्त ने 24 ग्रामों की व्यवस्थापन कार्रवाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए और तब तक कॉरीडोर की पहचान के कार्य को लंबित रखने को कहा ।

       बैठक में बताया गया कि चम्बल नदी के राजघाट पर तैरती हुई जेटी की स्थापना कर दी गई हैं । यहां एक अस्थाई कैम्प ऑफिस भी निर्मित कराया जायेगा । संभागायुक्त ने अभ्यारण्य में बोट सफारी के साथ- साथ ऊटों की सवारी के उपयोग हेतु प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए । बैठक में राजस्व और वन भूमि सीमा विवाद के निराकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई ।

 

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