चंदेरी: अधोसंरचना उन्नयन और विकास कार्य प्राथमिकता से पूरा होगा
साढ़े ग्यारह किलोमीटर लाइन बिछाकर राजघाट से लायेंगे पानी
ग्वालियर 7 जनवरी 09। चन्देरी की परम्परागत बुनाई की समृध्द परम्परा एवं वहां के नागरिकों को राहत पहुंचाने वाली चन्देरी हाथ करघा कलस्टर अन्तर्गत अधोसंरचना उन्नयन और विकास का कार्य तीव्र गति से पूरा हो इसके लिये आज प्रमुख सचिव ग्रामोद्योग श्री एम.ए.खान ने संभागायुक्त डा. कोमल सिंह के साथ सम्बन्धित वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष बैठक में समीक्षा की। उल्लेखनीय है कि सौ वर्ष से भी पुराने चन्देरी वस्त्र बुनाई उद्योग को संकट से उबारने के लिये राज्य शासन की पहल पर केन्द्र से मंजूर 27 करोड़ रूपये की महत्वकांक्षी योजना पर क्रियान्वयन प्रारंभ हो चुका है।
चन्देरी नगर में पानी की समस्या के निराकरण के लिये राजघाट परियोजना से साढ़े ग्यारह किलोमीटर पाइप लाइन बिछा कर पानी लाया जावेगा। राज्यशासन ने 8.60 करोड की इस योजना को मंजूरी देने के साथ साथ प्रथम चरण में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को इस कार्य के लिये 3 करोड़ रूपये भी सुलभ कराये जा रहे है। साथ ही परियोजना में प्रस्तावित आंतरिक मार्गों के लिये भी डेढ़ करोड़ रूपये दिये जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने परियोजना के लिये साढ़े छह एकड़ भूमि भी आवंटित कर दी है। कार्यक्रम क्रियान्वयन में बेहतर समन्वय की दृष्टि से सिंचाई विभाग के मुख्य अभियन्ता श्री एच.डी.जोशी को सम्पर्क अधिकारी तैनात किया गया है। श्री जोशी इस दिशा में राजघाट परियोजना के अधिकारियों से निरंतर जीवंत सम्पर्क में रहेंगे । राजघाट परियोजना ने चन्देरी पेयजल योजना पर अपनी सहमति दे दी है। नगर पंचायत चन्देरी ने भी पेयजल योजना पूरी होने के उपरान्त उसकी देखभाल का दायित्व संभालने पर अपनी हॉमी भर दी है। चन्देरी की इस पेयजल योजना को पूरा होने में 18 माह से 24 माह तक का समय लगेगा। परियोजना से चन्देरी के बुनकरों के अलावा वहाँ के सभी रहवासी भी लाभान्वित होंगे।
चन्देरी की समृध्द बुनाई परम्परा को संरक्षण देने के लिये संभगायुक्त डॉ. कोमल सिंह की चेयरमैनशिप वाली चन्देरी के हथकरघा बुनकरों की चन्देरी विकास समिति बनाई गई है। जिला कलेक्टर अशोक नगर को समिति का डिप्टी चेयरमैन तथा डिप्टी डायरेक्टर जोनल हैण्डलूम ऑफिस ग्वालियर को इसका प्रबन्ध संचालक बनाया गया है। समिति रंगाई घर, कच्चे माल की उपलब्धता के लिये रॉ-मैटेरियल बैंक सहित सदस्यों के लिये वर्क स्टेशन की भी व्यवस्था करेगी। समिति की सदस्यता का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। चन्देरी में वर्तमान में 3500 हथकरघा कार्यशील हैं जिनसे दस हजार लोगों का रोजगार चल रहा है जो सीधे इस परियोजना से लाभान्वित होंगे ।
बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियन्ता श्री सकुनिया, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण यंत्री श्री जैन तथा हैण्डलूम विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे। संभागायुक्त ने परियोजना की प्रगति की पुन: समीक्षा हेतु 13 जनवरी को सम्बन्धित वरष्ठि अधिकारियों की आगामी बैठक भी तय कर दी है। संभागायुकत ने सभी अधिकारियों से परियोजना का कार्य समय-सीमा में पूरा करने का आग्रह किया है ।
चंदेरी की पहचान -चंदेरी साड़ी से
राजे-महाराजे, बादशाह, सुल्तान, हारी-जीती लड़ाईयां, रानियों के जौहर, महल, किले, दरवाजे और भी न जाने क्या क्या जिन्होंने चन्देरी को ख्याति दी थी, वह अब मात्र जनश्रुतियों में ही बची है, लेकिन 12 वीं, 13 वीं सदीसे आज तक जो जीवित है वह है यहां के बुनकरों का जादू, जिसे देश का और धनाढय वर्ग चन्देरी साड़ी के नाम से जानता है- पहचानता है। चन्देरी में बुनाई की शुरूआत से संबंधित एक किंवदंती लोक मानस में गहरे पैठी है और इससे जुड़े हैं मुस्लिम संत निजामुद्दीन औलिया और उनके हजारों मुरीद जिनमें बंगाल के बुनकर भी थे। हजरत निजामुद्दीन औलिया ने उन्हें अलाउद्दीन खिलजी के कोप से बचने यहां भेजा था । समय के थपेड़ों ने बहुतों को उनके वतन लौटने को मजबूर कर दिया। कुछ जो बचे रहे वे यहां भी वैसी मलमल बनाते थे, जो कभी ढ़ाका में बनती थी।






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