मंगलवार, 16 जून 2009

गोपीकृष्ण सागर: परिंदों से दोस्ती का नया मुकाम

गोपीकृष्ण सागर: परिंदों से दोस्ती का नया मुकाम

ग्‍वालियर 15 जून 09। संभाग के गुना जिले का गोपीकृष्ण सागर अब परिंदों से दोस्ती का नया मुकाम बन गया है। अत: अब प्रदेश में परिंदों से दोस्ती का दायरा सिर्फ राजधानी तक न सिमटकर लगातार फैलाया जा रहा है। गोपीकृषण सागर को गुना जिला प्रशासन मुस्तैदी से बर्ड वाचिंग सेंटर बनाने में जुटा है।

गोपी कृष्ण सागर बांध को बर्ड वाचिंग सेन्टर के रूप में भी विकसित किया जा रहा हैं। यहां आने वाले प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों को चिन्हित कर उनकी जानकारी सेलानियों के लिये सहज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई हैं। पयर्टको की सुविधा की दृष्टि से बांध स्थल का चौतरफा विकास किया जा रहा है।

       जिला मुख्यालय से 15 किलो मीटर दूर आगरा-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग से 2 किलो मीटर अन्दर चौपन नदी पर बने गोपी कृष्ण सागर बांध स्थल को जिले के पर्यटक स्थल के रूप में उभारा गया हैं। बांध का जलग्रहण क्षेत्र 294 वर्ग किलोमीटर हैं जो 12 माह पानी से लबालब रहता है। बांध स्थल को पर्यटन की दृष्टि से उभारने के लिये यहां अनेक कार्य किये गये हैं जिससे बांध स्थल की खूबसूरती तो निखरी ही, साथ ही यहां आने वाले सैलानियों के लिये बोटिंग, केफेटेरिया, बांध किनारे आकर्षक फुटपाथ, बांध का विहंगम दृश्य दिखाने वाला वॉच टॉवर, आकर्षक गार्डन और बच्चों के लिए मंनोरजंक झूले भी लगाये गये हैं।

सैलानियों की सुविधा के लिये यहां पहले से बने रेस्ट हाउस का भी जीर्णोध्दार किया जाकर उसे सर्वसुविधायुक्त बनाया गया हैं। बांध निर्माण के समय यहां बनाये गये मंदिर के प्रति आस पास के क्षेत्रवासियों की धार्मिक आस्थायें जुडी हुई हैं। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुये मंदिर परिसर का भी विकास किया गया हैं। बांध पर बडी संख्या में प्रवासी पक्षियों का आना जाना वर्षों से जारी है। यहां आने वाले स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों को चिन्हांकित कर उनका विस्तृत ब्यौरा सैलानियों के ज्ञानवर्धन के लिए सहज उपलब्ध कराया गया हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग से बांध स्थल तक पहँचने के लिए दो किलो मीटर लम्बें पहँच मार्ग को सुगम बनाने के लिये डामरीकृत मार्ग का निर्माण किया गया है।

बांध पर आने वाले प्रवासी पक्षी

बारह माह पानी से लबालब भरे रहने वाला गोपी कृष्ण सागर बांध पयर्टको को तो अपनी ओर आकर्षित करता ही हैं साथ ही यहा अनेक प्रवासी पक्षी भी कुछ समय तक अपना आशियाना बना लेते हैं। जिला प्रशासन ने पक्षी विशेषज्ञों के सहयोग से यह पता लगाते हुये उन प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों को भी चिन्हित कराया जो अक्सर बांध क्षेत्र में देखे जाते हैं। बांध पर नियमित रूप से आने वाले प्रवासी पक्षियों की 21 प्रजातियां विशेषज्ञों द्वारा पहचानी गई है। इनमें बडापन कउआ,सीठी, सुरखाव,सीखपर,छोटी मुर्गावी, गुगराल, लालसर, बेखुरबतख, पीसानबतख, डुबरी, गिरीबतख, सफेदसिरा, चाह, गजपीन, बारसरल,चाचा, अबाविल, काला थिरथिरा, पिलकिया खंजन,धोबन और पत्थर चिडिया शामिल हैं।

 

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