शनिवार, 17 अप्रैल 2010

''यह सुबह हमी तो लायेंगे'' के संकल्प के साथ मीडिया कार्यशाला सम्पन्न

''यह सुबह हमी तो लायेंगे'' के संकल्प के साथ मीडिया कार्यशाला सम्पन्न

ग्वालियर 16 अप्रैल 10। ग्वालियर चंबल अंचल में बालिकाओं की घटती संख्या विषय पर आयोजित कार्यशाला ''  जिंदगी में रंग भरती बिटिया'' इस आशा के साथ प्रारंभ हुई कि '' यह सुबह कभी तो आयेगी और इस संकल्प के साथ समाप्त हुई कि '' यह सुबह हम ही लायेंगे'' महिला एवं बाल विकास विभाग के तत्वावधान में तानसेन होटल के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल के प्रोफेसर श्री पी पी. सिंह, नई दिल्ली से महिला अधिकारों के क्षेत्र में कार्य कर रहीं सुश्री अंजली सिन्हा, एण्डो एशियन न्यूज सर्विस नई दिल्ली के कार्यकारी संपादक श्री अरूण आनंद, यूनिसेफ भोपाल के संचार अधिकारी श्री अनिल गुलाटी, वरिष्ठ पत्रकार श्री लोकेन्द्र पाराशर, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग श्री सुरेश तोमर, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती सीमा शर्मा, परियोजना अधिकारी श्री शालिन शर्मा तथा श्री तिवारी सहित बड़ी संख्या में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

       प्रोफेसर श्री सिंह ने कहा कि बदलते परिवेश में मीडिया की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक बदलाबों के लिये आमजन मीडिया को जिम्मेदार मानने लगा है। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं की या परिवार में बेटी की भूमिका अहम है, इनके अस्तित्व की रक्षा होनी चाहिये, इस विषय पर समाज का प्रत्येक वर्ग अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी से बचना चाहता है। उन्होंने कहा कि गिरता लिंगानुपात या कन्या भ्रूण हत्या विषय सामाजिक  समस्या है। इसके लिये सामाजिक सोच में बदलाबों की आवश्यकता है। लेकिन सामाजिक सोच में बदलाबों की कठिन प्रक्रिया है इसके लिये लंबे समय तक, विषय के संबंध में समाज को जागृत किया जाता रहे। उन्होंने कहा कि मीडिया के क्षेत्र में बढ़ते बाजारबाद के कारण सामाजिक विषय से ध्यान घटा अवश्य है लेकिन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने मीडिया  कर्मियों को प्रेरित किया कि  अपने  संचार माध्यम की माँग के साथ -साथ सामाजिक विषय पर भी लेखन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि लेखक  के लिये  दृष्टि की व्यापकता और विषय की जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रेस प्रतिनिधि शौध पूर्ण दृष्टि रखें तभी वह सामाजिक सरोकारों के विषयों पर प्रभावी लेखन कर समाज का पथ प्रदर्शन कर सकेंगे।

       सुश्री अंजली मिश्रा ने कहा कि सामाजिकीकरण की प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका अहम है। मीडिया अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है लेकिन कारपोरेट का प्रभाव मीडिया की कार्य प्रणाली पर नजर आता है। उन्होंने कहा कि आज के युग में मीडिया द्वारा सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुतिकरण करने पर उसका सकारात्मक प्रभाव समाज पर पड़ता है। मीडिया को अपनी जिम्मेदारी को और अधिक प्रभावी ढंग से निभानी चाहिये। उन्होंने मीडिया तथा सामान्य बोलचाल में व्यक्त किये जाने वाले स्त्री वाचक शब्दों के प्रयोग पर भी आपत्ति दर्ज कराई, उन्होंने कहा कि इस तरह के शब्द समाप्त होना चाहिये, तभी बालक-बालिका भेद समाप्त हो सकेगा।

       श्री अरूण आनंद ने कहा कि मीडिया की अपनी भूमिका के साथ-साथ उसकी अपनी कार्यशैली है। मीडिया समय-समय पर समाजिक सरोकारों से संबंधित विषयों को उठाता रहा है और यह क्रम भविष्य में भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मीडिया के जो लोग ग्रास लेवल पर कार्य कर रहे हैं वास्तविक अर्थ में वही मीडिया की जड़ है, जिनपर समाचार जगत का वट वृक्ष खड़ा हुआ है। हमें ग्राउण्ड लेवल पर कार्य करने वाले पत्रकारों के महत्व को स्वीकार करना होगा।

       श्री लोकेन्द्र पाराशर ने कहा कि भारत में मीडिया पूरी ईमानदारी और शिद्दत के साथ अपने दायित्वों का निर्वाहन कर रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर मीडिया द्वारा की गई बेबाक टिप्पणियों के आश्चर्यजनक परिवर्तन महसूस किये गये हैं। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसे विषय पर भी मीडिया को अपनी भूमिका तय कर व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वीकार करना चाहिये।

       श्री अनिल गुलाटी ने कहा कि यूनिसेफ द्वारा बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को जीने का अधिकार है लेकिन भ्रूण हत्या के माध्यम से उस बच्चे के जीने के अधिकार को छीना जाता है। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ की परिभाषा में 0-14 वर्ष के बच्चों का घटता अनुपात चिंता का विषय है। वर्ष 1981 में जो संख्या 938 प्रति हजार थी वह 1991 में 927 प्रतिहजार तथा 2001 में घट कर 918 प्रति हजार हो गई है जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि  यह गंभीर  विषय है इस पर समाज के प्रत्येक वर्ग को सोचने की आवश्यकता है। कार्यशाला के प्रारंभ में संयुक्त संचालक श्री तोमर ने जिंदगी में रंग भरती है बिटिया विषय पर आयोजित कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग्वालियर चंबल अंचल में घटता लिंगानुपात गंभीर समस्या है। इस पर आम व्यक्ति का ध्यान आकर्षित कराने में मीडिया महत्वपूर्ण रोल अदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लिंगानुपात 922 प्रति हजार है जबकि चंबल अंचल के मुरैना जिले का 822 तथा भिण्ड जिले का लिंगानुपात 823 हो गया है। इन जिलों में कुछ ऐसे ग्राम भी है जिनमें यह अनुपात घटकर लगभग 600 तक आ गया है जो कि स्थिति  की भयावहता को प्रदर्शित करता है।  उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा इस विषय पर सामाजिक चेतना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

       कार्यशाला में परियोजना अधिकारी शालिन तिवारी द्वारा पी एन डी टी. एक्ट के प्रावधानों के विषय में भी प्रकाश डाला गया।

 

कोई टिप्पणी नहीं: